TNIS - क़ादिर रज़वी
   
जशपुर : जशपुर जिले का कभी संसद आदर्श ग्राम बटाइकेला रह चुका ये गाँव आज तक विकास के नाम पर बिल्कुल जीरो ही है। जशपुर जिले का सबसे बड़ा गाँव भी है ।काफी मसक्कत के बाद एक अस्पताल खुला भी तो 3 साल से डॉक्टर और स्टाफ की कमी का शिकार बना हुवा है इस हॉस्पीटल मे अब मरीजो की संख्या प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। औऱ बीमारो को सिर्फ सर्दी खासी के अलावा कुछ भी इलाज या दवाई की उम्मीद करना नामुमकिन है।

          आज तक कोई mbbs डॉक्टर की नियुक्ति तक नही की गई है न स्टाफ को बढ़ाया गया है यहाँ लेब टेक्नीशियन, ड्रेसर, स्टाफ नर्स,स्वीपर, भृत्य, वॉर्ड बॉय, वॉर्ड आया, चौकीदार सरकारी क्वाटर की सबसे ज्यादा जरूरत है। जो स्टाफ है उनसे हास्पिटल को संभालना मरीजो की बढ़ती संख्या को देखते हुवे मुश्किल है।

इस ग्राम के लोगो की हास्पिटल खुलने से बहुत सारी उम्मीदे थी जो आज टूटता नज़र आ रहा है और आम जनता और मरीजो में रोष बढ़ता जा रहा है।
     यहाँ सिर्फ हॉस्पीटल सुबह 9 बजे से 4बजे शाम तक खुली रहती है इसके बाद हॉस्पीटल में ताला लगा दिया जाता है। जो स्टाफ है वो ग्राम बटाइकेला अपना हेड क्वाटर तक नही लिए है कांसाबेल 10 से 12 किलोमीटर से आना जाना करते है यहाँ स्टापो के लिए क्वाटर की आवस्यकता है।

       आपातकालीन सेवा में मरीज जाए तो जाए कहाँ हॉस्पीटल खुलने के बाद भी लोग अपना इलाज कराने के लिए 40 किलोमीटर कुनकुरी जाना पड़ता है।
आपातकाल में रात्रि कालीन डिलेवरी या एमरजेंसी के लिए 10 किलोमीटर से 40 किलोमीटर सफर कर हॉस्पीटल पहुचना पड़ रहा है।
अधिकारी डॉक्टर टोप्पो (बी. एम. ओ.)से इस संबंद्ध में कई बार बात किया जा चुका है। पर अभी तक समस्या का समाधान नही किया गया है न ही जनसमस्या को अधिकारी द्वारा  ध्यान दिया जा रहा है।

✒क़ादिर रज़वी जशपुर बीयूरो- The news india, (खुलासा पोस्ट), (गरजा छत्तीसगढ़)

31-Aug-2019

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