हमारा देश भी अजीब है ज़रा सी बात पर खुश हो जाते हैं और ज़रा सी बात पर गुस्सा भी।  कान टटोलते नहीं कौऐ के पीछे दौड़ पड़ते हैं। ऐसा ही नजारा कल शाम पांच बजे देखने को मिला। फिर उसके बाद सोशल मीडिया पर जो वीडियो आये उससे अंदाजा हो गया कि हम किस हद तक गुलाम हो चुके हैं। 
प्रधानमंत्री ने आह्वान क्या किया ऐसा लगा साक्षात आकाशवाणी हुई है। इस बेहद कठिन एवं दुखदाई घड़ी में लोग ऐसे ताली, थाली बजाने लगे जैसे कोई बड़ी जंग जीत ली हो। कुछ लोग आतिशबाज़ी करते दिखे। एक उत्सव का माहौल दिखाई दे रहा था। कोरोनावायरस से बचने की जगह सब एक जगह इकट्ठा हो गये। कोई थाली, कोई टीन, कोई सिलेंडर, कोई शटर, और हद यह है कि ड्रम पीटा जा रहा है। ये तो दिमाग की हालत है। प्रधानमंत्री ने पांच मिनट कहा था मगर अक्ल के अंधों ने जुलूस निकाल दिया। 
प्रधानमंत्री जी के ताली और थाली बजाने का आह्वान उल्टा पड़ गया क्योंकि दिन भर घरों में रहे लोग शाम 5 बजते ही इकट्ठा हुए और जश्न की शक्ल में ताली और थाली बजाना शुरू कर दिया। जबकि कोरोना से बचने के लिए एक दूसरे से उचित दूरी बनाए रखनी थी। क्या कोरोना और ज्यादा नही फैलेगा? प्रधानमंत्री की बातों को शायद ठीक से समझ नहीं सके या फिर देशभक्ति का सबूत दे रहे थे।
वैसे भी प्रधानमंत्री देश की जनता के कर्जदार हैं क्योंकि जब जब सहयोग या समय मांगा जनता ने दिया। जनता को क्या मिला???
कोई मेडिकल सुविधा नजर नहीं आ रही है। सेनेटाइजर, मास्क, या दूसरी तरह की सुविधाएं बिल्कुल नहीं है। डॉक्टर और नर्स को सुविधाएं नहीं मिल रही है तो जनता को कहां मिलेगी।
तमाम देशों की तरह कोरोना वायरस का क़हर भारत में भी फैल चुका है। इस महामारी से लड़ने के लिए हम सब एक हैं। देश का हर नागरिक खुद को और अपने देश को बचाने के लिए तैयार है। जनता कर्फ्यू के दिन सब ने पूरा सहयोग दिया। 
डाक्टर,  स्टाफ, पुलिस, इत्यादि जैसे अनगिनत लोग अपनी जान की बाज़ी लगाकर कोरोना के खिलाफ जंग मे सहयोग कर रहे हैं।
लेकिन सवाल यह है कि ताली या थाली बजाने से प्रोत्साहित नहीं कर सकते और ना ही धन्यवाद दे सकते हैं। इसके लिए जमीनी सच्चाई को स्वीकार कर कार्य करने की जरूरत है। जो सरकार को करना है। स्टेच्यू, नाम बदलना, आफिस बनाना इन सब पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए हैं। पर अब इस आपातकाल परिस्थितियों में सरकार क्या कर रही है?
सच्चाई यह है कि भारत सरकार ने कोशिश क्यों नहीं की इसे रोकने की ? बाहरी लोगों को भारत क्यों आने दिया गया? राहुल गांधी बार बार इस बात को कहते रहे मगर सरकार पप्पू समझती रही और अब चप्पू चलाने का वक़्त आ गया है।
सरकार अपने इंतजाम को क्यूं नहीं बताती।
रह रहकर सरकार ऐसे काम क्यूं करती है जिससे नुकसान हो। ताली और थाली के अलावा क्या हुआ?
मास्क और सेनीटाइजर वितरण क्यूं नहीं हो रहा है? 
हर शहर में डीएम, एमपी, एमएलए, पार्षद इनकी चेन बनाकर मुहल्ले में मास्क और सेनेटाइजर क्यूं नहीं वितरित किया जा रहा है?
सीएए और एन आर सी के खिलाफ प्रदर्शन स्थगित कर दिया गया। एक शब्द भी सरकार ने नहीं कहे। यह सब उदासीनता के लक्षण हैं।
इटली, चीन, ईरान और अमेरिका के हालात को देखने के बाद सरकार की उदासीनता चिंता का विषय है।
मेरा भारत सरकार से अनुरोध है कि जनता एवं जनता की सेवा में लगे लोगों की सुरक्षा हेतु जल्द सुविधा उपलब्ध करवाये अन्यथा जब बाज़ी हाथ से निकल जाएगी तो संभालने वाला कोई नहीं होगा।
जयहिंद।

सैय्यद एम अली तक़वी
syedtaqvi12@gmail.com

 

 

23-Mar-2020

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