कौमी एकता की  मिशाल है शहंशाहे छत्तीसगढ़ का दरबार
(हजरत बाबा सैय्यद इंसान अली शाह लुतरा शरीफ  पर विशेष)
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क़ादिररिज़वी 

छत्तीसगढ़ की धरती पर लुतरा शरीफ एक ऐसा मशहूर देहात है जिसको पूरे हिंदुस्तान में एक ख्याति प्राप्त है जंगल के करीब बसे इस छोटे से गांव की फ़िजाओं में एक अलग ही खुश्बू है चारो ओर खुशहाली और शादमानी की महक है और यह सब इसलिए है क्योंकि यहां शहंशाहे छत्तीसगढ़,ताजदारे विलायत हजरत बाबा सैय्यद इंसान अली शाह का मुकद्दस दरगाह है जिनके फैजान के नूरी किरणों से 60 वर्षो सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नही हिंदुस्तान का चप्पा-चप्पा महक रहा है।
यहां हर जाति धर्म के लोग हिंदुस्तान के कोने-कोने से  अपनी फरियाद लेकर आते है और खाली झोली भरकर जाते है छत्तीसगढ़ के शहंशाह का फैजान हिन्दू,मुस्लिम,सिख,ईसाई के अलावा अन्य मजहब व मिल्लत के मानने वालों पर जारी है।
              
बाबा इंसान अली की पैदाइस,जिन्दगी और अंतिम सफर
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सूफी-संत हजरत बाबा सैय्यद इंसान अली शाह की पैदाईस 175 वर्ष पहले सन 1845 में ग्राम बछौद के सैय्यद मरदान अली के घर मे दादी अम्मा बेगम बी साहिबा के गोद मे हुई। बाबा इंसान अली शाह तीन बहन भाई में सबसे छोटे थे उनसे दो बड़ी बहन थी जिनका नाम इज्जत बी व उम्मीद बी था। बाबा सरकार   बचपन से ही करामाती थे अपने आप में ही लीन रहते थे आपका बचपन,जवानी के साथ पूरी जिंदगी बहुत ही सादगी और सराफत से गुजरी है जबकि आप एक रईस खानदान से ताल्लुक रखते थे आप जब बड़े हुए तो आपकी शादी खम्हरिया के मालगुजार जनाब मोहियुद्दीन खान की बेटी उमेद बी से हुई शादी के बाद बाबा इंसान अली की एक बेटी हुई जिनका मात्र 6 माह में इन्तेकाल हो गया था उसके बाद कोई औलाद नही हुआ आपने अपनी पूरी जिंदगी लोगो के भलाई करते हुए कौम खिदमत में गुजर दिए आपके पास कोई भी किसी भी हाल में आया सभी का आपने मदद किया ।  28 सितंबर सन 1960 रविवार का दिन हजरत बाबा सैय्यद इंसान अली शाह के लबो पर अजीब सी मुस्कुराहट थी नूरानी चेहरे से नूर की रहमत टपक रही थी बाबा सरकार कभी हँसते तो कभी मुस्कुराते तो कभी अपने आप मे मगन हो जाते दिन भर लोगो की आंखे बाबा के चेहरे पर टकटकी लगाए देखती रही दिन ढलता गया शाम का सूरज धरती के आगोश में छुप गया और अंधेरों में अपनी बांहे फैलाना शुरू कर दिया उपस्थित लोगों ने खामोश जुबान से रोते हुए आफ़ताबे छत्तीसगढ़ को आखरी सलाम किया बाबा इंसान अली  रात 9:35 बजे हमेशा के लिए हमारी जाहिरी आंखों से ओझल हो गए और अब अपने आस्ताने में आराम करते हुए दूर दराज से पहुँचे हुए मुसीबतजदो की परेशानी दूर कर रहे है।
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रतनपुर के राजा भोषले के लश्कर में सिपहसालार से बाबा इंसान अली के परदादा सैय्यद हैदर अली
(ट्रांसफर होकार बछौद पहुचे थे )

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हजरत बाबा सैय्यद इंसान अली शाह के परदादा सैय्यद हैदर अली शाह सरजमीने अरब से पैग़म्बरे इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब की बशारत के बाद हिंदुस्तान आये सबसे पहले ख़्वाजा गरीब नवाज के दरबार अजमेर शरीफ में कुछ ठहरे और इसके बाद दिल्ली पहुचकर ख्वाजा बख्तियार काकी व सरकार निजामुद्दीन औलिया के दरबार मे हाजरी देने के बाद कलियर शरीफ,बरेली शरीफ,देवा शरीफ होते हुए किछौछा शरीफ पहुचकर हजरत सैय्यद मखदूम अशरफ जहांगीर सिमनानी के दरबार में कुछ दिन रुकने के बाद सीधा छत्तीसगढ़ रुख किये इलाहबाद,कटनी होते हुए बिलासपुर पहुचे और वहां से रतनपुर आये और हजरत सैय्यद मुशा शहीद के दरगाह में रुकने का फैसला कर लिए वहां राजा भोशले की सल्तनत थी एक दिन सैय्यद हैदर अली राजा भोशले से मिले राजा बहुत खुश हुए और अपने फौज का सिपहसालार बना दिये वे अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी अंजाम देने लगे यहां से कुछ सालों बाद सैय्यद हैदर अली शाह का लश्कर से ट्रांसफर होकर बछौद आ गए और हमेशा के लिए परिवार के साथ यहीं बस गए।
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वली होने की पहचान नागपुर के बाबा ताजुद्दीन से मिली
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हजरत बाबा सैय्यद इंसान अली शाह एकदम फक्कड़ मिजाज के थे। उन्हें खान-पान की कोई सूद-बुद नही होती थी कपड़ो का कोई ख्याल नही रहता था अजब कैफियत,अजब रंग-ढंग कभी कभी बाते भी बेतुका करते जो आम आदमी के समझ से परे होती थी कुछ दिनों से तो गाली गलौच करना,पागलों जैसी हरकत करना,अचानक किसी को बार देना ,मुह बनाते हुए बीड़ी-सिगरेट पीना ये सब तो जैसे उनकी आदतों सुमार हो गया था। बाबा इंसान अली के इन हरकतों को देखकर लोग आपको पागल,दीवाना,मजनू कहने लगे थे फिर एक दिन रायपुर के हजरत मोहसिने मिल्लत हजरत सैय्यद हामिद अली लुतरा शरीफ पहुंचे और  बाबा इंसान अली व्यक्तित्व को पहचानते हुए कहा कि जिन्हें तुम लोग पागल समझ रहे हो ये कोई आम इंसान नही है ये तो अल्लाह के खास बंदों में से एक है ये अल्लाह के वली हैं हजरत हामिद अली ने कहा कि बाबा इंसान अली को नागपुर के बाबा ताजुद्दीन के दरबार मे ले जाओ वहां तुम्हे सारे सवालों के जवाब मिल जाएंगे और तुम सबको इनके हक़ीक़त के बारे में पता चल जाएगा। फिर क्या था बाबा इंसान अली शाह को जंजीर और रस्सियों में जकड़े हुए सन 1923 में आपकी मां दादी अम्मा बेगम बी साहिबा व आपकी पत्नी उम्मद बी साहिबा व कुछ लोगो के साथ नागपुर (महाराष्ट्र) बाबा ताजुद्दीन औलिया के दरबार पहुँचे जब बाबा ताजुद्दीन ने बाबा इंसान अली को देखा मचल गए और कहा " अरे ये क्या.... फौरन इनकी रस्सियां और जंजीरे खोल दो जिन्हें तुम पागल,दीवाना समझ रहे हो ये कोई आम इंसान नही है ये तो खुदा का करीबी बन्दा है ये दुनियाएं विलायत का बड़ा ताजदार है इनकी मंजिल तो कही और ही है बाबा इंसान अली को अपना बड़ा भाई कहते हुए बाबा ताज ने अपने गले का हार उनके गले मे पहना दिया यही वह मंजर है जब बाबा इंसान अली के अंदर छिपे राज को सभी ने जाना और फिर लोग बहुत ही इज्जतो एहतेराम के साथ उनके सामने अदब से रहने लगे।

*करम है मेरे बाबा इंसान अली का*
*की हम बेकसों को ठिकाना मिला है*
*उसे बागे जन्नत की परवाह क्या होगी*
*जिन्हें आपका आस्ताना मिला है*

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विलायत के ताजदार की कुछ अनोखी करामात
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हजरत बाबा सैय्यद इंसान अली शाह जन्म से ही करिश्माई व्यक्तित्व के धनी थे उनकी सैकड़ो करामात (करिश्मा) है आज भी दरबार से जारी है और कयामत तक जारी रहेगा। वैसे तो उनके सैकड़ों करामात है लेकिन कुछ मशहूर करामात (करिश्मा) आपके सामने प्रस्तुत किया जा रहा है। आप शुध्द छत्तीसगढ़ी बोली बोला करते थे एक बार हजरत सैय्यद हामिद अली शाह रायपुर से लुतरा शरीफ आये रात में क्या देखते है कि बाबा इंसान अली खुदा के याद में लीन हैं उनके सीने से एक नूर चमक रहा था उस नूर से मदीना शरीफ के गुम्बद खजरा नजर आ रहे थे पूरा कमरा खुशबुओं से भरा हुआ था बाबा इंसान अली ने जब सैय्यद हामिद अली शाह को देखा तो फरमाया। तैं हर मोला काय देखत हावस ये हर वो जगह ये जिंहा ले आदमी मन कयामत तक ले फ़ैज़ पावत रही। एक बार बाबा सरकार राधे श्याम नाम के ड्राइव्हर के जीप में बैठकर बिलासपुर से लुतरा शरीफ आ रहे थे कि सीपत के पास जीप का डीजल खत्म हो गया और गाड़ी रुक गई बाबा ने तेज आवाज में बोले "तै काबर जीप ला रोक देहे रे" वाहन चालक ने डरते हुए कहा कि डीजल खत्म हो गया है बाबा ने कहा "एखरे बर तैं मोला अपन गाड़ी म बैठाए हावस का रे" बाबा ने जलाल में आते हुए कहा कि टीपा म पानी ला के टँकी मा डाल दे" चालक ने डरते हुए ऐसा ही किया और गाड़ी चालू किया गाड़ी चालू हो गई बाबा ने लुतरा शरीफ में उतरकर कहा कि "तैं हर टँकी मा झांक के देखबे झन" इसके बाद कई दिनों तक उसी पानी से जीप चलती रही एक दिन चालक राधेश्याम टंकी में खोलकर देख लिया उस दिन से फिर गाड़ी बन्द हो गई फिर डीजल डलवाकर चलाना पड़ा। इसके अलावा सैकड़ो करिश्मे है बाबा इंसान अली शाह के पास शेर आकर पहरा देते और कदमो को चूमकर वापस जंगल चले जाते उनके फैजान से लाखो की जिंदगी में खत्म होने से पहले बहारे आ गई।

निगाहें वली में वो तासीर देखी,बदलते हजारों की तकदीर देखी

                 
मौसी की बनवाई हुई मस्जिद में 14 साल पढ़ाये नमाज
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(खम्हरिया में है बिलासपुर जिला की सबसे पुरानी मस्जिद है)
आसपास के गांव के मुसलमानों के नमाज पढ़ने के लिए हजरत बाबा सैय्यद इंसान अली शाह के खाला (मौसी) सिंगुल की गौटनींन ने ग्राम खम्हरिया में 170 वर्ष पूर्व मस्जिद बनवाई थी जो आज भी पूर्व की तरह ही है गुड़,चुना और बेल के गारे से निर्मित आलीशान मस्जिद बिलासपुर जिला के सबसे पुरानी मस्जिद है मस्जिद के दीवारों की मोटाई ढाई फिट है उक्त मस्जिद में बाबा इंसान अली शाह ने 14 वर्षो तक नमाज पढ़ाई है और लोगो को सही रास्ता चलने की शिक्षा देते हुए दिन का काम किया यह मस्जिद आज भी पूर्व की तरह ही खूबसूरत है ऐसा लगता है कि अभी अभी ही इसकी तामीर की गई है इस मस्जिद को देखने दूरदराज से आते है यह लोगो के आकर्षक का केंद्र है मस्जिद के आंगन में बाबा सरकार के नानी जान की दरगाह है। 

30-Mar-2021

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