एम. डब्लू. अंसारी 

भोपालः- 19 दिसम्बर (प्रेस विज्ञप्ति) भारत के दो अजीम रहनुमा मौलाना अली हुसैन आसिम बिहारी और बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ( जिन्होंने गरीबों, लाचारों और बे-बसों को इंसाफ दिलाने के लिए अपनी सारी जिंदगी वक़्फ कर दीं। मजलूमों को इंसाफ दिलाने के लिए मुसलसल जद्दोजहद किए और हमेशा उनकी तालीम की फिक्र किए। उनका मानना था कि तालीम ही वह वाहिद जरिया है जिसके जरिए इंसाफ की बाला दस्ती क़ायम किया जा सकता है ) कि यौमे वफात पर 6 दिसंबर को मुल्क भर में तका़रीब का इलाज किया जाए। मौलाना अली हुसैन आसिम बिहारी और बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की मिशन तालीम को कायम किया जाए और जात पात की तफरीक़ को खत्म करने की मिशन को आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने जो नारा दिया था किः- ष्दलित-दलित एक समान - चाहे हिंदू हो या मुसलमानष् पर काम करने की जरूरत है।

उल्लेखनीय है कि दोनों रहनुमाओं ने समाज के अंदर फैली तमाम तरह की बुराइयों को खत्म करने के हवाले से लोगों को बेदार करने की कोशिश करते हुए कहा कि तमाम तरह की बुराइयों को अगर समाज से खत्म करना है तो हमें तालीम याफ्ता बनना होगा। इसलिए दोनों ने अपनी सारी उम्र दबे कुचले लोगों को इंसाफ दिलाने और गुर्बती के शिकार लोगों की मदद करने में गुजार दी। दोनों रहनुमाओं ने हमेशा लोगों से तालीम याफ्ता बनने, मुत्ताहिद होने, मेहनत करने, अपने हुकू़क़ के लिए आवाज उठाने, समाज के अंदर फैली बुराइयों से लड़ने और उसको खत्म करने, नाइंसाफी व इस्तेहसाल के खिलाफ आवाज बुलंद करने, भेदभाव, जात-पात की रिवायत के खिलाफ लड़ने, हक़ तल्फी करने वालों और हक़-तल्फी करने वाली पॉलिसियों के खिलाफ लड़ने की बात कही।

बे-नज़ीर अंसार एजुकेशनल एंड सोशल वेलफेयर सोसाइटी, जो गुलिस्ता कई सालों से उर्दू की और मिल्ली खिदमात अंजाम देती आ रही है। इसी सिलसिले को जारी रखते हुए सोसाइटी ने उखुव्वते इस्लामी का मुबल्लिग़, मुसलमानों का अंबेडकर और दलित मुसलमानों का मसीहा मौलवी अली हुसैन आसिम बिहारी की हालाते जिंदगी और कारनामे को कलम बंद कर किताब की शक्ल में शाए किया है और यह किताब मंजरे आम पर आ चुकी है।

बे-नज़ीर सोसाइटी ने उखुव्वते इस्लामी का मुबल्लिग़ और दलित मुसलमानों का मसीहा ष्मौलवी अली हुसैन आसिम बिहारीष् के नाम से किताब मुर्तब करके क़ौम को एक बेहतरीन तोहफा दिया है। अवाम को चाहिए कि इस किताब को तलब करके मौलवी साहब की हालते  जिंदगी और कारनामे को पढ़ें और तालीम हासिल करने और रोजगार हासिल करने और गुर्बती के खिलाफ जो उनकी लड़ाई थी, उनका जो मिशन था उसको आगे बढ़ाएं।

इस किताब को हासिल करने के लिए मकतबा जामिया लिमिटेड देहली, अलीगढ़, मुंबई और बुक एंपोरियम, सब्जीबाग पटना से राब्ता कायम कर सकते हैं। या बे-नज़ीर अंसार एजुकेशनल एंड सोशल वेलफेयर सोसायटी उसिया रिसॉर्ट (क्वीन्स होम) अहमदाबाद पैलेस रोड, भोपाल 462001 मध्य प्रदेश से भी राब्ता कर सकते हैं। किताब से मुतअल्लिक़ मज़ीद तफसीलात के लिए इस नंबर पर 9425245544 राब्ता करें 

22-Nov-2022

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