एजेंसियों से 

मुंबई: भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सहयोगी शिवसेना ने शुक्रवार को कहा कि उप चुनाव के नतीजे और मौजूदा मौजूदा रुझान इस ओर इशारा कर रहे कि केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा को 2019 लोकसभा चुनाव में 100-110 सीटों का नुकसान होगा। शिवसेना के हिंदी अखबार 'दोपहर का सामना' और मराठी अखबार 'सामना' में प्रकाशित कड़े संपादकीय में भाजपा पर करारे प्रहार किए गए हैं। इसमें लिखा गया है, "जब भाजपा एक छोटे से राज्य त्रिपुरा की जीत का जश्न मना रही थी, तभी उसके गढ़ गोरखपुर और फूलपुर में समाजवादी पार्टी की जीत ने भाजपा के खेमे में खलबली मचा दी।"

शिवसेना ने संपादकीय में कहा, "करीब एक साल पहले भाजपा ने रिकार्ड 325 सीटें अपने नाम करते हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी। गोरखपुर में 1991 के बाद से लगातार जीत दर्ज करने वाले योगी आदित्यनाथ राज्य के मुख्यमंत्री बने लेकिन इतनी ज्यादा लोकप्रियता होने के बावजूद उनका किला क्यों ढह गया। "'सामना'  में कहा गया है 'कि 2014 में ऐसा माना जा सकता था कि लोकप्रियता की लहर इतनी ऊंची थी कि पानी ने जनता की आंखों एवं कानों का बंद कर दिया था जिसके कारण भाजपा जीत गई लेकिन वह लहर अब खत्म हो गई है और जनता अब सब कुछ 'साफ' देख सकती है।'

भाजपा उत्तर प्रदेश में दो महत्वपूर्ण सीट गंवाने के लिए 'मतदाताओं की संख्या और उत्साह में कमी' और बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) एवं समाजवादी पार्टी (एसपी) के बीच हुई 'सौदेबाजी' को दोष दे रही है। इस पर शिवसेना ने कहा, "2014 के बाद से भाजपा ने सत्ता में बने रहने के लिए कितनी सौदेबाजियां की हैं। नरेश अग्रवाल के बारे में क्या जिनको बड़ी धूमधाम के साथ भाजपा में शामिल किया गया। त्रिपुरा में भाजपा अपने में पूरी कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के 'विलय' के बाद ही जीत सकी।"

चुनावों का जिक्र करते हुए शिवसेना ने कहा कि सपा उम्मीदवारों ने गोरखपुर और फूलपुर, दोनों जगहों पर बड़े अंतर से जीत हासिल की जो यह दर्शाता है कि जनता ने दोनों सीटों पर भाजपा को हराने की ठान ली थी। बिहार के जहानाबाद और अररिया में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की जीत पर शिवसेना ने कहा कि भाजपा के कुछ नेता मूर्खो के स्वर्ग में रह रहे हैं क्योंकि उन्होंने इसे जेल में बंद राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के लिए 'एक सहानुभूति की लहर' के रूप में देखा। शिवसेना ने संपादकीय में कहा, "लालू भ्रष्टाचार के लिए जेल में बंद हैं..और यह प्रतिशोध की राजनीति हो सकती है। इसके बावजूद भी अगर वह 'सहानुभूति' प्राप्त कर सके, तो नीतीश कुमार और मोदी दोनों के लिए यह एक बड़ा झटका है..चुनाव के परिणाम भाजपा को अर्श से फर्श पर ले आए हैं।"

सेना ने चेतावनी दी, "इस सब के बीच अब यह स्पष्ट है कि 2019 में भाजपा की संख्या 280 नहीं होगी, पार्टी को कम से कम 100-110 सीटों का नुकसान होगा। यह चुनाव रूस, अमेरिका, कनाडा, फ्रांस या इजराइल में नहीं बल्की भारत में हो रहा है। इसलिए उन्हें (भाजपा) अपने पैर यहां जमीन पर रखने चाहिए।"

17-Mar-2018

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