महात्मा गांधी के प्राणरक्षक बत्तख मियां को प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद द्वारा मिली भूमि पिछड़ों के राज में भी नहीं मिली क्यों?

*जावेद बिन अली स्वतंत्र पत्रकार (पूर्व डी.जी. अंसारी 

 

उत्तर प्रदेश लखनऊ : भारत के प्रसिद्ध पत्रकार एवं लेखक खुशवंत सिंह के अनुसार भारत की आजादी की कहानी और इतिहास मुसलमानों के खून से लिखी गई है आबादी के लिहाज से कम प्रतिशत होने के बावजूद भी आजादी में मुसलमानों की एक बड़ी आबादी ने ना बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया बल्कि अपने वतन अजीज की आजाद को यकीनी बनाने मे बढ़ चढ़क कर हिस्सा लिया दिल्ली की इंडिया गेट पर तकरीबन 95300 मुजाहिदीन आजादी के नाम लिखे गए हैं जिनमें से 61945 मुसलमान हैं सृष्टि 5% मुस्लिम मुजाहिदीन आजादी थेll हैदर अली उनके बहादुर पुत्र टीपू सुल्तान ने 1780 और 1790 मैं ब्रिटिश साम्राज्य के हमलावरों के खिलाफ रॉकेट और तोप के प्रयोग से उनके दांत खट्टे कर दिए थे l

आजादी की लड़ाई में महात्मा गांधी को जान से खत्म करने के लिए उन पर छ बार हमला किया गया था lलेकिन जिसे बचाने वाला अल्लाह हो उसे कौन मार सकता है l कानपुर से प्रकाशित होने वाला प्रताप अखबार मे बिहार की नील खेती करने वाले किसानों के हालात पीर मोहम्मद मूनिस के कालम से गांधीजी प्रभावित थे l उसी क्रम में जब 1916 में कांग्रेस के वार्षिक सत्र में बेतिया जिला के अंग्रेजी हाई स्कूल के अध्यापक, कवि और सहाफी पीर मोहम्मद मुनिस के आग्रह पर जब गांधी जी 1917 में चंपारण सत्याग्रह के लिए पहुंचे थे l उसी समय कारखानों के मैनेजर इरविन ने अंग्रेजों की आंख में गढ़ने वाले महात्मा गांधी का काम समाप्त करने का मंसूबा बना लिया l

मैनेजर इरविन ने खानसामा बत्तख मियां अंसारी के माध्यम से जहर से भरी दूध को उन तक पहुंचा तो जरूर दियाl लेकिन बत्तख मियां को अल्लाह की याद आई और अपने नम आंखों से महात्मा गांधी को दूध पीने से मना कर दिया lजान तो बच गई महात्मा गांधी की ,लेकिन अंग्रेजी सरकार ने उनकी पुश्तैनी 12 एकड़ भूमि छीन कर उनके घर तक को तहस-नहस कर के पूरे घर को बर्बाद कर दिया और जेल की सलाखों में डाल दियागयाl

मंडल कारागार मोतिहारी के पत्रांक संख्या 1935 के अनुसार बत्तख मियां को धारा 188 भारतीय दंड विधि के अंतर्गत डिप्टी सिटी मजिस्ट्रेट के न्यायालय से 5.12 .1921 को 1 माह का कारावास की सजा हुई थी l मारने वाले से जान बचाने वाले की ज्यादा इज्जत होनी चाहिएl लेकिन दुर्भाग्य हैl गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को भारत का बच्चा बच्चा जानता है lलेकिन 1917 में चंपारण आंदोलन के समय खानसामा बत्तख मियां अंसारी ने किस तरह अपनी इमानी ताकत के माध्यम से महात्मा गांधी की जान बचाई थी lइसको भारत के 5% लोग तक नहीं जानते हैं l

इसी कार्य को देखते हुए प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने बिहार सरकार को कृषि भूमि 50 एकड़ देने के लिए आदेश किया थाl लेकिन आजादी के बाद से लेकर आज तक केंद्र और राज्य सरकार ने दलित समाज पिछड़ी समाज अल्पसंख्यक समाज सभी को खूब ठगा हैl और आज तक ठगने का कार्य चल रहा है और इस लॉकडाउन में तो आंखों के सामने दलितों पिछड़ों गरीबों के साथ क्या सलूक किया गया? सारी दुनिया आज तक देख रही है l

बिहार राज्य में भोला पासवान शास्त्री, कर्पूरी ठाकुर ,अब्दुल गफूर, लालू प्रसाद यादव , राबड़ी देवी, नीतीश कुमार, जीतन राम मांझी आदि जैसे लोगों ने दलित पिछड़ों और अल्पसंख्यकों का मसीहा बनकर आज तक राज्य करते आ रहे हैं lफिर भी महान स्वतंत्रता सेनानी महात्मा गांधी के प्राण रक्षक बत्तख मियां अंसारी के इस योगदान को भुला दिया गया l प्रथम राष्ट्रपति की आत्मा जरूर इन पिछड़े मुख्यमंत्रियों से पूछेगीl पूर्वी चंपारण के निवासी और बत्तख मियां के वारिस प्रपत्र चिराग अंसारी ने बताया कि बिहार सरकार द्वारा मात्र 5 एकड़ जमीन इनके वारिसों को मिला था lइसमें से आधा फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने ले लिया l बाकी जमीन नदी ने छीन लिया l भारत सरकार के राष्ट्रपति आदेश के बावजूद भी उनके वारिस दैनिक मजदूरी करने पर मजबूर हैं l

अब तो हद यह है मोतिहारी स्टेशन पर रेल मंत्री लालू प्रसाद द्वारा मुख्य गेट पर स्वतंत्रा सेनानी बत्तख मियां द्वार वर्ष 2006 में लिखा गया थाl लेकिन 2017 में भाजपा सांसद राधे मोहन सिंह द्वारा इस शिला पट को भी हटा दिया गया l

उन्होंने यह भी बताया कि 15 नवंबर 2016 को जिले के तमाम बड़े अधिकारी एक साथ स्वतंत्रा सेनानी बत्तख मियां के दरवाजे पर उपस्थित होकर यह घोषणा किया था l 40 बीघा जमीन बत्तख मियां के वारिसों को दी जाएगी lइसके लिए तमाम कागजात की तैयारी भी हुई थीl कुछ दिनों के बाद अधिकारी बदल गए और इरादा भी सरकार का अभी तक बदला हुआ है l

उन्होंने ये भी बताया सरकार द्वारा छथोनि थाना जिला मोतिहारी के सामने वर्ष 2004 में बत्तख मियां अंसारी मेमोरियल पुस्तकालय का निर्माण कराया गया थाl जिसका उद्घाटन शिव कुमार जिलाधिकारी और श्रीमती रामा देवी विधायक के कर कमलों द्वारा किया गया थाl पुस्तकालय मे किताब होनी चाहिएएl किताब की जगह विगत कुछ माह से ईवीएम मशीन रखी जा रही है l जिला अधिकारी का ध्यान आकर्षित कराने के बावजूद भी इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुईl मेरे द्वारा जिलाधिकारी मोतिहारी से कई बार संपर्क स्थापित किया गयाl लेकिन असफलता के बाद उप जिलाधिकारी पूजा कुमारी ने बताया कि बत्तख मियां के लोग पश्चिमी चंपारण में रहते हैं l

वहां पर कुछ भूमि मिली थी और जहां तक ईवीएम मशीन का संबंध हैl खाली पड़ी सरकार की हाल में ईवीएम मशीन रखी हुई है lजिसे अभी हटाना मुमकिन नहीं हैl

पूर्वी चंपारण मे भी बत्तख मियां अंसारी के प्रपौत्र चिराग अंसारी रहते हैंl बत्तख मियां अंसारी की पैदाइश 25 जून 1869 एवं मृत्यु 4 दिसंबर 1957 है l इनके पिता का नाम मोहम्मद अली मियां, मां का नाम रुकसाना खातून तथा इनकी स्त्री का नाम इमरा खातून है ! इन की पैदाइश ग्राम सिसवा अजगरी थाना बंजरिया मोतिहारी पूर्वी चंपारण बिहार में हुआ था l 18 वर्ष की आयु में महात्मा गांधी की जान का प्राण रक्षक बन कर अपनी तमाम खुशियों को अंधेरे में धकेल दिया था  इसी भारत में अंग्रेजों से माफी मांग कर आज भारत का सबसे बड़ा राष्ट्र प्रेमी बने हुए हैंl बत्तख मियां अंसारी के तीन लड़के थे lसबसे बड़े लड़के का नाम रशीद मियां दूसरे बच्चे का नाम शेर मोहम्मद मियां और तीसरे छोटे बच्चे का नाम मोहम्मद जान अंसारी हैl बड़े लड़के रशीद मियां के बच्चे पूर्वी चंपारण में रहते हैंl दूसरे नंबर के शेर मोहम्मद मियां और सबसे छोटे मोहम्मद जान अंसारी के बच्चे पश्चिमी चंपारण जिला के गांव एक्वा परसोनी थाना शोहदरा में निवास करते हैं l

इस संबंध में मोहम्मद वजीर अंसारी पूर्व डी जी पी छत्तीसगढ़ ने बताया कि आजादी के 70 साल बीत जाने के बावजूद भी बत्तख मियां अंसारी को इस तरह गुमनामी की दुनिया में भेज दिया गया थाl क्या कभी किसी ने सोचा है? नाथूराम गोडसे की तरह बत्तख मियां अंसारी पहले काम तमाम कर दिया होता तो वर्ष 1917 चंपारण सत्याग्रह के बाद से ही दूसरी दिशा बदल गई होती l

इसलिए महात्मा गांधी और बत्तख मियां अंसारी के संयुक्त तौर पर गंगा जमुना तहजीब को कायम रखने के लिए भारत के सभी राज्यों में केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने की जरूरत हैl समाज में नफरत न डालकर, मोहब्बत की दुनिया बसाने की जरूरत है   और प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद द्वारा घोषित की गई कृषि हेतु उनके वारिसों को उनके वारिसों को बिहार राज्य सरकार उपलब्ध कराएं नहीं तो बड़ा जग हंसाई हो रहा है राष्ट्रपति का आदेश ठंडे बस्ते में पड़ जाए फिर कोई देश के नाम नीचावर होने को तैयार नहीं होगाl इस बार तो चुनावी मुद्दा भी यह बनेगा l इसलिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तत्काल हस्तक्षेप करने की जरूरत है और सबसे दुख की बात तो यह है पिछड़ों के नाम से बनी लगभग 200 संस्थाओं मैं खासतौर पर ऑल इंडिया मोमिन कॉन्फ्रेंस ,बिहार राज्य मोमिन कॉन्फ्रेंस, अनसार मोमिन सभा ,पसमांदा महाज ,मुस्लिम पिछड़ा वर्ग कन्फर्डेशन बिहार से लेकर दिल्ली तक किसी ने इसकी तरफ ध्यान सरकार का आकर्षित नहीं कराया सिर्फ अपनी रोजी-रोटी में पड़े रहे l

24-Jun-2020

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