प्रधानमंत्री नये नये शब्दों के जनक हैं। नोटबंदी, चौकीदार, हाउडी, झोलाछाप, फ़कीर इत्यादि। अब एक नयी उत्पत्ति हुई है जनता कर्फ्यू। 
कोरोनावायरस को देखते हुए 22 मार्च को प्रधानमंत्री ने जनता कर्फ्यू का ऐलान किया है। स्वागत योग्य कदम है। लेकिन पिछले कुछ दिनों से कर्फ्यू जैसा माहौल दिखाई दे रहा है। जो सही भी है और सबके लिए सुरक्षित भी। और शायद अभी कई दिनों तक कर्फ्यू जैसे हालात का सामना करना पड़े।
प्रधानमंत्री ने देशवासियों को संबोधित किया और कहा कि जनता से, भारतवासियों से अपील है इसका मतलब शायद प्रधानमंत्री ने मान लिया कि देश में रहने वाली जनसंख्या जनता जनार्दन है। सब देशवासी हैं।
क्या इसका मतलब यह समझा जाये कि अब सी ए ए और एन आर सी का कोई औचित्य नहीं है क्योंकि सब तो देश की जनता है। घुसपैठिए नहीं हैं। कोरोनावायरस से बचाव के जो उपाय किए जा रहे हैं वह पूरे देश में किये जा रहे हैं। सबके लिए किया जा रहा है। इसका मतलब यह है कि सब बराबर हैं। मंदिर में पूजा और मस्जिद में नमाज दोनों बंद करने की अपील की गई। इसका मतलब दोनों बराबर। अगर सब बराबर हैं तो इतना हाहाकार क्यूं?
प्रदर्शन कर रही महिलाओं के पास प्रधानमंत्री अपना प्रतिनिधि भेजें और टीवी के माध्यम से प्रदर्शन कर रहे देशवासियों से अपील करें कि सब कुछ ख़त्म ना सी ए ए और ना एन आर सी। आइये मिलकर कोरोनावायरस को खत्म करें। इसमें क्या समस्या है?
देश की सुरक्षा और उन्नति सबसे प्रमुख है। उसपर ध्यान देना जरूरी है। वैसे जो आसार दिख रहे हैं उसके अनुसार ये लाकडाउन लम्बा होने की उम्मीद है। ऐसे में जनता को परेशानी होगी। खासकर वह लोग जो प्रतिदिन कार्यों पर निर्भर हैं। जो लोग किस्तों के माध्यम से सामान खरीदते हैं और सेविंग नहीं है वह क्या करेंगे? छोटे दुकानदारों और कुआं खोद के पानी पीने वालों का क्या होगा? हालांकि उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री ने कुछ ऐलान किया है मगर वह खानापूर्ति है। क्यूंकि यह समस्या प्रादेशिक स्तर की नहीं है बल्कि देश की समस्या है। 
प्रधानमंत्री ने अर्थव्यवस्था या ख़र्च को लेकर कोई बात नहीं की। वैसे भी जब जेब में पैसा नहीं हो और घर में राशन ना हो तो सिवाय ताली, थाली और घंटी बजाने के जनता करेगी क्या?
पूरी दुनिया जिस महामारी की चपेट में है उससे सिर्फ ईश्वर बचा सकता है मगर हमें अपनी अक्ल का भी इस्तेमाल करना होगा। सुरक्षा और सतर्कता सबसे बड़ा हथियार है।
प्रधानमंत्री को सोचना चाहिए कि जो प्राइवेट संस्थान हैं, व्यक्तिगत छोटे कामगार हैं वह सब बंद हैं। जब इनकम नहीं होगी तो उसके काम कैसे होंगे। शायद भगवान प्रधानमंत्री का इम्तेहान ले रहा है। शायद भगवान ने एक मौका दिया है कि अपने वादों को पूरा करें और पन्द्रह लाख नागरिकों के खाते में डाल दें। जनता की परेशानी खत्म और आशीर्वाद अलग से, 2024 भी पक्का।
बहरहाल घर में रहें, सुरक्षित रहें, आशान्वित रहें।
पन्द्रह लाख आयेंगे, अच्छे दिन आयेंगे।
जयहिंद।

सैय्यद एम अली तक़वी
syedtaqvi12@gmail.com

22-Mar-2020

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