.मैंने 2006-2019 के बीच लगभग 8 साल UAE में नौकरी के सिलसिले में गुज़ारे हैं । यह 8 साल मेरी ज़िंदगी के बहतरीन सालों में थे । में वहाँ Engineering Consultant था इसलिए वहाँ के नैशनल से मुलाक़ात भी काफ़ी रहती थी और बातचीत भी ख़ूब होती थी । “हिंद “ के लिए उनके दिल में मैंने बहुत इज़्ज़त देखी । मैंने वहाँ देखा कि उन्हें बंदे की क़ौम , नैशनैलिटी या धर्म से नहीं उसके काम से मतलब था । वो लोग पाकिस्तानियों और बंगलादेशीयों से काफ़ी हद तक चिढ़ते थे और हिंदियों ( भारतीयों) को ईमानदार , मेहनती और अच्छा समझते थे । भारतीयों ने वहाँ बहुत मेहनत की है तभी यह मुक़ाम हासिल हुआ है । उनके लिए हर भारतीय चाहे वो हिंदू हो , मुसलमान हो या सिख हो , हिंदी है । क्यूँकि हिंदू ज़्यादा पढ़े लिखे हैं इसलिए वहाँ पर लगभग हर बैंक , हर बड़ी कम्पनी में टॉप मैनज्मेंट में आपको भारतीय हिंदू दिख जाएँगे । बिज़्नेस में भी वहाँ पर भारतीय टॉप पर हैं । 

जो भारतीय वहाँ पर है उनमें भी हिंदू मुस्लिम वाली फ़ीलिंग नहीं थी । वहाँ पर हमारे बीच में नॉर्थ इंडियन और साउथ इंडियन वाली फ़ीलिंग ज़रूर थी । हम सभी नोर्थ इंडियन एक साथ रहते थे और साउथ इंडियन एक साथ रहते थे । किसी की कम्पनी में कोई वेकन्सी हो तो हम लोग कोशिश करते कि कोई नोर्थ इंडियन आ जाए और साउथ वाले साउथ इंडियन को रखाने की कोशिश करते । हिंदू या मुसलमान इसमें नहीं देखा जाता था । 

फिर 2014 आया , धीरे धीरे हालात बदलने लगे । हम लोगो में आपस में राजनीतिक बहस शुरू हो गयी । नोर्थ इंडिया के लगभग सभी हिंदू मोदी समर्थक हो गए और मुसलमान मोदी विरोधी । सोशल मीडिया जिसे वहाँ पर ज़्यादा तर लोग अपनी तफ़रीह के लिए इस्तेमाल करते थे उसमें राजनीतिक पोस्ट की भरमार हो गयी । अब मामला राजनीति से आगे निकलकर नफ़रत पर पहुँच गया और वहाँ पर काम करने वाले लोग भी इससे अछूते नहीं रहे । UAE का क़ानून है कि आप किसी भी धर्म या किसी भी कम्यूनिटी के ख़िलाफ़ नफ़रत नहीं फेला सकते । लेकिन उसके बाद भी कई लोग जोश में या भारतीय राजनीति से प्रभावित होकर मुस्लिम विरोधी पोस्ट लिखने लगे । कई लोगों की शिकायत हुई और उन्हें वहाँ अपनी नौकरी गँवानी पड़ी । whats group से जो नफ़रत भारत में बँट रही है उसका असर अरब मुल्कों में रह रहे भारतीयो पर भी पड़ने लगा था । 

अब तो नफ़रत अपने पीक पर है । तेजस्वी सूर्या और सुब्रमणयम स्वामी जैसे भारतीय सांसद अरब मुल्कों की महिलाओं और वहाँ के तीर्थ स्थलो तक को निशाना बना रहे हैं । वहाँ के नैशनल भी इसे बहुत सीरीयस ले रहे हैं । हाल फ़िलहाल में मुसलमानो के ख़िलाफ़ ट्वीट या फ़ेसबुक पोस्ट लिखने पर कई भारतीय हिंदू जेल जा चुके है और अपनी नौकरी से हाथ धो चुके हैं । तेजस्वी सूर्या ने दबाव में ट्वीट डिलीट कर दिया है लेकिन उसकी जहालत ने नुक़सान पूरा कर दिया है । सरकार से अरब मुल्कों के सम्बंध हमेशा से अच्छे रहे हैं । भारतीयों ने अपनी मेहनत से जो वहाँ मुक़ाम कमाया था वो चंद जाहिलो और नफ़रती चिंटूओ की वजह से ख़राब हो रहा है । प्रधानमंत्री जी ने कल कहा है कि कोरोना धर्म और जाति नहीं देखता । मीडिया और आईटी सेल पिछले एक महीने से कोरोना का धर्म बता रहा है , प्रधानमंत्री को पहले ही इसमें intervene करना चाहिए था । अब डैमिज इतना हो चुका है कि शायद कंट्रोल करना मुश्किल है । दिमाग़ में भरी नफ़रत के चलते लाखों भारतीयों की नौकरी पर तलवार टँगी हुई है । अगर अरब मुल्कों में हालात नहीं सुधरे तो भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी इसका गहरा असर पड़ेगा । प्रधानमंत्री को इस पर संज्ञान लेना चाहिए । मीडिया पर लगाम लगानी चाहिए। 

तेजस्वी सूर्या और सुब्रमणयम स्वामी की सदस्यता को तत्काल प्रभाव से ख़त्म करके ही अब डैमिज कंट्रोल किया जा सकता है ।. अवेस इकबाल

20-Apr-2020

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