रायपुर कोरोना संकटकाल में भी बच्चों व गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखा जा रहा है। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग और आईसीडीएस की ओर से कई कार्यक्रम चलाये जा रहें है। इसी क्रम में नियमित टीकाकरण सत्र का आयोजन बीरगॉव के आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 24 पर किया गया। साथ ही इस दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों पर आई हुई गर्भवती तथा धात्री महिलाओं को स्तनपान की आवश्यकता के महत्व के बारे में भी जानकारी दी गई। इसके अतिरिक्त कोविड-19 के विषय में जागरूक करते हुए उन्हें शारीरिक दूरी ,मास्क और  हाथ की धुलाई के बारे में बताया गया। नियमित टीकाकरण सत्र में कोविड-19 गाइडलाइन का भी पालन किया गया। केंद्र पर हो रहे टीकाकरण की मॉनिटरिंग सीपीएम सुश्री ज्योत्सना ग्वाल द्वारा भी की गई ।

मीडिया प्रभारी गजेंद्र डोंगरे ने नियमित टीकाकरण सत्र की जानकारी देते हुए बताया,“ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस पर बीरगांव के शिवाजी नगर वार्ड 31 में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र 24 पर नियमित टीकाकरण सत्र का आयोजन किया गया । जिसमें प्रसव पूर्व जांच के अंतर्गत 2 महिलाओं को टीडी(Tetanus and adult diphtheria)का टीका लगाया गया । साथ ही 5 महिलाओं का चेकअप और फॉलोअप किया गया वहीं केंद्र पर 10 बच्चों को ड्यू डोज के अनुसार टीके लगाए गए । बहुत दिनों बाद केंद्र को खुला देख कर बच्चे खुशी खुशी टीकाकरण कराने आए।”

बीरगांव सब सेंटर की एएनएम शशि कला ठाकरे ने बताया ‘’नियमित टीकाकरण के साथ-साथ आंगनबाड़ी केंद्र पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने गर्भवती महिलाओं को कोरोना संक्रमण से बचाव और टीकाकरण की जरूरत तथा महत्व के बारे में जागरूक किया। जिसमें एएनएम और मितानिन ने भी सहयोग किया।आंगनबाड़ी केंद्र पर आये लाभार्थी और उसके अभिभावकों को बताया गया किअगर किसी को बुखार, सर्दी-खांसी के लक्षण आते है या हो तो वह तुरंत नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र पर अपनी जॉच करा कर नियमित इलाज करवायें । इसके साथ ही व्यक्तिगत दूरी, मुंह को ढककर रखने और कम से कम  40 सेकेंड तक साबुन से हाथ धोने की जानकारी भी दी गई है।

क्यों ज़रूरी है छह माह तक नियमित स्तनपान:

बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास अवरुद्ध ना हो इसलिए 0 से 6 माह के बच्चे को सिर्फ स्तनपान और 6 माह के बाद शिशुओं को स्तनपान के साथ ऊपरी पौष्टिक आहार भी देना चाहिए। 6 माह तक शिशु को केवल स्तनपान कराने से दस्त और निमोनिया के खतरे से बचाया जा सकता है।

क्या है टीकाकरण:

टीका एक जीवन रक्षक कवच है जो बच्चे में कवच बनकर उसके जीवन की सुरक्षा करता है। टीका बच्चे के शरीर को संक्रामक रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है ताकि नवजात शिशु को कोई भी संक्रामक रोग छू न सकें। बच्चों को टीका लगवाना संक्रामक रोगों की रोकथाम में सबसे सस्ती और सबसे प्रभावी विधि है।

प्राथमिक टीकाकरण

नवजात शिशु संक्रामक रोगों से बचे रहें और उसके शरीर में रोगों से लड़ने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत हो इसके लिए नवजात शिशु के जन्म के समय से ही प्राथमिक टीकाकरण किया जाता है। समय समय पर दिए जाने वाले टीके बच्चे को कई जान लेवा बीमारियों से बचाते है इसलिए समय पर बच्चों को टीकाकरण अवश्य लगवाएं।

बूस्टर टीकाकरण

बूस्टर खुराकें प्राथमिक टीकाकरण के प्रभाव को बढ़ाने के लिए दी जाती हैं। ताकि जिन शिशुओं में पहले टीके के बाद प्रतिरक्षण क्षमता विकसित नही हुई हो, उन्हें बूस्टर खुराक देकर रोगों से लड़ने की क्षमता विकसित की जाए ताकि शिशु हमेशा रोगों से बचा रहें।

सार्वजनिक टीकाकरण

जब किसी जगह किसी विशेष बीमारी का भयावह रूप बच्चों पर दिखने लगता है तो उस बीमारी से सभी बच्चों की रक्षा के लिए और उस बीमारी को जड़ से अंत करने के लिए सार्वजनिक टीकाकरण कार्यक्रम चलाया जाता है। जैसे पल्स पोलियों अभियान सरकार के द्वारा पोलियो को जड़ से अंत करने के लिए चलाया गया और जनता के सहयोग से यह अभियान सफल रहा जिससे आज भारत पोलियो मुक्त बन चुका है।

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09-Jun-2021

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