राजेन्द्र ओझा 
 
रायपुर : उस कुछ मीटर के रास्ते पर आवा-जाही कुछ कम ही रहती थी। उस रास्तें के दोनों तरफ शहर पूरी तरह शहर था। दौड़ता हुआ। आजू-बाजू किसी गिरे हुये के पास से गुजरता-बचा कर कम, लांघ कर ज्यादा। वह कुछ मीटर का लगभग खाली रास्ता, शांत और साफ रास्ता हमेशा शहर में भी एक गाँव के छिपे होने का आभास देता। पेड़ के नीचे सड़क पर बैठकर बतियाते कुछ बुजुर्ग, तो कोई छोटे से मंदिर के पास लाल कपड़े में बंधी धार्मिक किताब पढ़ता दिख जाता। कोई धोती पहना अधेड़ बोरिंग किनारे बैठ दातुन रगड़ता दिख जाता, तो कुछ युवा दिख जाते खड़ी साईकिल की स्टैण्ड पर बैंठे पैडल मार पीछे चक्के को घुमाते, तो कभी यूं ही घंटी बजातें। 
 
उस सड़क पर पक्के मकान थंे, तो झोपड़ियाँ भी थीं। छोटे दरवाजें-जैसे कह रहे हों ’’झुकोगे तभी अंदर आ पाओगे।’’ और अंदर पहुँच गये तो दिखता लोगों के दिल जैसा बड़ा और खुला आंगन। आम पेड़ की छाँह, मटके का ठंडा पानी, बूच की रस्सी से गूंथी, बार-बार ढीली होती और बार-बार तनती खाट पर बैठकर कोरी चाय पीने का आनंद। 
थोड़े से शहर और ज्यादा से गाँव का आभास देती इस सड़क पर एक बड़ा सा परिसर है। इस परिसर के भीतर आंगनबाड़ी, प्राथमिक शाला-लड़कों की अलग, तो अलग लड़कियों के लिये भी। पूर्व माध्यमिक शाला है तो है हाई स्कूल भी। परिसर एक चहार दीवारी से घिरा है और स्कूल शासकीय होने के कारण या तों नगर-निगम के द्वारा संचालित हो रहे होंगे या प्रदेश शासन द्वारा। लेकिन चहार दीवारी पर स्कूल की जानकारी को छोड़कर वैवाहिक भवन, किराया भंडार एवं कैटरर्स, धुमाल पार्टी, आरोग्य मंदिर आदि के साथ-साथ निजी स्कूल के विज्ञापन भी लिखे हुये है। 
 
स्कूल के नामों पर जब नज़र पड़ी तो पता चला कि शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला किसी श्रीधर जुनानकर के नाम पर है तो शासकीय प्राथमिक शाला का नामकरण किसी उमेश पाध्ये के नाम पर किया गया है। शालाओं का नामकरण तो इन विशिष्ट व्यक्तियों के नाम पर हो गया लेकिन इन विशिष्ट व्यक्तियों का परिचय, साहित्यिक, सामाजिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक आदि क्षेत्र, जिसमें इन्होंने उपलब्धियाँ हासिल की आदि का कहीं कोई उल्लेख नहीं था। 
 
मन में उत्सुकता थी इन विशिष्ट विभूतियों के बारें में जानने की। मैंने लोगों से पूछना प्रारंभ किया। युवा या उससे कुछ ज्यादा उम्र के लोगों को इनके बारें में कोई जानकारी नहीं थी। जिनके बारें में यह कहा जाता है कि इन्होंने अपनी उम्र गुजार दी, ऐसे 60-70 वर्ष की उम्र के लोगों से सतही तौर पर यह जानकारी प्राप्त हुई कि श्री उमेश पाध्ये वैज्ञानिक थे और कुआँनुमा गड्ढा कर अंतरिक्ष की स्थिति के बारें में कुछ खोज/अध्ययन करते थें और श्रीधर जुनानकर का संबंध स्वतंत्रता संग्राम से था। लेकिन इनके बारे में गहन और विस्तृत जानकारी प्राप्त नहीं हुई।
इसी तरह पंडरी मुख्य सड़क से कृषि उपज मंडी की तरफ जाने वाली सड़क पर भी ऐसा ही एक परिसर है जहाँ आंगनबाड़ी, अवंति बाई लोधी शासकीय प्राथमिक कन्या शाला, स्व. मधु पिल्ले स्मृति शासकीय प्राथमिक विद्यालय, फिरतूराम वर्मा शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला, स्व. रामबाई वर्मा की स्मृति में श्री दाऊलाल वर्मा द्वारा निर्मित कन्या हाई स्कूल स्थित है। लेकिन यहाँ भी स्कूल का नामकरण जिनकी स्मृति में किया गया है, के जीवन वृत्त एवं उपलब्धियों का कहीं कोई उल्लेख नहीं था। 
 
प्रदेश के प्रायः सभी शहरों, कस्बों एवं गाँवों में किसी-न-किसी शाला का नाम किसी-न-किसी की स्मृति में रखा गया है, उनमें से बहुत से लोगों की उपलब्धियों के बारे में जानकारी या तों बिल्कुल ही नहीं है या अत्यंत अल्प है। अतः शासन/प्रशासन को चाहिये कि ऐसी समस्त शालायें जिनका नामकरण किसी-न-किसी विभूति के नाम पर किया गया है, का जीवन परिचय, उपलब्धियाँ स्कूल परिसर के भीतर होर्डिंग्स के रूप में एवं चहार दीवारी पर मुख्य गेट के पास अंकित करावें साथ ही इन विशिष्ट व्यक्तियों के तैलचित्र भी स्कूल के भीतर ससम्मान लगाये जावें। उनके जन्म और स्मृति दिवस पर उन्हें याद भी किया जाना चाहिये। 
 
शाला परिसर की चहार दीवारी जिन पर अनेक प्रकार के निजी विज्ञापन अंकित कर दिये जाते है, के स्थान पर चहार दीवारी के बाहरी तरफ भारतीय संविधान की जनोपयोगी जानकारियाँ, संविधान के तहत प्रदत्त मूलभूत अधिकार एवं नागरिकों के कर्तव्य, केन्द्र एवं राज्य सरकार की जनहित योजनाओं की जानकारियाँ, वैज्ञानिक, समाज सुधारकों सहित आध्यात्मिक महापुरूषों की उक्तियाँ, उनके चित्र आदि का अंकन किया जाना चाहिये एवं चहार दीवारी के भीतरी तरफ स्कूल एवं छात्रोंपयोगी जानकारियाँ अंकित की जानी चाहिये जिससे  चहार दीवारी का न केवल सदुपयोग होगा अपितु छात्रों एवं वहाँ से गुजरने वाले लोगों को उपयोगी जानकारियाँ भी प्राप्त हो सकेंगी। 
 
अंत में एक बात और शाला का नामकरण जिनकी स्मृति में किया गया है उनके नाम पर छात्रों के लिये पुरस्कार की घोषणा छात्रों में अध्ययन के प्रति रूचि को बढ़ाने में सहायक ही सिद्ध होगी। 
राजेन्द्र ओझा
पहाड़ी तालाब के सामने कुशालपुर
रायपुर, (छत्तीसगढ़) - 492001
मो.नं. -95754-67733, 87703-91717
 
 
 
01-Aug-2018

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