(पवन सिंह)

प्रियंका के निजी सचिव व प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ एफआईआर कराना सरकार का मूर्खतापूर्ण निर्णय है। कांग्रेस ने बसों को लेकर जो खेल खेला है उसमें शासन के अफसरों ने सरकार की गर्दन फंसा दी है। दरअसल कांग्रेस अपनी बनाई हुई पिच पर प्रदेश भाजपा को टास जीतकर जिस तरह से खिलवाना चाहती थी...उसी तरह से सरकार खेल रही है। सरकार को सरकार के ही अधिकारियों ने एफआईआर दर्ज करा कर कांग्रेस को अच्छा माइलेज दे दिया है। पहले यह तमाशा खड़ा किया गया कि बसों की सूची ही नहीं दी गई है। कांग्रेस   जानती थी कि सूची तो मांगी ही जाएगी, उसने झट से सूची जारी कर सरकार को तगड़ा झटका दिया। फिर कनफ्यूजियाई ब्यूरोक्रेसी इस मामले में घुसी और आदेश दिया कि सभी एक हजार बसें लखनऊ लाई जाएं यहां बसों की फिटनेस टेस्ट होगा। 

यानी बसे डीजल खर्च करके पहले 400-500 किलोमीटर चलकर लखनऊ आएं फिर एक-दो दिन बाद फिटनेस सार्टिफिकेट लेकर वापस जाएं .... यानी आने-जाने पर लाखों रूपए का डीजल फूंका जाए और तब तक लेबर आसमान टापता रहे। आज फिर कनफ्यूजियाई ब्यूरोक्रेसी को फिर ज्ञान प्राप्त हुआ कि बसें जहां हैं वहीं के राज्य के सटे हुए जिले का आरटीओ फिटनेस जारी कर देगा। फिर हड़बड़ाई  भाजपा के चंद पुरोधा प्रवक्ता पांच-सात ऐसे नंबर निकाल लाए जो बसों के नहीं थे....यानी नंबर गलत थे ....ठीक है जो नंबर गलत थे उन्हें किनारे करके बसें चलवा देनी चाहिए थीं। ... लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ...

इस बीच कांग्रेस ने लेटर-लेटर खेल खेल दिया और उसके कार्यकर्ता सड़क पर उतर गये। हमेशा की तरह इलेक्ट्रॉनिक मीडिया व प्रिंट इस पूरी खबर को अंडरप्ले कर गया लेकिन सोशल मीडिया पर खबर गर्म हो गई। वैसे भी मेन स्ट्रीम मीडिया को अब लोगों ने हाशिए पर धकेल रखा है। इसी बीच आज शाम हड़बड़ाई ब्यूरोक्रेसी ने एफआईआर दर्ज करने का निर्णय लेकर कांग्रेस को खेलने का पूरा मौका मुहैय्या करा लिया। प्रदेश सरकार के लिए अब यह मामला गले की हड्डी बन चुका है। बस लें तो मुसीबत न लें तो मुसीबत.....ऊपर से प्रियंका गांधी ने एक इमोशनल गुगली फिर डाल दी कि भाजपा चाहे तो राजस्थान सरकार की बसों पर अपना झंडा फहरा दे लेकिन वह मजदूरों पर दया करे। फिलहाल उत्तर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी ने राज्य सरकार को फंसा दिया है

द्वारा : सैय्यद कासिम 

20-May-2020

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