प्रतापपुर से राजेश गुप्ता 

प्रतापपुर पेय जल एवं स्वच्छता विभाग दिल्ली ने टीम तो भेजी स्वच्छ भारत मिशन के तहत बने शैचालयों और स्वच्छता के निरीक्षण के लिए लेकिन अच्छी रिपोर्टिंग के नाम पर पंचायतों से वसूली कर चलते बने,मामला प्रतापपुर विकासखण्ड का है जहां चयनित पंचायतों में टीम को भेजा गया था जिसमें दिल्ली से आये अधिकारी के साथ सूरजपुर जिले में एसबीएम की जिला सलाहकार का नाम भी सामने आ रहा है।

गौरतलब है कि खुले में शौच मुक्त घोषित होने के बाद केंद्र सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा पंचायतों में निरीक्षण के लिए टीम भेजी जा रही है जिसके तहत एक अधिकारी की टीम प्रतापपुर ब्लॉक में भी आई थी जिसमें व्ही के प्रसाद एएलएम से थे और उनके साथ जिला सलाहकार एसबीएम पूनम तिवारी,जिले के अन्य को-ऑर्डिनेटर और स्थानीय अधिकारी भी थे।

इस दौरान इन्होंने प्रतापपुर ब्लॉक के पम्पापुर,मायापुर 1,सेमरा खुर्द के साथ अन्य पंचायतों का दौरा किया,जो पूरी तरह औपचारिकता थी। मूल उद्देश्य से हटकर वे सिर्फ खाना पूर्ति करते नजर आए,उन्होंने उन जगहों को ही देखा जो जिले के अधिकारियों ने उन्हें बताया,आये तो वे केंद्र से स्वच्छ भारत मिशन की हकीकत जानने थे लेकिन वे केंद्र की बजाय जिले के प्रतिनिधि दिखे जिन्होंने पहले ही स्वच्छता अभियान की धज्जियां उड़ा दी हैं और फर्जी ओडीएफ का पुरस्कार ले लिया है।

इस दौरान उन्हें स्कूल,आँगनाबाड़ी,सार्वजनिक शौचालय,निजी शौचालयों के साथ पंचायतों में स्वच्छता की स्थिति देख केन्द्र को रिपोर्ट सौंपनी थी लेकिन केंद्र से आये अधिकारी  केंद्र के प्रति अपनी जवाबदारी को किनारे कर सूरजपुर जिले के अधिकारियों के प्रति अपनी जवाबदारी पूरी करते नजर आए। व्हीके प्रसाद के पीछे अधिकारियों का काफिला लगा रहा तो उन्होंने अपनी जमकर खातिरदारी भी कराई। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला केवल खातिरदारी तक ही सीमित नहीं था बल्कि पंचायतों से उन्हें खुश करने वसूली भी हुई है। मिली जानकारी के अनुसार प्रतापपुर ब्लॉक के कई पंचायतों से वसूली हुई है वह भी बारह बारह हजार की,बताया जा रहा है ये पैसे इसलिए कि वे उर रिपोर्टिंग सकारात्मक करें। कुछ सरपंच सचिवों ने नाम छापने की शर्त पर बताया कि उनसे यह कहते हुए वसूली की गई कि दूसरे पंचायतों से भी पैसा दिया जा रहा है,इसमें दस हजार साहब के लिए हैं और दो हजार मैडम के लिए।पंचायतों ने साहब और मैडम कौन हैं ये भी बताया लेकिन खुद को सार्वजनिक करने में उन्हें इस बात का डर है कि अधिकारी झूठे मामले बना उन पर कार्यवाही कर सकते हैं। बरहाल टीम घूम तो रही है केंद्र के लिए लेकिन खातिरदारी और पैसों के एवज में काम जिला प्रशासन का कर रही है और अब इनके द्वारा झूठी रिपोर्टिंग कर केंद्र सरकार को सच्चाई से परे गुमराह भी किया जाएगा।

12 हजार में गुणवत्ता की उम्मीद कैसे

केंद्र से आई टीम के एक मात्र अधिकारी व्हीके प्रसाद ने उस समय हद कर दी जब उन्होंने पत्रकारों से कहा कि 12 हजार में गुणवत्ता वाले शौचालयों की उम्मीद कैसे कर सकते हैं,उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और उनकी पूरी टीम पर ही सवाल खड़ा कर दिया। मिली जानकारी के अनुसार टीम प्रतापपुर के सेमराखुर्द में थी तभी ग्रामीण व पत्रकार वहां पहुंच गए और प्रसाद को पूरी स्थिति से अवगत कराने का प्रयास किया कि तभी प्रसाद ने स्वच्छता अभियान पर ही सवाल खड़ा करते हुए कहा कि बारह हजार में आप गुणवत्ता वाले और अच्छे शौचालयों की उम्मीद कैसे कर सकते हैं,इस राशि में जैसे बन सकते हैं बना दिए गए हैं। उनका यह जवाब आश्चर्यचकित करने वाला था क्योंकि केंद्र ने  उन्हें एक बड़ी जवाबदारी के साथ भेजा है। उनसे पत्रकारों ने अन्य जगहों पर भी चल स्थिति देखने कहा तो उन्होंने यह कह पल्ला झाड़ लिया कि दिल्ली से उन्हें सूची बना कर दी है जिसके बाहर वे नहीं जा सकते,उनका यह जवाब खुद ही उनकी भूमिका पर सवाल खड़े कर रहा है ।

तभी तो स्वच्छ भारत मिशन है फेल

स्वच्छ भारत मिशन देश के प्रधानमंत्री का सबसे बड़ा सपना और देश का सबसे बड़ा कार्यक्रम है बावजूद इसके यह योजना बुरी तरह फेल है जिसका बड़ा कारण योजना में शामिल सरकारी तंत्र के प्रत्येक व्यक्ति का इसमें जमकर कमीशनखोरी करना है,जिसको जितना मौका मिल रहा अपनी पॉकिट गर्म कर रहा है। पूरी योजना को सफल बनाने जिला प्रशासन के साथ कई को-ऑर्डिनेटर,तकनीकी अमला,पंचायत,जनपद सीईओ के साथ पूरे जिले जे अधिकारी कर्मचारियों को इसकी जिम्मेदारी दी गयी है जिसमें कोई भी अपनी जवाबदारी ईमानदारी से पूरी नहीं कर रहा है,कोई इसे कमाई का जरिया बना रहा है तो कोई अपनी आंखें बंद कर बैठा है और काम के नाम पर औपचारिकता पूरी कर रहा है,शासन भी आंखों में पट्टी बांध खुली छूट दे रखा है। जिले जे अधिकारियों ने इस योजना की जो दुर्गति की है ओ तो है ही,सरकार जिन्हें अपना दूत बना वस्तुस्थिति जानने भेज रही है वे भी सरकार के साथ छलावा कर रहे हैं। पहले राज्य से टीम आई और अब केंद्र से लेकिन कोई भी ईमानदार नहीं और सबको सिर्फ अपनी पॉकिट गर्म करने से मतलब है,अब ऐसी स्थिति में किसी भी योजना के सफल होने की उम्मीद कैसे की जा सकती है।

जिले के अन्य ब्लॉकों से भी वसूली

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अच्छी रिपोर्टिंग के लिए वसूली केवल प्रतापपुर ब्लॉक से ही नहीं वरन जिले के भैयाथान, ओड़गी,प्रेमनगर सहित अन्य सभी ब्लॉकों से हुई है,राशि केंद्र से आई टीम के साथ जिले के योजना से जुड़े अन्य लोगों को भी बंटी है,वसूली में सहयोग भी जिले के इशारे पर स्थानीय अधिकारियों द्वारा कराए जाने की बातें सामने आई हैं। जिले के भ्र्ष्ट अधिकारियों का इसके पीछे सिर्फ एक उद्देश्य है कि जिले में स्वच्छ भारत मिशन का जो बुरा हाल किया है वह केंद्र सरकार से छिपा रहे और उन्हें झूठी वाह वाही मिलती रहे

 
 
 
14-Dec-2017

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