शाहीन,बाज़ (ईगल) माद्दा के बच्चों का जब उड़ना सीखने का वक़्त आता है तब उनकी माँ उनको उठाकर दस हज़ार फीट की बुलंदी पर ले जाती है और फिर वहां से नीचे ज़मीन की तरफ फेंक देती है बच्चा नीचे गिरना शुरू होता है। अपने नन्हे पर फड़फड़ाकर अपने आपको बचाने और उड़ने की कोशिश करता रहता है मगर दस हज़ार फीट की बुलंदी पर उड़ना बच्चों का खेल नहीं है। दुनिया में सिर्फ ये एक ही परिंदा है जो इतनी बुलंदी पर उड़ता है। किसी दुसरे परिंदे की मजाल ही नहीं जो इस बुलंदी को छू सके। वो बच्चा तेज़ी से। नज़दीक आती ज़मीन को देखकर सहम जाता है,अपने परों को और तेज़ी से मारना शुरू कर देता है। अपनी आख़री कोशिश करता है फिर फिजा में अपनी नजरें घुमाकर माँ को ढूंडने की कोशिश करता है मगर उसकी माँ कहीं नज़र नहीं आती, जो करना है ख़ुद ही करना है। बचना है तो उड़ना है। वरना मरना है। बच्चा अपनी कोशिश जारी रखता है मगर कामयाबी नहीं मिलती यहाँ तक की ज़मीन करीब पहुँच जाती है। उसके ज़मीन से टकराने और पाश पाश होने में बस कुछ ही लम्हे बाक़ी होते है। वो अपनी आँखें बंद कर लेता है। उसे इतने में अपने नज़दीक दो परों की फड फडाहट सुनाई देती है। उसे महसूस होता है किसी ने उसे अपने पंजों में दबोच लिया है। अब वो गिर नहीं रहा। उसकी माँ उसे गिरने से पहले दोबारा दबोच लेती है और वापस घोंसले में पहुंचा देती है। ये अमल उस वक़्त तक जारी रहता है जबतक बच्चा बेखौफ़ होकर उड़ना सीख नहीं लेता। माद्दा ईगल सिर्फ उड़ने तक उसका साथ नहीं देती बल्कि जीवन साथी चुनने में अपने नर साथी के साथ उसकी सलाहियतों को परखती है। किसी नर ईगल से मिलन से पहले माद्दा ईगल एक पत्थर को बुलंदी से फेंकती है। ये नर ईगल के लिए चेलेंज होता है के वो ये पत्थर पकड़ कर दिखाए जो ज़मीन पर गिरता है।जहां हर चीज़ की रफ्तार ग्रेविटी की वजह से बढती जाती है जो की 200 किलो मीटर प्रति घंटा भी हो सकती है। मगर ईगल की रफ़्तार इससे कई ज़्यादा 300 किलो मीटर प्रती घंटा तक हो सकती है। नर ईगल निहायत ही तेज़ी से ज़मीन की तरफ जाकर उस पत्थर को ले आता है। माद्दा ईगल ये आज़माईश सिर्फ एक मर्तबा नहीं बल्कि उस वक़्त तक जारी रखती है जबतक उसे ये इत्मीनान ना हो जाए के नर ईगल उसे कमाने की सलाहियत रखता है या नहीं।

शाहीन (ईगल) एकदम निडर और बहाद्दुर परिंदा है। डर क्या होता खौफ किस चिड़िया का नाम है? ये परिन्दा नहीं जानता। शिकार करते वक़्त वो ये कभी नहीं सोचता के उसका शिकार कौन है? कितना वज़नी है और किस किस हथियार से लैस है। ये मुरदार(मरा हुआ) हरगिज़ नहीं खाता बल्कि ख़ुद ताज़ा शिकार करके खाता है। इसकी निगाहें इंसान की निगाहों से पांच गुना ज़्यादा तेज़ होती है।  इसका शिकार जब इसकी नज़रों में आ जाता है तो उसका बचना तकरीबन ना मुमकिन हो जाता है। बड़े जानवरों के शिकार के लिए ये अमूमन बुलंदी से गिराने का तरीक़ा इस्तेमाल करता है।इसके इस स्ट्रेटेजी से कछवे जैसी मोटी चमड़ी रखने वाला भी सुरक्षित नहीं रहता। ये बुलंदी पर लेजाकर उन्हें चट्टानों पर पटख देता है जिनसे उनकी खाल पाश पाश हो जाती है।

तूफ़ान के आने पर तमाम परिंदे सुरक्षित जगह तलाश करते है लेकिन शाहीन तूफानों से मोहब्बत करने वाला परिंदा है। तूफानों की तुंद तेज़ हवाओं से इसे बुलंदी पर उड़ने केलिए कम मेहनत करनी पडती है। ये परिंदा बजाए घबराने के तूफानों से मोहब्बत करता है। ये परिंदा क़ुदरत का एक बेहतरीन शाहकार है। जिससे बहुत कुछ सीखा जा सकता है।
इल्यास मख़दूम सर

 

 

29-Jan-2020

Leave a Comment