*शिक्षा को महंगा करने वालो पर धारा 124 ए० के तहत अपराध दर्ज करने की रखी मांग* 

 *राजनांदगाँव* ज्ञात हो कि भारत देश के हर नागरिक को मौलिक अधिकार प्राप्त है  संविधान में शिक्षा का अधिकार ( 21क.राज्य.छह वर्ष से चौदह वर्ष तक की आयु वाले सभी बालको के लिए निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है ) लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण पूरे देश में लॉकडाउन की स्थिति निर्मित थी और इसी बीच पूरे देश में सभी शिक्षण संस्थाओं को भी बंद रखने का आदेश भारत सरकार का था ,विश्वव्यापी महावारी कोविड-19 कोरोना संक्रमण ने हमारे भारत देश को आर्थिक रूप से कमजोर कर दिया है पूरे देश मे हाहाकार मचा हुआ है लोग दो वक़्त की रोटी के लिये तरस रहे है ,वही बात करे छत्तीसगढ़ प्रदेश की तो यहां पर भी यही स्थिति निर्मित है जिसके चलते पालक अभी फीस पटाने में सक्षम नहीं है परंतु प्रदेश के  निजी स्कूल संचालकों के द्वारा  एक  याचिका  दायर करवाई गई थी  शिक्षकों की सैलरी देने को आधार बनाया गया था जिस आधार पर  माननीय  उच्च न्यायालय बिलासपुर  के द्वारा  सभी निजी  स्कूलों को  सिर्फ  ट्यूशन फीस पालको से लेने के लिए  कहां गया था माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर के आदेशानुसार जो ट्यूशन फीस लेने के लिए निजी स्कूल संचालकों को छूट प्रदान की गई थी परंतु इन निजी स्कूल संचालकों के द्वारा मनमाने रूप से पूरे वर्ष की फीस पालको को जमा करने का दबाव बनाया जा रहा था जिससे चलते बहुत से पालक परेशान होकर पालक छत्तीसगढ़ छात्र पालक संघ के नेतृत्व में जिला शिक्षा अधिकारी राजनांदगाँव से मिले थे और वर्तमान की समस्याओ अवगत भी कराया था , वही जिला शिक्षा अधिकारी ने निजी स्कूलों के द्वारा पिछले वर्ष की अधिसूचित फीस जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय राजनांदगाँव में प्रस्तुत नही करते और ट्यूसन फीस को परिभाषित नही करते तब तक किसी भी पालक को फीस पटाने की आवश्यकता नही है यह मौखिक रूप से कहा था जिसका प्रमाणिक विडियो पालको के पास है ,वही शिक्षा अधिकारी द्वारा औपचारिक तरीके से निजी स्कूलों के विरुद्ध  अनुशासनात्मक  कार्यवाही किए जाने हेतु आदेश निकाला था लेकिन किसी भी निजी स्कूल इनके आदेश का पालन नहीं किया , निजी स्कूल और लगतार मनमानी करते रहे तो जिले के समस्त पालक एकजुट होकर छत्तीसगढ़ छात्र पालक संघ के बैनर तले एक दिवसीय सांकेतिक भूख हड़ताल भी की थी वहाँ समर्थन देने वर्त्तमान महापौर भी पहुची थी वही निजी स्कूलों की बिंदुओं पर विभागीय जाँच की मांग की गयी थी जिस पर जिला शिक्षा ने  7 दिवस के अंदर कार्यवाही का आश्वासन दिया था परंतु जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा आज पर्यन्त विभागीय जाँच प्रारंभ भी नही करवाई गई नही आज तक पूरे जिले में किसी निजी स्कूलों की जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा अब तक किसी भी निजी स्कूल की मान्यता समाप्ति की कार्यवाही भी अभी तक नही की , इससे यह प्रतीत होता है कि जिला शिक्षा अधिकारी निजी स्कूलों के संचालकों के साथ सांठगांठ कर हमारे भारत देश के संविधान का अक्षरस ह पालन नहीं कर रहे हैं और देश के आने वाले भविष्य उन छात्र छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने में लगे हैं  सूत्रों से यह जानकारी भी प्राप्त हुई है जिला शिक्षा अधिकारी राजनांदगाँव निजी स्कूल संचालकों के साथ षड्यंत्र कर शिक्षा व्यवस्था को महंगा करने में लगे हुवे है ताकि देश का बच्चा शिक्षा प्राप्त न कर सके और अनपढ़ रह जावे इसलिये आज छत्तीसगढ़ छात्र पालक संघ ने देश के राष्ट्रपति और छत्तीसगढ़ के राज्यपाल से शिक्षा को महंगा करने और देश को अशिक्षित रखने के षड़यंत्र में शामिल संबंधित विभाग के अधिकारी और निजी स्कूलों के संचालको के ऊपर आई०पी०सी० की धारा 124 ए० के तहत अपराध दर्ज करवाने शिकायत की  जिससे कि आने वाले समय में इस तरह का कृत्य कोई न दोहरा सके ।

25-Oct-2020

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