गांधीजी की जान बचाने वाले बख्त मियां उर्फ बत्तख मियां अंसारी कि 25 जून योम-ए- पैदाइश के मौके पर पूरे भारत में धूमधाम से मनाया जाए जश्न

आज देश की आजादी का 75 वां साल मनाया जा रहा है। जिस आजादी की लड़ाई में लाखों लोगों ने कुर्बानियां दीं, लोग बेघर हुए, जेलों में तरह-तरह की तकलीफें बर्दाश्त कीं। काला पानी से लेकर फांसी की सजा हुई और गोलियों, तोपों से उड़ा कर मौत के घाट उतार दिए गए। इस आजादी से भारत में अंग्रेजी कंपनी राज का खात्मा हुआ। डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के जरिए लिखी गई किताब आईन मिला। जिसकी बुनियाद पर देश की आवाम सियासी और सामाजिक तौर पर बराबरी और जम्हूरियत की राह पर बढ़ चली। आज हमारी इसी आजादी का, आजादी की लड़ाई में शहीदों का मोदी सरकार के तहफ्फुज में पल बढ़ रहीं कंगना राणावत जैसे लोगों और उस वक्त के अंग्रेजी हुकूमत का साथ देने वाले आर.एस.एस के लोगों के जरिए तोहीन किए जा रहे हैं। आजादी से हासिल हुए तमाम कीमतों, दरजात, आईन और देश की आवाम की एकता और साझी संस्कृति, साझी विरासत की तारीख को मिटाया जा रहा है। देश के कुल कारखानों, रेल, हवाई अड्डा, खदानों, तालीम और सेहत इदारों से लेकर तमाम ऐसे तमाम संस्थानों निजी, देसी, विदेशी पूंजी वादियों के हाथों फरोख्त किया जा रहा है। देश को दोबारा कंपनी राज्य में तब्दील किया जा रहा है।

         ऐसे वक्त में गांधीजी की जान बचाने वाले सत्याग्रही दिव्यांगत बख्त मियां अंसारी को उनकी पैदाइश के मौके पर याद किया जाना देशवासियों की जिम्मेदारी है। इस मौके पर तमाम मुजाहिद आजादी को याद करना हम सब की जिम्मेदारी है।

         गांधीजी के जान बचाने वाले मुजाहिद आजादी दिव्यांगत बख्त मियां अंसारी को उनकी योम-ए-पैदाइश पर विनम्र श्रद्धांजलि पेश करते हुए भारत सरकार और रियासती सरकार से मांग करते हैं किः-
         बिहार में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी और बख्त मियां अंसारी के नाम से केंद्रीय विश्वद्यिालय का कयाम किया जाए और इसके साथ ही मरकजी और बिहार हुकूमत गांधी जी और बख्त मियां अंसारी के नाम से संयुक्त शोध स्थान (रिसर्च सेंटर) बनाए।

         चंपारण जिला (मोतिहारी) में उनके नाम से सड़कों और रेलवे स्टेशन का नाम रखा जाए।
         दलित मुस्लिम, ओबीसी मुस्लिम के साथ किए जा रहे मजालिम और नाइंसाफी को खत्म किया जाए। सरकारी नौकरियों और तमाम सरकारी इदारों में प्रतिनिधियों का मौका फराहम किया जाए। और आर्टिकल 341 में जो बंदिशें (रोक) लगाई गई हैं उसको खत्म किया जाए।

         तमाम एस.सी, एस.टी, ओबीसी, दलित ओबीसी और मुस्लिम ओबीसी मुजाहिद आजादी को उनकी जन्मतिथि और पुण्य तिथि को आजादी के पर्व पर याद किया जाए।

         भारत सरकार पूर्व राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के जरिए बख्त मियां अंसारी के बेटे को अलाट की गई 35 एकड़ जमीन आज तक उनको नहीं मिली है, उनको अलाट कराया जाए। बख्त मियां अंसारी का परिवार आज तमाम सुविधाओं से वंचित हैं, उनकी सलाहियतों के अनुसार उनकी मदद की जाए। और केंद्र सरकार/बिहार सरकार के जरिए जो काम आज तक मुकम्मल नहीं होए हैं, जल्द मुकम्मल किया जाए।

         समस्त स्वतंत्राता संग्राम सेनानियों जो आज गुमनामी के शिकार हो गए हैं, इनके बारे में आने वाली नस्लों को पढ़ाया और बताया जाए। उनकी सवाने हयात को निसाब में शामिल कराकर स्कूलों में पठन-पाठन के जरिए छात्रों की जेहन साजी की जाए।

         पूरे भारत में जहां जहां गांधी जी पीस फाउंडेशन है, वहां बख्त मियां अंसारी का भी परिचय कराया जाए, और उनकी तस्वीर लगाई जाए।
         बिहार के ऐसे गुमनाम संग्राम सेनानियों जिनको तारीख की किताब में जगह नहीं मिली, इन पर भारत सरकार और रियासती सरकार को विशेष ध्यान देना चाहिए।

23-Jun-2022

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