एम. एच. जकारिया
ये लेख  मैंने शायद  कल कांकेर की घटना के लिए ही लिखा था लगता हैं, कांकेर में एक पत्रकार की कुछ लोगो ने पिटाई कर दी, बताया जा रहा है की वो भी पत्रकार ही है या नहीं भी है तो राजनीति करना कोई जुर्म तो नही है ?
छत्तीसगढ़ राज्य में कई हजारो पत्रकार है, लेकिन विवादो से कुछ पत्रकारों का हमेशा से नाता रहा है चाहे सरकार किसी की भी हो, इन्हें खबरों और समाचारों से कोई लेना देना नहीं होता है इन्हें मतलब होता है खुद को हाई लाईट करने से और अपने स्वार्थ सिद्धि से!

शोसल मीडिया के कुछ फेसबूकिये पत्रकार इस मामले को लेकर अपनी भडास् खूब निकाल रहे हैं । क्यों ना हो इनके पास कोई काम तो है नहीं पत्रकार सुरक्षा के नाम पर पत्रकारों के क्लब और संस्था के नाम पर इनकी रोजी रोटी चलती हैं, कोई इन्हें पूछता तो है नहीं बस नक्कार् खाने मे बैठे, एक दूसरों को नीचा दिखाते रहते  हैं और इनका साथ भी इनके जैसे नाक्करे ही देते है। ना इनके लेख  होते ना समाचार होते है बस नक्कार खाने में बैठ कर  निंदा करना इनका काम है,

हाँ मै मानता हुँ की मै पत्रकार नहीं हुँ  और न ही पत्रकार होने का कभी दिखावा किया है,
ये जरूर कहना चाहूंगा की, आज जो पत्रकारीता के नाम पर हो रहा है, उससे पत्रकारिता जरूर कलंकित हो रही हैं, ऐसा लगता हैं की पत्रकारिता का ठेका कुछ ऐसे चंद  लोगों ने ले लिया है जो अपने आप को पत्रकारों का हितैसी दिखाना चाहते हैं । अगर आप किसी पत्रकार संगठन या प्रेस क्लब के सदस्य नहीं है तो आप पत्रकार बिल्कुल भी नहीं हो सकते, चाहे भले ही कितनी भी मीडिया चला रहे हो, आप समाचार या लेख लिख रहे हो  ? क्योकि आज कल  विवादित पत्रकारों की गिनती ही पत्रकारों में होती है और जो ख़ामोशी से पत्रकारिता कर रहे है  उनकी कोई गिनती नहीं है ! कब कहाँ उनका मूड सरक जाए कब किसको फोन पर गली गलोज कर दे  जाने किसे जलील करने लगे लेकिन आप उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकते, चाहे उनकी भाषा आपत्ति जनक ही क्यों ना हो, थोड़ी थोड़ी बात पर लोगों का मखौल बनाना इनकी आदत मे शुमार जो है!
मेरी बातो से कुछ लोगो को बुरा जरूर लगेगा लेकिन अब इस भ्रम को खत्म करना चाहिए की पत्रकारों के क्लब और संगठन ही सर्वोपरि है  क्योकि  ,इन संगठनों के नाम पर कुछ लोग अपना भला जरूर कर रहे है और इनके द्वारा पत्रकार सुरक्षा के नाम सही  काम करने वाले मेहनती पत्रकारों का शोषण  किया जा  रहा है , जिन्हे  वर्षों से संस्था में सदस्यता तक नहीं  दी गई। और युक्त क्लब या संस्था में   वोट और चुनाव कराने  के नाम पर  प्रेस में काम करने वाले उनसे  संबधित चापरासि , ड्रायवर  असिस्टेंट को सदस्यता दी गई है, सरकार चाहे ते इनकी जाँच कर ले  और रजिस्टर फार्म एंड सोसायटी  की धारा 27 /28 के अंतर्गत इसकी गंभीरता से जाँच करनी चाहिए।  जो फंड  प्रेस कॉन्फ्रेंस के नाम  पर ओर  जन प्रतिनिधियों, सांसद  विधायक निधि से मिले है उनका हिसाब लिया जाना चाहिए   और जिन्होंने गड़बड़ी की है उन्हे कड़ी सजा दी जानी चाहिए कुछ तथ्य हमारे पास भी है, जो समय आने पर प्रस्तु कर दिया  जायेगा!
मैं किसी भी संस्था का विरोधी नहीं हुँ, लेकिन आज पत्रकारों की सुरक्षा के नाम पर कुछ  चंद लोग के द्वारा  अपने काले कारनामे को  छुपाने  संस्था और संगठन का सहारा लिया जा रहा है पहले उसके लिए कानून बनाने की जरुरत   हैं और जो  ईमानदारी से पत्रकारिता कर रहे है  उन्हें  कोई सुरक्षा की जरूरत नही होती वैसे तो हर  आम नागरिक भी अपने आप को  आसहआय और असुरक्षित  मासूस कर सुरक्षा मांगने का हक़ रखता है !,
आज पत्रकारिता के नाम पर संगठन बनाया जाता है लेकिन पत्रकारिता करने वाले सही पत्रकारों को उस संस्था में सदस्यता नही दी जाती हैं, और ना उस संस्था का पदाधिकारी बनाया जाता है, यहाँ तो वे  ही इन संगठनो में सदस्य या पदाधिकारी होते है जो किसी भी संस्था के पत्रकार ही नहीं होते और उस संस्था के नाम की खाते हैं, RTI से प्राप्त जानकारी के अनुसार  रायपुर प्रेस क्लब इसका ज्वलंत उदहारण  है <जहाँ  सालों से कोई हिसाब किताब तक नहीं हुआ है और बिना रजिस्टर की सहमति से  चुनाव हो जाता है और   धारा 27/ 28 की कोई जानकारी जिस्टार फार्म सोसाइटी को नही दी गई है जहाँ विधायको  -  सांसदो और प्रेस कॉन्फ्रेंस के नाम पर लाखों रुपयों का कोई हिसाब किताब ही नही है संस्था के चुनाव के नाम पर धोखे मे रखा गया और रजिस्टार फर्म एंड सोसाइटी को अंधेरे में रखा गया जिनका चुनाव ही वर्षो से अवैध है जिसकी शिकायत हाईकोर्ट तक में की गई लेकिन कोई इन्हें कुछ कहना नहीं चाहता  ? प्रेस और पत्रकार कोटे से इन्ही संस्थाओ के लोग जमींन और माकन आबंटित   किये गए है और हक़ीक़त में पत्रकारिता से जुड़े हुएलोगो को कुछ भी नहीं मिलता  हैं   वही हाल पत्रकार अधिमान्यता का भी है  फर्जी संस्था दिखा कर अधिमान्यता प्राप्त प्रकार वर्षो से बने हुए है भले वे उक्त संस्था में  वे  कार्यरत नहीं है सरकार को इसकी भी जांच करनी चाहिए ,नियम कानून तो सब के लिए है पत्रकार सुरक्षा सही पत्रकारों को मिलनी चाहिए  पत्रकारिता के नाम पर शोषण करने वालो को नहीं !इन  धन्धे बाज़  पत्रकारों की जांच होनी चाहिए 

 

27-Sep-2020

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