एक ओर जहाँ आधुनिक वाद्य-यंत्रों और डीजे की धुन में हमारी पारम्परिक वाद्य यंत्र विलुप्त की कगार पर है।उन्ही खोती और विलुप्त हो रही संस्कृति ,नृत्य और वाद्य-यंत्रों के चलन को मानव दिलों मेंजीवित रखने हेतु जन जागृति युवा एकता मंच पंडरीपानी के युवाओं द्वारा छत्तीसगढ़ी पारंपरिक की वेशभूसा में सुसज्जित होकर पारम्परिक वाद्य यंत्रों मांदर, झांझ,मजीरा की ताल में आकर्षक वेश-भूसा ,कृष्ण-राधा की मनमोहक दृश्य के साथ रहस नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति प्रदान की गई।प्रतिवर्ष  होली के सुभ अवसर पर यह नृत्य डंडे और मांदर की थाप के साथ कदमो के जुगलबंदी का नयनाभिराम नजारा देखते ही बनता है।इस वर्ष भी यह नृत्य सभी युवा साथियों और ग्राम के प्रबुद्ध नागरिको के अथक सहयोग और प्रयास से मांदर और डंडे की मधुर ध्वनि शिवचौक से होती हुई हनुमान चौक,मातर भाटा, चट्टानपारा होते हुए सरकारी पारा में थमी।इस संदर्भ में गांव के सबसे प्रबुद्ध और वयोवृद्ध रहसकर्मी दुकालसिंह ध्रुव ने बताया कि यह नृत्य हमारे भारतीय संस्कृति की छाप और मानवीय एकता,सद्भाव और भाईचारे की भाव को उजागर करती है।इस कार्यक्रम में ग्राम पटेल जयराम दीवान,देवनारायण ध्रुव,हीरालाल साहू,रमेसर साहू,राकेश साहू,छन्नू ठाकुर,शिवलाल ठाकुर,जगदीश राम साहू,देवलाल यादव,नियर लाल,गजानंद, आनंद रामऔर युवा समिति के संरक्षक देवनारायण यदु,राधेलाल साहू, अध्यक्ष तोरण लाल ध्रुव सचिव विनोद यादव सदस्य टिकेंद्र साहू,नरेन्द्र साहू,लालाराम साहू,खेमचंद,दानेश्वर,लक्की,जितेन्द्र, विमल साहू,चेतन,खेमलाल, चुमेश्वर, दुर्जन,चम्पेश्वर,गोविंद खिलेश्वर वीरेन्द्र दिवेंद्र  उपस्थित थे

कुलेश्वर सिन्हा 

 

 

24-Mar-2019

Related Posts

Leave a Comment