कबीरधाम की हिंसा -हार की खीज बना संप्रदायिक नफरत फैलाने का कारण बना ?

एम. एच. जकारिया

कबीरधाम नगर में एक वर्ग विशेष के द्वारा झण्डा लगाया जा रहा था जो हर वर्ष से मनाये जाने वाले त्यौहार में लगाया जाता रहा है कभी कोई  दिक्कत नहीं थी लेकिन कवर्धा मे राजनैतिक रसुख के लिए एक परिवार के द्वारा इसे संप्रदायिक रंग में रंग दिया गया क्योकि पिछले विधान सभा में उनके संगठन की हार का अपमान वो कई दिनों से बर्दाश्त नही कर पा रहे थे?

पूरी जानकारी इस तरह है कवर्धा शहर के कर्मा चौक पर एक संप्रदाय द्वारा दूसरे संप्रदाय के झंडे के बगल में अपना झंडा लगाने को लेकर पैदा हुआ विवाद राजनैतिक तूल पकड़ता जा रहा है  लोहारा नाका चौक इलाके में झंडा लगाने को लेकर विवाद हुआ जिसमें दो गुटों के युवक आपस में भिड़ गये और कुछ लोग मामूली रूप से जख्मी हुए। इस घटना के दो दिन बाद विश्व हिन्दू परिषद ने बंद का आव्हान कर जुलूस निकाला और उसके बाद शरारती तत्वों ने तोडफ़ोड़ की और जिला प्रशासन को कर्फ्यू लगाना पड़ा। जुलूस के दौरान हुई हिंसक घटनाएं जिसे पूरा संरक्षण  एक परिवार विशेष का था और कवर्धा के बहार से भी दंगाई बुलाये गए जबकि; जिला प्रशासन ने धारा 144 और कर्फ्यू लगाया हुआ था फिर इतने सारे लोगो को लेकर  वाहन ने कैसे नगर में प्रवेश किया ये गंभीरता से सोचने वाली बात है प्रत्यक्ष दर्शीयो  और व्यापारियों का कहना है की ये हिंसक भीड़ के लोग कवर्धा के नहीं थे ये लूट पाट करने वाले गुंडे और असामाजिक तत्व थे जिन्हे प्रयोजित तरीके से कवर्धा बुलाया गया था और कबीर धाम का पुलिस प्रशासन  ख़ामोशी से मूक दर्शक बना हुआ था  !

कवर्धा में घटित घटना से ये स्पष्ट हो गया है की इसे जानबूझकर सांप्रदायिक रंग दिया गया क्योकि क़द्दावर मंत्री अकबर भाई की रेकार्ड जीत से खिसियाये कथित विपक्षी दल के लोग ताक में थे और मौका मिलते ही इसे भुनाने में लग गए क्योकि क्षेत्रीय विधायक और मंत्री का कार्य और उनकी लोकप्रियता से ये इतने बौखलाए हुए थे की उनके हाथ से कबीरधाम जिले की राजनीती इनके हाथ से फिसलती जा रही थी तब  छत्तीसगढ़ में एक अलग तरह की राजनीति शुरू हो गई है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष का बयान देना की कवर्धा दंगों के बारूदी ढेर पर खड़ा है भावना को भड़काने का कुत्सित प्रयास और गैर जिम्मेदाराना कहा जा रहा है कुल मिलाकर  एक परिवार विशेष  और दल ने राजनैतिक वर्चस्व की खातिर कबीर धाम जिले के भाई चारे को सम्प्रदायिकता की भेट चढ़ा दिया है ?

07-Oct-2021

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