सैय्यद तक़वी

##विद्यां ददाति विनयं विनयाद् याति पात्रताम्।

पात्रत्वात् धनमाप्नोति धनात् धर्मं ततः सुखम्।।

विद्या विनय देती है; विनय से पात्रता प्राप्त होती है, पात्रता से धन प्राप्त होता है, धन से धर्म की प्राप्ति होती है, और धर्म से सुख प्राप्त होता है।##

जे एन यू हो या ए एम यू या फिर जामिया हर जगह छात्रों को निशाना बनाया गया है। स्कूल और विश्वविद्यालय विधा का मंदिर हैं।  लेकिन भारत विरोधी विचारधारा रखने वाले जिनके पूर्वज अंग्रेजों के तलवे चाट के बड़े हुए ऐसे लोगों से विनय की उम्मीद करना बेमानी है। जनता के वोटों से चुनी गई सरकार अगर जनता को सुरक्षा नहीं प्रदान कर सकती तो उसे इस्तीफा दे देना चाहिए। मगर बेहिस और बेशर्म लोगों के ऊपर असर नहीं होता।

जिस तरह से रविवार को जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) कैंपस में कुछ नकाबपोश बदमाश घुस गए और कैंपस में छात्रों और शिक्षकों पर धावा बोल दिया। इस हमले में छात्रसंघ की अध्यक्ष आइशी धोष बुरी तरह से घायल हो गईं। क्या यह लोकतंत्र है? यह तो सरासर लोकतंत्र की हत्या है। पहले जामिया, ए एम यू और अब जे एन यू!

जो बदमाश चेहरा छुपाये हुए बड़ी संख्या में जेएनयू कैंपस में दाखिल हुए, छात्रों पर हमला किया और कुछ ही देर के बाद कैंपस के अंदर तोड़ फोड़ शुरू कर दी। इन हमलावरों के कई वीडियो और फोटोज सामने आए हैं, जहां वो हाथों में हॉकी, डंडे लिए घूम रहे हैं और कैंपस में तोड़ फोड़ करते नजर आ रहे हैं। आखिर यह असामाजिक तत्व आये कहां से, ये कौन थे? इनको सरकार, पुलिस प्रशासन का डर क्यूं नहीं था? पुलिस प्रशासन मौन क्यूं रहा। छात्रों को क्यूं नहीं बचाया गया? योगेन्द्र यादव के पहुंचने पर उनसे मारपीट क्यूं की गई? इन सबका जवाब कौन देगा?  छात्रों ने इस हमले के लिए छात्र संगठन एबीवीपी को जिम्मेदार बताया है  तो वहीं एबीवीपी के छात्रों ने इस हमले के लिए लेफ्ट के छात्रों को जिम्मेदार बताया है। 
अफसोस की बात है कि हमारे देश के संगठन आतंकी संगठन की तरह काम कर रहे हैं। सरकार और प्रशासन क्यूं मूकदर्शक बना है? 

सरकार दावा करती है कि हमारे राज में दंगे नहीं हुए। क्या यह दंगों से कम है कि आज़ाद भारत में छात्रों को मारा पीटा जा रहा है क्योंकि वह सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं। कुछ लोग पूरे देश पर क्यूं हावी हो रहे हैं? माननीय उच्च न्यायालय क्या देख रहा है? राष्ट्रपति महोदय क्या कर रहे हैं? देश जल रहा है। जनता कराह रही है। व्यापार, उधोग बर्बाद हो रहा है। भ्रष्टाचार, गुंडागर्दी बढ़ती जा रही है। कब देश की सर्वोच्च संस्था और सर्वोच्च व्यक्ति बोलेंगे। इतिहास कभी माफ नहीं करेगा यदि देश की एकता अखंडता, संप्रभुता और उन्नति ख़त्म हो गई।
 

(प्रस्तुत लेख लेखक के निजी विचार है )

07-Jan-2020

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