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रायपुर : मानवता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है. गरीब व असहायों की मदद के लिए संपन्न समाज को सदैव आगे आना चाहिए. अगर समाज में जागरूकता रहे तो गरीबों जरूरत मंद असहाय लोगों की मदद सरलता से की जा सकती हैं। आज हमारे सामाजिक जीवन में बहुत से विषय है जिस पर लोगों की ध्यान केंद्रित नहीं हो पाती जिसको लेकर चिंतन की आवश्यकता हैं । हम सभी के लिए जवाबदेहीं बनतीं हैं हर इंसान के लिए जीवन बहुत ही अमूल्य धरोहर है इसें एक मजबूत धागों मे मजबूती के साथ मोतियों मे पिरोये रखने जरूरत है यदि पिरोये हुए धागे एकता मजबूत बनाने में सफल होतें हैं तो मोतियों की चमक भी वक्त के मुताबिक धरोहर के रूप रखें जा सकते हैं। कभी कभी मनुष्य के जीवन के संकट के बादल घिर जाए तो सारा जमाना भी काली घटा नजर आती हैं.

कहते हैं ना की डूबते हुए लोगों को एक तिनके का सहारा बहुत बड़ी उम्मीदें बांध दिया करती हैं। जिसके अंदर इंसानियत का जज्बा हो और कुछ कर गुजरने के लिए व्यक्ति विशेष पर विश्वास आज उसी विश्वास को जानने के लिए हम समाज सेवकों के करीब गया जिसमें गरीबों एवं जरूरत मंदो के सेवा से ही उनके जीवन के जरिए ही लोगों के उद्धार देखने को मिला वो हैं इंसानियत और जरूरतमंद बेसहारा असहाय लोगों का सहारा जिनका नाम मोहम्मद सज्जाद खांन जी समाज के हितों को ध्यान मे रखते हुए समाज के ही कुछ शिक्षित एवं जागरूक लोगों द्वारा सामाजिक संस्था गठित की जाती हैं ।

ठीक उसी प्रकार समाज मे हो रहे अत्याचार,अपराध,अन्याय का विरोध करने बेसहारा लोगों को सहारा देने आज से 20 वर्षों पूर्व मोहम्मद सज्जाद खांन जी नें निस्वार्थ रूप से समाज एवं देश हित के लिए मानव समाज के सेवा करने के उद्देश्य से संस्था “अवाम-ए- हिन्द सोशल वेलफेयर कमेटी” का गठन किया। इस संस्था के द्वारा विगत 20 वर्षों से समाज में गरीबो बेसहारो की मदद, शिक्षा के क्षेत्र मे गरीब बच्चों को निरंतर सहायता प्रदान की जा रही हैं। मो. सज्जाद खान जी ने समाज की पीड़ा को अपनी पीड़ा समझा

सज्जाद खान जी के लिए सबसे बड़ी धर्म इंसानियत ही धर्म हैं जिसनें मानव सेवा निस्वार्थ भाव से की वो आत्म शांति को प्राप्त कर लिया वहीं एक चीज हैं जो मनुष्य  को ऊंचा उठा सकती है बुंलदियों पर उठा कर महान बना सकती हैं शांति दे सकती हैं। और समाज के लिए उपयोगी बना पाने में मदद कर सकती हैं विचार करने का क्रम आदमी का किसका कैसा है।? बस असल में वहीं उसका स्वरूप हैं। ऐसी सेवा भाव के स्वरूप हैं। सज्जाद खांन जी का कहना है की आज मानव विज्ञान टेक्नोलॉजी के उत्कर्ष के कारण समस्त सुविधाओं और संसाधनों से परिपूर्ण जीवन जी रहा है। ऐसे समय मे भी मानवता को अत्याचार हिंसा आक्रोश से छुटकारा नहीं मिल रहा हैं । सभी प्रकार के सुख सुविधाओं और विपुल उपग्रह पर लोग भौतिक सुख का लाभ उठा पा रहे हैं दूसरी ओर करोड़ों लोग आध्यात्मिक कुपोषण से ग्रस्त है और यही कारण है की सारा समाज बारूद के ढ़ेर पर बैठा हैं ।

इन सब की चिंता दुनिया के तमाम चिंतको  को हैं लेकिन विगत कई वर्षो रामनगर गुढ़ियारी रायपुर छत्तीसगढ़ मे सालो से निवास करने वाले सज्जाद भाई ने इस इलाके की असामाजिक तत्वों शराबखोरी से उजड़ते हुए घरों मे समाजसेवा करके एक मिसाल कायम की है। सज्जाद जी ने बताया बचपन से ही वे अन्याय अपराध का विरोध करने में अस्मर्थ रहे क्योंकि वे एक कम उम्र की वजहों से और धनवान रसूखदारो उनकी बातें अनसुनी कर दिया जाता रहा। इसी बातों को लेकर बहुत ही चिंतित रहते थे लोगों पर हो रहे अत्याचार अपराध असहाय बेबस लोगों को तकलीफ मे देख उन्हें बहुत दुख होता था।  सज्जाद जी बचपन से ही लोगों की समस्या को महसूस किया खुद की चिंता किये बगैर समाज के कल्याण एवं जनमानस की समस्याओं का निराकरण के चिंतन व्यक्त करने लगे

युवा अवस्था में पहुँचकर सज्जाद जी ने समाज मे पीड़ित लोगों को साथ देना शुरू किया महिलाओं पर हो रहे अत्याचार पर उनकों उनका हक दिलाने अपनी संभव सहायता प्रदान की, सज्जाद जी ने सामाजिक संस्था को मजबूती मिलते देख सन 1997 को अवाम-ए-हिन्द नाम से संस्था गठित किया जो हिन्द की जनता के नाम से जाना जा रहा। वर्तमान में संस्था के संस्थपाक मों सज्जाद खांन जी हैं। जो संस्था सोसायटी अधिनियम सोसायटी परामर्श छत्तीसगढ़ शासन से मान्यता प्राप्त है। आज उनके द्वारा निरंतर प्रयास से संस्था “अवाम-ए-हिन्द सोशल वेलफेयर कमेटी” विगत सन 1997 से जरूरत मंद गरीब बेसहारा लोगों के जमीनी स्तर पर। हर समाज हर वर्ग के लिए जनहित एवं सामाजिक कार्य करते हुए आ रही हैं। वर्ष 2005 से निरंतर सेवा की इस कड़ी में अवाम ए हिन्द सोशल वेलफेयर कमेटी द्वारा गरीब महिलाओं एवं बच्चियों के लिए निःशुल्क प्रशिक्षण, सिलाई, कड़ाई, बुनाई, मेहंदी, पेंटिंग की परीक्षा आयोजित की गई प्रशिक्षण केंद्र में गरीब परिवार के महिलाओं एवं बच्चियों को आत्मनिर्भर बनाया गया। संस्था द्वारा निरंतर प्रयास से जब इस बात की जानकारी शहर मे पहुंची तब 31 जनवरी 2006 मे प्रदेश में शहीद हुए पुलिस अधीक्षक स्वर्गीय बीके चौबे की धर्मपत्नी के माध्यम से पुलिस लाईन मे शहीद हुए पुलिस जवानों के बच्चियों एवं महिलाओं को जा कर संस्था ने निःशुल्क प्रशिक्षण दिये गए। तत्पश्चात संस्था के क्रियाकलापों से अवगत होकर संस्था के बेहतर कार्यों को देखकर राज्य की प्रथम महिला वीणा सेठ ने मुतासिर होकर संस्था से जुड़ने की कोशिश की इस बीच कई प्रकार की अफवाह फैलाकर उन्हें गरीब मोहल्ले में आने के लिए रोका गया क्योंकि उस वक्त क्षेत्र में संक्रमण बीमारियों का बोलबाला था।

31-Mar-2018

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