मिला सहारा, जिंदगी चली दुबारा

स्पर्श क्लीनिक से मिली नई जिंदगी

पति के किसी अन्य महिला से रिश्ते को लेकर डिप्रेशन में गई सुचिता (बदला हुआ नाम) को जीवन लीला समाप्त करना ही अंतिम विकल्प लग रहा था । दिन भर रोना, उदास रहना, खाने पीने में मन न  लगना, और चिड़चिड़ापन इतना बढ़ गया की  बात-बात पर आत्महत्या के ख्याल आने लगे ।

इसी बीच सुचिता की सहेली ने उससे जिला अस्पताल, पंडरी में स्थित स्पर्श क्लीनिक जाकर अपनी समस्या बताएँ तो निश्चित रूप से उसकी मानसिक समस्या का निराकरण होगा ।

 शादीशुदा सुचिता (40) को अपने विवाह के 7 साल बाद पता चला  कि  उनके पति का किसी अन्य महिला से संबंध है ।

संबंधों के शक को लेकर बात बढ़ती गई और एक दिन उन्होंने इन सब संबंधों का राज पता चल गया  जिस के बाद धीरे धीरे सुचिता डिप्रेशन में चली गई और अपनी जीवन लीला को समाप्त करने का विचार उसके मन में आने लगा ।

स्पर्श क्लीनिक की साइकोलॉजिस्ट ममता गिरी गोस्वामी कहती हैं ‘’जब सुचिता  उसके  पास आई तो  सबसे पहले  उसका पीएचयू (पेशेंट हेल्थ क्वेश्चनायर ) भरवाया गया जो आत्महत्या की ओर बढ़ रहे लोगों के लिए एक टूल होता है । ``जब हमने उनसे चर्चा कर नतीजा निकाला तो वह मॉडरेट लेवल का डिप्रेशन में थी ।  इस प्रश्नावली  में रोजमर्रा  से जुड़े सवाल होते हैं  जिसमें  अंक दिये जाते  है ।‘’ 

 विश्लेषण में पाया गया सुचिता आत्मग्लानि और असफल महसूस कर रही थी । किसी भी काम में उनका मन  नहीं था।  बातचीत के दौरान उनमें एकाग्रता  की कमी भी थी । ``इस बातचीत के दौरान हमने पाया की वह अपने बच्चों से बहुत प्यार करती थी  और तब  हमें वह चाबी  मिल गई जिससे हम उन्हें आत्महत्या की  सोच  से बाहर निकाल पाए,’’ ममता गिरी ने बताया ।

 ``हमने उनकी 15 -15  दिन के अंतराल से चार बार काउंसलिंग की गई और साथ में उनके पति को  भी एक बार काउंसलिंग  के लिए बुलाया गया । पति को  यह  समझाया गया कि अगर वह  पत्नी का सहयोग नहीं करते हैं और इस बीच  पत्नी ने कोई कदम उठा लिया तो  उसकी सरकारी नौकरी भी जा सकती है साथ ही   न्यायिक परेशानियों से भी परेशान हो सकते हैं,’’ ममता गिरी ने बताया  ।

सुचिता कहती है समय रहते उनको  सहेली से सहारा मिला जिसने  उससे  जिला अस्पताल पंडरी में स्थित स्पर्श क्लीनिक के बारे में बताया  जहां उससे  सहारा मिल और जिंदगी  दुबारा चल पड़ी ।

10-Sep-2021

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