मैगजीन के लेख 

पत्रकारिता जगत में रोज़ एक नयी बातें पत्रकारों के संबंध में सुनाई दे जाती है, अभी हाल ही में छत्तीसगढ़ के एक मंत्री के सेक्स सी.डी. पर बवाल खड़े हुआ है और उस पत्रकार की गिरफ्तारी पर कई तरह के सवाल उठ खड़े हुए है जिससे छत्तीसगढ़ की राजनीति और मीडिया में बवाल मचा हुआ है | 

 ज़ाहिर सी बात है की बिना किसी ठोस तथ्यों के किसी को पुलिस के द्वारा गिरफ्तार किया जाना कितना तर्क संगत है यह तो जाँच और आने वाला समय ही बताएगा लेकिन इस घटना में पत्रकार के साथ राजनीति का भी जुड़ना कथित सी.डी. की विश्वस्नीयता को सन्देह के कटघरे में लाकर खड़े कर देता है ? ऐसा जान पड़ता है यह कानूनी कार्रवाई कम इसमें मीडिया ट्रायल ज्यादा हुआ है !

Image may contain: 2 people, text

वैसे भी कांग्रेस की अपनी साफ सुथरी परम्परा रही है, जिसे अब कुछ लोग कलंकित करने में लगे हुए है | कांग्रेस ने इस तरह से कभी भी किसी के बैडरूम के अन्तरंग मामलो को उजागर करने में हमेशा से परहेज़ करता रहा है, ऐसे में कांग्रेस की छवि पर भी बुरा असर पड़ा है | लेकिन अब छत्तीसगढ़ में नई परंपरा कुछ अतिउत्साहित शीर्ष नेताओ ने अभी हाल के वर्षो से सत्ता पाने की लालसा में शुरू किया है जहाँ इस तरह से टेलीफोन टेप करना, किसी का चोरी छुपे वीडियो बनाने का काम किया जा रहा है ये वही लोग है जिन्होंने कुछ दिनों पहले एक टेलीफोन टेप काण्ड में हल्ला मचाया था, जिसमे मै आपको याद दिलाना चाहूंगा अंतागढ़ चुनाव से सम्बंधित एक टेलीफोन टेप पर खूब हो हल्ला मचा एक अंगेजी अख़बार पर मुकदमा भी किया गया और उसके बाद क्या हुआ ये सभी जानते है, अगर कही यही सी.डी. किसी पत्रकार के अन्तरंग दृश्यों की होती तो क्या होता लेकिन यहाँ मामला राजनीती के साथ पत्रकारिता से भी जुड़ा है, इसलिए ये बात महत्वपूर्ण हो जाती है की क्या पत्रकारिता किसी की निजी और अन्तरंग पहलू को दिखाने और बताने की इज़ाज़त देता है ?  और यदि खुदा ना खस्ता कथित सी.डी. में वो मंत्री और जो महिला ना हो तो उस व्यक्ति और महिला के भविष्य का क्या होगा और उस परिवार पर जो बीत रही होगी उसे भी मानवता के द्रष्टिकोण से देखना होगा समाज में उसके परिवार बच्चों का भविष्य समाप्त ही समझा जाये ये किस तरह की पत्रकारिता है, क्या वर्तमान राजनीति का इतना नैतिक पतन हो गया है और ये किस तरह की पत्रकारिता है क्या ऐसे ही किसी की चरित्र हत्या कर दिया जाये, क्या लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ में यही सब करने की इजाज़त दी गई है ?

अब यहाँ सवाल ये उठता है की हक़ीक़त क्या है !  क्योकि वरिष्ठ पत्रकार विनोद वर्मा कांग्रेस के मुखिया के करीबी रिश्तेदार भी बताये जा रहे है, अगर ये मामला पत्रकारिता से जुड़ा होता तो पहले खबर बनती उसके बाद प्रतिक्रिया आती और ये राजनितिक उद्देश्य से किया गया स्टिंग था तो इसे बाकायदा मीडिया के सामने लाया जाना था जो की तर्क संगत नहीं लगता है, की इस तरह से किसी के भी अश्लील अंतरंग दृश्यों को दिखा कर राजनीति किया जाना कितना उचित है |  हाँ यहाँ ये ज़रूरी हो जाता है की हमारे जन प्रतिनिधियों का चरित्र साफ सुथरा हो लेकिन वीडियो में जिस तरह से क्लिपिंग में दिखाए गए है उससे स्पष्ट होता है की वीडियो के साथ छेड़ छाड़ किया गया है | अब ये तो जांच के बाद ही पता चलने वाला है. लेकिन राजनैतिक दलों और मीडिया के द्वारा इसे मंत्री का बताया जा रहा है |

लेकिन सवाल यहाँ ये उठता है की क्या किसी भी नागरिक के अन्तरंग दृश्य को यू इस तरह से सार्वजानिक रूप से दिखाया जा सकता है | क्या देश का कानून और पत्रकारिता में इसकी इज़ाज़त  है ? यहाँ मै किसी राजनैतिक दल या अपने पत्रकार बिरादरी का पक्ष नहीं ले रहा हु, बस मेरा कहना यही है की ये किस तरह की पत्रकारिता है जो किसी भी व्यक्ति के अन्तरंग दृश्यों को सार्वजानिक करे जिसे कई तरह के लोगो ने और बच्चों ने भी देखा हो सकता है क्योकि वीडियो व्हाट्सएप में सभी मोबाइलों में भेजा गया है | क्या देश का कानून इसकी इज़ाज़त देता है ? क्या कोई भी इस तरह के कृत्य की इज़ाज़त पत्रकारिता या किसी भी अन्य व्यक्ति को करने की इजाज़त देगा? तो फिर समाज में इसके  कितने भयानक परिणाम होंगे इसकी कल्पना नहीं की जा सकती है | 

अश्लीलता चाहे जैसी भी हो है तो वह अपराध ही यदि किसी भी व्यक्ति या जोड़े के द्वारा सहमती से सम्बन्ध बनाये जा रहे है उस पर किसी भी तरह से कोई अपराध नहीं बनता लेकिन किसी के अन्तरंग दृश्यों पर हमारा कानून क्या कहता है |

बनाये गए सेक्स सीडी की नकल करवाने का मामला आईटी एक्ट के तहत आता है. हालांकि आईटी एक्ट के तहत अश्लील वीडियो देखना अपराध नहीं है, लेकिन उसका प्रकाशन करना या इसमें सहायता करना अपराध की श्रेणी में माना जाता है.

सेक्स वीडियो देख कर मिटा देना दंडनीय अपराध नहीं है. सीडी देख कर उसे नष्ट कर देना अपराध नहीं है.
लेकिन सेक्स वीडियो को कंप्यूटर पर सेव करके रखना अपराध है क्योंकि इसे वीडियो प्रकाशित करना माना जाता है. ऐसे में आपको प्रकाशन करने में सहायता करने के संदर्भ में दोषी माना जा सकता है.

सेक्स वीडियो की नकल बनाना धारा 67 के तहत अपराध है. ये ज़मानती अपराध है और इसमें अधिकतम तीन साल की सज़ा और जुर्माने का प्रावधान है.
अगर वीडियो में अश्लील सामग्री है तो ये धारा 67-ए के तहत आ सकता है. इसमें आईटी एक्ट के तहत अधिकतम पांच साल की सज़ा है और ये गैर ज़मानती अपराध है.
अगर सेक्स वीडियो में 18 साल से कम उम्र का किशोर-किशोरी है तो ये चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी का मामला बन जाता है और इसके तहत पांच साल की सज़ा हो सकती है.
सुचना प्रौद्योगिकी अधिनयम 2000 (आई.टी. एक्ट 2000) संशोधन 2009

धारा- 66 क. - संसूचना सेवा इत्यादि के माध्यम से आपराधिक तथ्य भेजने के लिये दंड 
दंड - जो कि तीन वर्ष तक हो सकेगा और जुर्माने से दंडनीय होगा ।
धारा-67 ड. - अश्लील सामग्री का इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रकाशन के लिए दंड 
दंड  - जो तीन वर्ष तक हो सकेगा, या जुर्माने से, जो दो लाख रूपये से अधिक नहीं होगा या दोनों से दण्डित किया जा सकेगा
धारा-67 - अश्लील सामग्री का इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रकाशन के लिए दंड 
दंड  - जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से जो एक लाख रूपये तक का हो सकेगा और दूसरी या पश्चातवर्ती दोषसिद्धि की दशा में दोनों में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि दस वर्ष तक ही हो सकेगी और जुर्माने से भी, जो दो लाख रूपये तक हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा ।
धारा- 72 -गोपनीयता और एकांतता भंग के लिए शास्ति  
दंड  - जिसकी अवधि दो वर्ष तक हो सकेगी, या ऐसे जुर्माने से जो एक लाख रूपये तक का हो सकेगा अथवा दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
धारा- 74 - कपटपूर्ण प्रयोजन के लिये प्रकाशन - 
दंड  - जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक लाख रूपये तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
धारा- 84 ख- अपराध के दुष्प्रेरण के लिये दण्ड -  
दंड  - ऐसे दुष्प्रेरण के दण्ड के लिये नहीं बनाया गया हो, तो इस अधिनियम के अधीन अपराध के लिये उपबंधित दण्ड से दण्डित किया जायेगा ।
धारा- 84 ग- अपराध कारित करने के प्रयास के लिये दंड - 
दंड  - अपराध के लिये उपबंधित किसी प्रकार के दंड की ऐसी अवधि से, जो उस अपराध के लिये उपबंधित कारावास की लम्बी अवधि की आधी तक हो सकेगी, या ऐसे जुर्माने से जिसे अपराध के लिये उपबंधित किया गया हो, के आधे से, या दोनों से दण्डनीय होगा ।
धारा- 85 - कम्पनियों द्वारा अपराध -1.  : जहाँ कोई व्यक्ति जो एक कम्पनी है, इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम या किये गए किसी निदेश या आदेश के किन्ही उपबंधो का उल्लंघन करता है, वहां प्रत्येक ऐसा व्यक्ति, जो उस उल्लंघन के किये जाने के समय उस कंपनी के कारबार के संचालन के लिए उस कंपनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कंपनी भी ऐसे उल्लंघन के दोषी समझे जाएँगे और तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किये जाने और दण्डित किये जाने के भागी होंगे

 

10-Nov-2017

Leave a Comment