एम.एच.जकरीया  

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का खेवनहार कौन ? आने वाले विधानसभा चुनावों में ये यक्ष प्रश्न बनकर खड़ा हुआ है, क्योंकि वर्तमान प्रदेश नेतृत्व जिस तरह से एकला चलो की रणनीति पर चल रही है उससे वरिष्ठ कांग्रेसजन और कार्यकर्ता संतुष्ट नहीं दिख रहे है ! छत्तीसगढ़ में CD काण्ड के बाद प्रदेश नेतृत्व का छिछा लेदर तो हुआ ही है जनता के बीच भी गलत सन्देश गया है, कांग्रेस जैसा महान संगठन और किसी दूसरे के बेडरूम का अन्तरंग CD बनाकर प्रचारित करना ये किस तरह का राजनैतिक सन्देश दिया गया है कांग्रेस के कार्यकर्ताओ को क्या इन सब बातों से शर्मिंदगी महसूस नहीं होती होगी,  कांग्रेस के कार्यकर्ताओ को क्या इन सब बातों से शर्मिंदगी महसूस नहीं होती होगी  ,क्या टेलीफोन टेप कांड और CD काण्ड जैसे मुद्दों से वर्तमान प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व चुनाव लड़ना  चाहती है ? 

विगत 15 वर्षो से कांग्रेस के कार्यकर्ता चुनाव जितने का सपना संजोये हुए है लेकिन जिस तरह से इन हारे हुए नेताओ को बार बार टिकट दिया जाता है ऐसे जान पड़ता है कांग्रेस की राजनीति में कोई और योग्य नेता है ही नहीं ! कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी से कुछ बदलाव की उम्मीद तो है लेकिन प्रदेश प्रभारी जी की ख़ामोशी और प्रदेश नेतृत्व का अड़ियल रवैय्या कार्यकर्ताओ को कही फिर निराश ना कर दे !

यकीनन आज कांग्रेस दोहरे संकट से गुजर रही है, यह संकट अंदरूनी और बाहरी दोनों है लेकिन अंदरूनी संकट ज्यादा गहरा है, संकट इसलिए भी बड़ा है क्योंकि इसके घेरे में प्रदेश कांग्रेस के सभी नेता कही ना कही जिम्मेदार है। झीरम कांड के बाद पार्टी की विपरीत परिस्थितियों से लड़ने की इच्छा शक्ति ही खत्म हो गई लगती है और सब-कुछ व्यक्ति विशेष लोगो के भरोसे छोड़ दिया गया है, बाकी सभी को इन नेताओ से वफ़ादारी दिखाने का ही विकल्प दिया गया है, लेकिन वर्तमान नेतृत्व  खुद अपना भरोसा खोता जा रहा है यहाँ जवाबदेही का घोर अभाव दिख रहा है | 

संगठन में बोलने की किसी को भी आज़ादी नहीं है क्योकि बोलने वाले प्रभावशाली लोगो को दरकिनार कर दिया गया है वर्तमान प्रदेश कांग्रेस में सब कुछ एक तरफ़ा चल रहा है ! आज वास्तविकता में प्रदेश कांग्रेस एक राजनीतिक संगठन के तौर पर काम नहीं कर पा रही है,  सब कुछ किसी चमत्कार के उम्मीद के भरोसे छोड़ दिया गया है। कांग्रेस को पुन: ताकतवर बनाना अकेले नेता के बस की बात नहीं होती इसमे पुरे संगठन को विश्वास में लेना होता है और छत्तीसगढ़ में संगठन में एक जुटता हर किसी के बस की बात नहीं है ।

प्रदेश में लोकतंत्र की मजबूती के लिए राज्य में कांग्रेस की मौजूदा हालत बेहद चिंतनीय है। सशक्त विपक्ष लोकतंत्र की पहली शर्त है, लेकिन वास्तव में क्या ऐसा वर्तमान में हो रहा है ? इन बीते 5 वर्षों में कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ की जनता के लिए ऐसे कितने मुद्दे उठाये ये समझने वाली बात है लेकिन एक कमज़ोर विपक्ष के रूप में ज़रूर जाना जाएगा जिसने नीतिगत मुद्दे को छोड़ धरना - प्रदर्शन और हल्ला बाज़ारी के अलावा कुछ भी नहीं किया इससे जनता को क्या लाभ हुआ ये ज़रूर सोचने वाली बात है ? हाल ही में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी के छत्तीसगढ़ में आने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओ में उम्मीद की किरण जागी थी वो भी अब कही दिखाई नहीं दे रहा है, कांग्रेस को ज़रूर उम्मीद है कि घर वापसी अभियान उनके लिए कुछ कारगर साबित होगा.

लेकिन रूठो को मनाने की फ़ितरत पार्टी प्रमुख में नहीं है क्योकि उनका अहंकार इसकी इजाजत नहीं देता शायद ये उनके शान के खिलाफ है खैर कहा तो यही जा रहा है की कांग्रेस पार्टी ने अपने पुराने नेताओं को वापस कांग्रेस प्रवेश कराने के लिए प्लान तैयार किया है. लेकिन धरातल में यहाँ कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा है ? ऐसे में छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस चुनाव में कैसे उतरेगी ये तो आने वाला समय ही बता सकता है |

 

26-Jun-2018

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