रायपुर : मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि राष्ट्रीय कैडेट कोर (एन.सी.सी.) के कैडेट के रुप में विद्याथियों में देश प्रेम, अनुशासन, साहस, सामूहिकता, एकता और समाज के प्रति जवाबदेही जैसे सर्वश्रेष्ठ गुणों का विकास होता है, जो जीवन भर साथ रहते हैं। व्यक्तित्व विकास के साथ विद्यार्थी एक जिम्मेदार नागरिक बनते हैं।

    मुख्यमंत्री आज राजधानी रायपुर के सेजबहार स्थित शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में आयोजित राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के रायपुर समूह के 126 कैडेटों के सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश एनसीसी निदेशालय की ओर से इन 126 कैडेटों ने 26 जनवरी को नई दिल्ली में आयोजित गणतंत्र दिवस के राष्ट्रीय समारोह की परेड में शानदार प्रदर्शन किया था। इन कैडेटों के सम्मान के लिए इस समारोह का आयोजन किया गया। कैडेटों के इस समूह में रायपुर ग्रुप के 38 कैडेट शामिल थे। रायपुर ग्रुप के कैडेटों ने गणतंत्र दिवस की राष्ट्रीय परेड में शानदार प्रदर्शन करके प्रतिष्ठित ‘मुख्यमंत्री चैम्पियनशिप बैनर’ जीता। मुख्यमंत्री ने रायपुर ग्रुप को मुख्यमंत्री चैम्पियनशिप बैनर और ट्राफी प्रदान की। उन्होंने कैडेटों के इंदौर, जबलपुर सहित अन्य ग्रुप के कैडेटो को अलग-अलग वर्गों में शानदार प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने बेस्ट एन.सी.सी. अधिकारी, बेस्ट एन.सी.सी. कैडेटो को अवार्ड, मेडल और स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि वे भी स्कूल के समय एन.सी.सी. कैडेट थे। एन.सी.सी. कैडेट के रूप में उन्होंने अनुशासन, नेतृत्व और साहस जैसे गुण सीखे। कैडेट बनने के बाद उनके व्यक्तित्व में निखार आया। मुख्यमंत्री ने कहा कि एन.सी.सी. कैडेट के रूप में सीखे गए गुण जीवन भर काम आते हैं। कैडेटो को अपने इन गुणों को और अधिक विकसित करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रसन्नता का विषय है कि इस वर्ष  एनसीसी निदेशालय मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ के 126 सर्वश्रेष्ठ कैडेटों के दल को विगत माह नवम्बर -दिसम्बर 2017 में रायपुर ग्रुप द्वारा प्रशिक्षण दिया गया और गणतंत्र दिवस के राष्ट्रीय समारोह के लिए तैयार किया गया। इन सभी कैडेटों ने नई दिल्ली के गणतंत्र दिवस समारोह में कई कार्यक्रमों और प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और कई पदक जीते।  

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनांदगांव और कोरबा में एन.सी.सी. की दो बटालियन स्थापित की जा रही है और रायपुर जिले के आरंग विकासखंड के लखोली गांव में एन.सी.सी. विशेष प्रशिक्षण अकादमी खोली जा रही है। देश में ऐसी मात्र चार प्रशिक्षण अकादमी हैं। उन्होंने सम्मानित होने वाले सभी कैडेटों को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उन्होंने गणतंत्र दिवस की राष्ट्रीय परेड में अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से छत्तीसगढ़ और मध्यप्र्रदेश को गौरवान्वित किया।

एन.सी.सी. के मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ निदेशालय के एडिशनल डायरेक्टर जनरल मेजर जनरल श्री मुकेश के दत्ता और एन.सी.सी. छत्तीसगढ़ के ग्रुप कमांडर ब्रिगेडियर डी.बी पाणि ने भी समारोह को सम्बोधित किया। संचालक लोक शिक्षण श्री एस. प्रकाश सहित स्थानीय एन.सी.सी. यूनिट के कमान अधिकारी, विश्वविद्यालय के कुलपति,कॉलेज और स्कूलों के प्राचार्य, एन.सी.सी. कैडेट और उनके अभिभावक, अनेक वरिष्ठ अधिकारी और प्रबुद्ध नागरिक इस अवसर पर बड़ी संख्या में उपस्थित थे। एन.सी.सी. कैडेटो ने इस अवसर पर गणतंत्र दिवस के अवसर पर नई में प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों की झलक दिखायी।

मुख्यमंत्री ने हर्बल कंपनियों को दिया राज्य में पूंजी निवेश का न्यौता

 छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने वनौषधियों के उत्पादन के लिए देश की बड़ी नामी-गिरामी हर्बल कम्पनियों को राज्य में पूंजी निवेश और उद्योग लगाने का न्यौता दिया है। डॉ. सिंह ने आज यहां वनौषधियों पर केन्द्रित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी - वनौषधि छत्तीसगढ़  2018’‘का शुभारंभ करने के बाद समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने इस अवसर पर आयोजक संस्था छत्तीसगढ़ राज्य औषधीय पादप बोर्ड द्वारा प्रकाशित स्मारिका का विमोचन भी किया।

    मुख्यमंत्री ने संगोष्ठी में आए वनौषधि निर्माता कंपनियों को छत्तीसगढ़ में वनौषधियों की खेेती, उनके उत्पादन और बाजार व्यवस्था की संभावनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की बहुमूल्य वन सम्पदा में वनौषधियों के पेड़-पौधे का भी बड़ा योगदान है। राज्य में हर्बल खेती का भी तेजी से विकास हो रहा है। यह हमारे वनवासी परिवारों की अतिरिक्त आमदनी का एक बड़ा जरिया है। वनौषधि आधारित उद्योग लगने पर इनके संग्रहण में लगे वनवासी भाई-बहनों को रोजगार के लिए अच्छा बाजार मिलेगा।

डॉ. रमन सिंह ने निवेशकों से कहा -  अगर आप चाहें तो अपनी पांच वर्ष की कार्य योजना बनाकर सम्मेलन के दूसरे दिन यानी कल ही इसके लिए यहां पर राज्य सरकार के साथ एम.ओ.यू. कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने उनसे आग्रह किया कि वे इसके लिए छत्तीसगढ़ राज्य वनौषधि बोर्ड और राज्य औद्योगिक विकास निगम के पदाधिकारियों के साथ चर्चा करें। राष्ट्रीय संगोष्ठी के शुभारंभ समारोह की अध्यक्षता केन्द्रीय इस्पात राज्य मंत्री श्री विष्णु साय ने की। छत्तीसगढ़ राज्य औषधीय पादप बोर्ड द्वारा आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में लगभग 400 परम्परागत वैद्यों सहित कई बड़ी कम्पनियों के पदाधिकारी हिस्सा ले रहे हैं। इसका आयोजन यहां शासकीय विज्ञान महाविद्यालय परिसर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय आडिटोरियम में किया गया है।

मुख्य अतिथि की आसंदी से शुभारंभ समारोह में डॉ. रमन सिंह ने कहा पूरी  परम्परागत खेती के साथ-साथ पशुपालन, डेयरी, उद्यानिकी और वानिकी से संबंधित कार्य भी कृषि क्षेत्र से सम्बद्ध  हैं। दुनिया में और विशेष रूप से भारत के छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में वनोपजों का उत्पादन और संग्रहण वनवासियों के आर्थिक स्वावलंबन का एक बड़ा महत्वपूर्ण जरिया है।     डॉ. सिंह ने कहा - पूरी दुनिया में हर्बल दवाइयों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। निकट भविष्य में यह सबसे बड़ा बाजार होगा। आज की स्थिति में हर साल इसमें 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है। दुनिया के हर्बल बाजार का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा चीन के हाथों में है। ऐसे में भारत को भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ने की जरूरत है। इसमें भारत के छत्तीसगढ़ जैसे नये राज्य की भी एक बड़ी भागीदारी होगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में वनौषधियों की खेती, हर्बल दवाइयों के उत्पादन और उन्हें बाजार तक पहुंचाने की काफी अच्छी संभावनाएं है।

हमारे यहां काफी बड़ा वन क्षेत्र है। बस्तर जैसे इलाके में हजारों-लाखों एकड़ में वन हल्दी, वन तुलसी आदि प्रजातियों के पौधे मिल सकते हैं। इसके लिए व्यापक सर्वेक्षण की भी जरूरत है।  धमतरी में हर्रा, बहेड़ा, आंवला आदि वनोपजों और जड़ी-बूटियों  का एक बड़ा राष्ट्रीय बाजार विकसित हो गया है। प्रदेश का मौसम भी काफी अनुकूल है। इन तमाम अनुकूलताओं को देखते हुए राज्य में निवेशकों को वनौषधि प्रसंस्करण उद्योग लगाने के लिए सरकार हर जरूरी मदद करने को तैयार है। मुख्यमंत्री ने कहा - राज्य सरकार ने सभी जिलों में स्थानीय स्तर पर मिलने वाले वनौषधीय महत्व के पेड़-पौधों को चिन्हांकित किया है। नर्सरी भी विकसित की जा रही है।

 डॉ. सिंह ने कहा - नया रायपुर स्थित जंगल सफारी के नजदीक प्रदेश सरकार ने 500 एकड़ में हर्बल गार्डन विकसित किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य औषधीय पादप बोर्ड द्वारा पूरे प्रदेश में वनौषधियों के संरक्षण, संवर्धन और उनकी खेती को बढ़ावा देने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य औद्योगिक विकास निगम द्वारा वनौषधि निर्माताओं को प्रदेश की उद्योग नीति के तहत सभी जरूरी सुविधाएं दी जाएंगी। टैक्स में कुछ रियायत देने के बारे में भी विचार किया जा सकता है। संगोष्ठी में राष्ट्रीय स्तर के वनौषधि निर्माता और विषय विशेषज्ञ मौजूद हैं, जिनके विचार हम सबके लिए काफी उपयोगी है।

डॉ. सिंह ने कहा कि देश और दुनिया में लगभग 76 प्रकार के औषधीय महत्व के पेड़-पौधों की प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर हैं। उन्हें संरक्षित करने के लिए भी प्रयास जरूरी है। टिश्यू कल्चर के जरिये ऐसा किया जा सकता है। इसके लिए हमने छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में लैब की भी स्थापना की है। मुख्यमंत्री ने कहा - वन क्षेत्र के लोगों और वन समितियों को साथ लेकर वनौषधियों की खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार पूरी गंभीरता से प्रयास कर रही है। इसके लिए फंड की कोई कमी नहीं है। कैम्पा निधि, जिला खनिज विकास निधि (डी.एम.एफ.) आदि मदों से हम उन्हें फंडिंग कर सकते हैं।

शुभारंभ समारोह  की अध्यक्षता करते हुए केन्द्रीय इस्पात राज्य मंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि लगभग 44 प्रतिशत वन क्षेत्र वाले छत्तीसगढ़ में वनौषधियों के पेड़-पौधों की भरमार है। इनका समुचित और संतुलित दोहन किया जा रहा है। एक बहुत बड़ी ग्रामीण आबादी का पालन -पोषण इन्हीं वनौषधियों के संग्रहण कार्य से होता है। सम्पूर्ण आयुर्वेद वनौषधियों पर ही आधारित है। इसके महत्व को देखते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने केन्द्र में अलग से आयुष मंत्रालय की भी स्थापना की है। केन्द्रीय राज्य मंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ में वनौषधियों की खेती को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

संगोष्ठी के शुभारंभ समारोह में छत्तीसगढ़ राज्य औषधीय पादप बोर्ड के अध्यक्ष श्री रामप्रताप सिंह, उपाध्यक्ष श्री जे.पी. शर्मा,  वन विकास निगम के अध्यक्ष श्री श्रीनिवास राव मद्दी, छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम (सी.एस.आई.डी.सी.) के अध्यक्ष श्री छगन लाल मुंदड़ा, राज्य कृषि एवं बीज निगम के अध्यक्ष श्री श्याम बैस, राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक) के अध्यक्ष श्री अशोक बजाज, माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष श्री चन्द्रशेखर पांडे़, छत्तीसगढ़ दुग्ध सहकारी महासंघ के अध्यक्ष श्री रसिक परमार, राज्य अन्त्यावसायी सहकारी विकास निगम के अध्यक्ष श्री निर्मल सिन्हा, मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष मिर्जा एजाज बेग, प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव श्री अजय सिंह, वन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री सी.के. खेतान, छत्तीसगढ़ राज्य औषधीय पादप बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री शिरीष चन्द्र अग्रवाल और अन्य संबंधित संस्थाओं के पदाधिकारी, कॉलेजों के विद्यार्थी तथा अनेक वरिष्ठजन उपस्थित थे। राज्य औषधीय पादप बोर्ड के अध्यक्ष श्री रामप्रताप सिंह ने स्वागत भाषण दिया। वन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री सी.के. खेतान ने भी शुभारंभ समारोह को सम्बोधित किया।

03-Feb-2018

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