वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर दी गई पोषण माह में प्रस्तावित कार्यक्रमों की जानकारी

रायपुर/छत्तीसगढ़ 

प्रत्येक वर्ष 1 सितम्बर से 30 सितम्बर के बीच राष्ट्रीय पोषण माह मनाया जाता है जिसका उद्देश्य जनसामान्य को पोषण के महत्व से परिचित करवाना एवं उनमें खानपान से सम्बंधित स्वास्थ्य व्यवहार को विकसित करना है। इस बार पोषण माह कोविड 19 अनुरूप व्यवहारों का पालन करते हुए डिजिटली जनआन्दोलन के रूप में मनाया जाएगा ।

इस बार पोषण माह में इन गतिविधियों पर रहेगा फोकस

1.     गंभीर कुपोषित बच्चों की पहचान, उनका सन्दर्भन एवं प्रबंधन

2.     डिजिटल पोषण पंचायत      

3.     गृह भ्रमण एवं ग्राम स्वास्थ्य पोषण दिवस के माध्यम से समुदाय का संवेदीकरण

4.     एनेमिया, डायरिया एवं फिट इंडिया जैसे कार्यक्रमों का एकीकरण 

5.     पोषण पर आधारित डिजिटली प्रतियोगिताओं का आयोजन

6.     दूरदर्शन और आल इंडिया रेडियो पर पोषण संबंधी कार्यक्रमों का प्रसारण

बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों को मिलेगा पुरस्कार और प्रोत्साहन
महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी अशोक कुमार ने बताया, इस वर्ष पोषण माह में ऐसे जिलों को सरकार द्वारा पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया जाएगा जहाँ पर बच्चों में  गंभीर कुपोषण का एक भी मामला ना हो । साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि इस बार ऐसे ए.ए.ए.(आंगनबाड़ी, आशा, ए.एन.एम.) को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा जिन्होंने अपने लक्ष्यों के अनुसार कार्य किया होगा । इसके लिए अलग से दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे ।    

 

उन्होंने जानकारी दी कि कोरोना के दौरान भी महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से बच्चों एवं महिलाओं के पोषण का पूरा खयाल रखने की कोशिश की जा रही है जिसके अंतर्गत आंगनवाड़ी केन्द्रों में पंजीकृत 3 से 6 वर्ष आयु के सामान्य व गंभीर कुपोषित बच्चों को गर्म पके हुए भोजन के स्थान पर आंगनबाड़ी द्वारा घर भ्रमण कर राशन का वितरण किया जा रहा है, ताकि कोरोना संक्रमण की संभावना ना रहे साथ ही गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण के साथ कोई समझौता भी न हो ।

 

बच्चे के जीवन में पोषण की शुरुआत तभी से हो जाती है जब वह गर्भ में होता है, इस सन्दर्भ में यदि छत्तीसगढ़ के एन.एफ.एच.एस- 4 के आंकड़ो को देखें तो यह पता चलता है कि 15 से 49 आयु वर्ग की 47% महिलायें एनेमिक (खून की कमी) हैं यानि कि लगभग आधी महिलाओं में खून की कमी है एवं सही खान-पान के आभाव में प्रदेश के लगभग 38% बच्चे कम वजन के रह जाते हैं| ऐसे में जो बच्चा पैदा होगा उसके कुपोषित होने की सम्भावना ज्यादा होती है|

उपरोक्त परिस्थितियों में सुधार के लिए सरकार द्वारा हर वर्ष पोषण माह मनाया जाता है | इसके साथ ही अन्य पोषण संबंधी कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं जिनका उद्देश्य मुख्य रूप से माँ एवं बच्चों की सेहत में सुधार लाना है | इन कार्यक्रमों में “समेकित बाल विकास कार्यक्रम”(ICDS), महतारी जतन योजना, मिड-डे-मील, पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC), मुख्यमंत्री सुपोषण योजना, प्रधान मंत्री मातृ वंदन योजना, प्रधान मंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान इत्यादि प्रमुख हैं|

02-Sep-2020

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