भिलाई । कीर्तिशेष देवी प्रसाद चौबे की स्मृति में स्थापित एवं लोक जागरण के लिए प्रदत्त वसुंधरा सम्मान वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश दुबे को भिलाई निवास के बहुउद्देशीय सभागार में आयोजित एक गरिमामय समारोह में प्रदान किया गया । श्री दुबे को यह सम्मान प्रदीर्घ, प्रतिबद्ध, निष्पक्ष निर्भीक एवं रचनात्मक पत्रकारिता के महत्वपूर्ण योगदान हेतु प्रदान किया गया। राज्यपाल श्री बलराम दास टंडन के दुखद समाचार के कारण समारोह अत्यंत सादगी के साथ मनाया गया। समारोह के प्रारंभ में ही वसुंधरा सम्मान के संयोजक विनोद मिश्र ने आयोजन समिति की ओर से स्वर्गीय श्री टंडन को श्रद्धांजलि दी तथा समारोह में उपस्थित अतिथियों एवं गणमान्य लोगों ने 2 मिनट का मौन धारण करके शोकांजलि प्रदान किया।

  समारोह को अध्यक्षीय आसंदी से संबोधित करते हुए रमेश नैयर ने कहा कि पत्रकारिता सदैव ही चुनौतियों से भरी रही है। आज की पत्रकारिता अपेक्षाकृत अधिक चुनौतीपूर्ण है। जिन नैतिक मूल्यों की बुनियाद पर हमारी सामाजिक संरचना कायम हुई उसमें अनेक विस्मयकारी बदलाव आ चुके हैं। उन्होंने महत्वपूर्ण बात कही कि राष्ट्रीय नेता और राष्ट्रनायक में बड़ा फर्क है, नेता सिर्फ चुनावी नजरियों से काम करता है जबकि राष्ट्र नायक भावी पीढ़ी के नजरिए से काम करता है। 

समकालीन पत्रकारिता का दुखद पहलू यह है कि पत्रकारों का लेखन और विचार से रिश्ता टूटता जा रहा है। श्री नैयर ने देश की अनेक राजनीतिक घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि मीडिया, सत्ता और समाज के बीच अगर किसी तरह की संवादहीनता कायम होती है तो यह तकलीफ देह है। 18 वां वसुंधरा सम्मान ग्रहण करने के पश्चात अपने संबोधन में प्रकाश दुबे ने कहा कि पत्रकार के पास हमेशा कुछ ना कुछ नया करने की गुंजाइश बनी रहती है। एक जागरूक पत्रकार भविष्य में आने वाले संकट को भांप सकता है।उन्होंने कहा कि पत्रकार यदि ईमानदार है तभी वह निर्भीक होकर अपना दायित्व निभा सकता है। श्री दुबे ने आज़ादी के बाद की कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं का जिक्र करते हुए पत्रकारों को समझाइश दी कि अगर भ्रष्टाचार से समझौता करेंगे तो जनता और समाज की नजरों में अविश्वसनीय हो जाएंगे। श्री दुबे ने लाल किले से की जाने वाली घोषणा और राजनीतिक पार्टियों के द्वारा जनता को चुनाव जीतने के लिए दिए जाने वाले आश्वासनों की ऑडिट करने का भी सवाल उठाया। प्रकाश दुबे ने 18 वां वसुंधरा सम्मान प्राप्त प्रदान करने के लिए निर्णायक और आयोजन समिति के सदस्यों के प्रति कृतज्ञता प्रकट की। 
समारोह के मुख्य वक्ता सुनील कुमार ने मीडिया, सत्ता और समाज विषय पर अत्यंत तार्किक एवं वस्तुपरक उदबोधन प्रदान किया। उन्होंने कहा कि अखबार और पत्रिका अब करोड़ों के व्यवसाय में तब्दील हो चुकी है, यहां अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए अनेक तरह के समझौते हो रहे हैं। जाहिर है कि पत्रकार की लेखनी पर भी इसका असर पड़ता है। फिर तकनीक का कमाल है कि लोगों को इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से अनेक तरह की जानकारियां मिल जाती हैं। अब प्रिंट मीडिया के सामने चुनौती है कि वे पाठकों को कुछ ना कुछ नया दें। समारोह में  डॉ. रक्षा सिंह के अतिथि सम्पादन में  प्रकाशित वसुंधरा पत्रिका के स्त्री विमर्श विशेषांक का लोकार्पण भी हुआ ।

प्रारंभ में अतिथियों के साथ स्वर्गीय देवी प्रसाद चौबे के पुत्र प्रदीप चौबे, रविन्द्र चौबे, आयोजन समिति के अध्यक्ष दिनेश वाजपेई, स्वागत समिति के अध्यक्ष अरुण श्रीवास्तव, निर्णायक समिति के अध्यक्ष ईवी मुरली, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह कैम्बों, हिंदी ग्रंथ अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा, ऑफिसर एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेंद्र बंछोर ,शिक्षाविद आईपी मिश्रा, अजय पाठक आदि ने पुष्पांजलि अर्पित की। समारोह का संचालन डॉक्टर केएस प्रकाश, धन्यवाद ज्ञापन अरुण श्रीवास्तव, प्रशस्ति पत्र वाचन शरद कोकास ने किया। समारोह में नेतराम साहू, तोरणलाल अटल, महेंद्र साहू, अरविंद पांडे, अशोक त्रिपाठी, सुमन कन्नौजे, रवि श्रीवास्तव, भजन सिंह निरंकारी, तुलसी साहू, निर्मला यादव, सोनाली चक्रवर्ती, प्रदीप भट्टाचार्य, प्रशांत कानस्कर, नरेश विश्वकर्मा, संजीव तिवारी आदि के अलावा बड़ी संख्या में वरिष्ठ साहित्यकार, पत्रकार, मीडिया कर्मी प्राचार्य, समाज सेवी तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

16-Aug-2018

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