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छत्तीसगढ़ वन विभाग के अधिकारियो के द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार,घपले को लेकर खुलासा पोस्ट पत्रिका ने अभी बीते दिन अपने खुलासा पोस्ट न्यूज वेबपोर्टल में महासमुन्द वन मंडल के DFO आलोक तिवारी के किए गए कारनामों के बारे में खबर प्रकाशित किया था इसी क्रम में खुलासा पोस्ट पत्रिका को आलोक तिवारी के खिलाफ और भी कुछ खबर प्राप्त हुआ है जिसमें आलोक तिवारी पर वित्तीय नियम के विरूद्ध अपने करीबियों, रिश्तेदारों को कार्य आबंटन किए जाने का की खबर है आरोप है की आलोक तिवारी ने फर्जी बिलो के माध्यम से कार्य कराना तथा सामग्री खरीदी दिखाकर शासकीय धन का बंदरबाट किया है
 
खुलासा पोस्ट पत्रिका को जो डॉक्यूमेंट प्राप्त हुआ है उसमें आलोक तिवारी ने चिल्फी मे बैम्बो हट, वाटर टावर,सरोदा दादर मे वाटर टैंक टावर, पिढ़ाघाट मे पर्यटन अवास,वाच टावर एवं निर्माणघीन वनमंडल कार्यलय तथा सामग्री क्रय के समस्त प्रमाणको में यह नही बताया कि उक्त भुगतान किस मद के अंतर्गत प्राप्त बजट से किया है। इसमें क्रय नियम का पालन नही किया गया। माल किसने प्राप्त किया व किसने उपयोग किया व कहाँ उपयोग हुआ का विवरण भी नही हैं। प्रमाणक में किसी परिक्षेत्र अधिकारी या स्टोर प्रभारी का हस्ताक्षर नही हैं। अतः खरीदी में एक प्रकार से शंका है की यह फर्जी खरीदी तो नही हैं। उपरोक्त खरीदी हेतु मुख्य वन संरक्षक से अनुमति तक नही ली गई हैं।  

 
आदित्य इंटरप्राइजेस को आय मूलक मद अंतर्गत कार्य में उपयोग हेतु प्रमाणक क्र 60, 61, 178 से 181, 228 से 245 तक कुल 24 प्रमाणको में कुल 11,07,815 रू. भुगतान किया गया हैं। जबकि उक्त प्रमाणको में दिखाई गई सामग्री वनमण्डल कार्यालय कवर्धा पहुँचाया ही नही गया हैं। यह चालान से भेजा गया इसका विवरण प्रमाणको से नदारद हैं। प्रमाणकों में चालान नही भेजा गया इसका तात्पर्य हैं कि माल ही नही आया हैं।

 व्हाउचर में सामग्री कहाँ उपयोग होगी उसका भी उल्लेख नही हैं। व्हाउचर में एस.डी.ओ. फॉरेस्ट का काउण्टर साइन होता हैं जो सत्यापन कार्य कहलाता हैं। व्हाउचरो में खासकर आदित्य इंटरप्राइजेस के वहाउचरो में काउण्टर साइन नही हैं। सत्यापन अधिकारी यह सत्यापन करता हैं कि बिल में उल्लेख के अनुसार माल हैं, मात्रा हैं एवं बिल में उल्लेख राशि भुगतान योग्य हैं। यह सत्यापन करता हैं। प्रमाणको में उपरोक्त सत्यापन नही हैं और न ही किसी परिक्षेत्र अधिकारी, डिप्टी रेंजर, वनरक्षक और न ही वनमण्डल कार्यालय के स्टोर शाखा-प्रभारी के ही हस्ताक्षर हैं। ऐसी स्थिति में प्रमाणक पूर्णताः फर्जी होने की आशंका प्रदर्षित करती हैं। उक्त संस्था से 11 लाख से ऊपर की खरीदी की गई जिसमें क्रय नियम का पालन भी नही किया गया। उपरोक्त खरीदी हेतु मुख्य वन संरक्षक से अनुमति नही ली गई ।
 
आदित्य इंटरप्राईजेस, रायपुर और अन्य के द्वारा अभ्यारण क्षेत्र के चिल्फी में एक बैम्बो हट, पानी टंकी टावर तथा पीढ़ाघाट में एक वाचटावर एवं पर्यटक आवास साथ ही सरोदा दादर में पानी टंकी टावर निर्माण कराया गया। सभी  कार्यो की लागत की कुल राशि 19 लाख 32 हजार के ऊपर भुगतान किया गया हैं। व.म.अ. के द्वारा परिक्षेत्र चिल्फी में बन रहे बैम्बो हट में लगने वाली समस्त सामग्रियों को वन प्रबंधन समिति चिल्फी के द्वारा नगद खरीदी की जा रही हैं, जिसकी अनुमति स्वयं श्री आलोक तिवारी देते हैं, जबकि उन्होने ही अपने रिश्तेदार की संस्था/फर्म को उक्त कार्य बिना निविदा के दिया हैं और उनसे अपने मार्ग दर्शन में कार्य कराया जा रहा हैं और नगद भुगतान भी कराया जा रहा हैं। व.म.अ. के द्वारा वन प्रबंधन समिति चिल्फी के माध्यम से बनाए गए बैम्बो हट के सामग्रियो का भुगतान समिति से कराने के बाद भी उन्ही सामग्रियों का आय मूलक मद के अंतर्गत पुनः खरीदी बताई जाकर 08 लाख 42 हज़ार रू. के प्रमाणक बनाकर भुगतान बताया गया। जबकि इन प्रमाणको को 8483-109 नदीघाटी मद में चार्ज किया गया हैं। 
 
व्हाउचर क्र. डी.एल 197, 196, 198, 199, 200, 201 दि. मार्च 2016 मे. आर के इंटरप्राइजेस कैनन इमेज स्क्वायर लोअर ग्राउंड फ्लोर सिटी सेंटर, मालपण्डरी रायपुर से 2,33,985 रू. की सामग्री खरीदी की गई। व्हाउचर में सामग्री का नाम स्पष्ट होना चाहिए। किस मद, किस हेड से यह सामग्री खरीदी जा रही हैं व्हाउचर में हेड/मद का उल्लेख नही हैं। सी.सी.एफ. का आबंटन क्र. भी नही हैं। उपरोक्त खरीदी हेतु मुख्य वन संरक्षक से अनुमति नही ली गई हैं।मे. आर के इंटरप्राइजेस कैनन इमेज स्क्वायर लोअर ग्राउंड फ्लोर सिटी सेंटर, मालपण्डरी रायपुर के द्वारा बिल नं. 725 दि. 16.02.16 को जारी किया गया हैं इसके बाद बिल नं. 726 को 15.02.16 को जारी किया गया हैं। यह कैसे संभव हैं कि किसी बिल के जारी होने के बाद के बिल की दिनांक 01 दिन पूर्व जारी किया जा सकता हैं। इसी प्रकार बिल नं. 727, 728, 729 में भी इसी प्रकार की भिन्नता हैं जो कि अपने आप में बिल का फर्जी होना व्यक्त करता हैं। इसके अतिरिक्त इन प्रमाणको में किसी भी माल प्राप्ति अधिकारी के हस्ताक्षर या चालान पावती नही हैं।  
 
हरजिन्दर सिंह भाटिया डोंगरगढ़ के द्वारा सप्लाई सामग्री का व्हाउचर क्र. डी.एल. 208 दि. मार्च 2016, व्हाउचर क्र. डी.एल. 209,210,211, 88 में 1,15,500 रू. का लोहे का श्लोग्न प्लेट "6x8" इंच का टिने का प्लेट हैं जिसका बाज़ार में वास्तविक मूल्य 50 रू. हैं। जिसे 550 रू. में प्रति नग के दर से वनमण्डल अधिकारी द्वारा खरीदा गया हैं। क्रय एवं भण्डार नियम 2002 का पालन नही हुआ हैं। एक व्यक्ति संस्था को कमीशन के लिए 50 रू. के प्लेट को 550 रू. में प्रति प्लेट खरीदा गया। उपरोक्त खरीदी हेतु मुख्य वन संरक्षक से अनुमति नही ली गई ।
 
व्हाउचर क्र. डी.एल. 88 दि. मार्च 2016 बिल क्र. 31 हरजिन्दर सिंह भाटिया डोंगरगढ़ के प्रमाणक में बोड का बिल/व्हाउचर में साइज लिखा हैं "3x4x10" लिखा हैं। टिने का बोड सिर्फ लंबाई चौड़ाई होती हैं। यहाँ पर बिल में "3x4x10" लिखा हैं। टिन का बोड हैं इसकी वास्तविक कीमत 3000 रू. हैं। इसे ऊँचे दर पर 11500रू. में खरीदा गया हैं। क्रय एवं भण्डार नियम का पालन नही हुआ है। एक तरफा खरीदी हैं।  हरजिन्दर सिंह भाटिया डोंगरगढ़ के द्वारा सप्लाई सामग्री का व्हाउचर क्र. 89, 90, 91 माह मार्च 2016 में 1,14,450 रू. के बिल के साथ चालान नही हैं। माल वनमण्डल आया ही नही हैं। डामर टिन - काला पेन्ट होता है। 76 रू. प्रति लीटर में काला पेन्ट खरीदी किया गया हैं। प्रिंस स्टील्स, कवर्धा से व्हाउचर क्र. 123 दि. मार्च 2016 को 193रू. में काला पेन्ट खरीदी किया गया हैं। वित्तीय वर्ष 2015-16 में रंग/पेन्ट का टेंडर किया ही नही गया हैं। माल किसने प्राप्त किया व किसने उपयोग किया व कहाँ उपयोग हुआ का विवरण भी नही हैं। प्रमाणक में किसी परिक्षेत्र अधिकारी या स्टोर प्रभारी का हस्ताक्षर नही हैं। अतः खरीदी में शंका हैं कि फर्जी खरीदी तो नही हैं। उपरोक्त खरीदी हेतु मुख्य वन संरक्षक से अनुमति नही ली गई हैं।
 
व्हाउचर क्र. 133, 134 माह मार्च 2016 में सुखमन ट्रेडर्स, डोंगरगढ़ से 40रू. का आइल चाक 140रू. पैकेट के ऊँचे दर पर 44,100 रू. की खरीदी किया गया। माल किसने प्राप्त किया व किसने उपयोग किया व कहाँ उपयोग हुआ का विवरण भी नही हैं। प्रमाणक में किसी परिक्षेत्र अधिकारी या स्टोर प्रभारी का हस्ताक्षर नही हैं। अतः खरीदी में शंका हैं कि फर्जी खरीदी तो नही हैं।
माह मार्च 2016 के व्हाउचर क्र. डी.एल. 126 से 132 तक कुल 07 प्रमाणको से  प्रेम साउण्ड, रायपुर से कुल 2,82,750 रू. का साउण्ड सिस्टम खरीदी किया गया। 

प्रमाणक में वनमण्डल के अंतर्गत काष्ठागारों में नीलाम कार्य एवं विभागीय प्रषिक्षण उपयोग हेतु साउण्ड सिस्टम खरीदना बताया गया है। जबकि समस्त काष्ठागार में पूर्व से ही साउण्ड सिस्टम लगे हुए हैं। उपरोक्त खरीदी आंशिक रूप से की गई अन्य प्रमाणक का भुगतान बंदरबाट हेतु किया गया प्रतीत होता हैं। इसमें भी माल किसने प्राप्त किया व किसने उपयोग किया व कहाँ उपयोग हुआ का विवरण नही हैं। प्रमाणक में किसी परिक्षेत्र अधिकारी या स्टोर प्रभारी का हस्ताक्षर नही हैं।
 
व्हाउचर क्र. डी.एल. 13, 14, 15, 21 व 23 से 30 दि. मार्च 2016 तक कुल 12 प्रमाणको से बंषी सेल्स, धमतरी से 5,02,621 रू. का जेन्ट्स यूरिनल सेंसर तथा वाल टाइल्स इत्यादि खरीदी की गई। इसमें भी क्रय नियम का पालन नही किया गया। प्राइमर सेल्स कार्पोरेशन ऑफिस, देहरादुन को बिल क्र. 109 दि. 03.03.16 में उल्लेखित 12 नग ट्राइल कैमरा 12775 के प्रति दर से 1,76,245 रू. भुगतान किया गया जबकि यह कैमरा फील्ड में लगे ही नही हैं। 
 
माह मार्च 2016 के व्हाउचर क्र. डी.एल. 50, 48, 49, अरोरा बोरवेल्स एण्ड पम्प स्टोर्स, कवर्धा से 137140 रू एवं व्हाउचर क्र. डी.एल. 55 उत्तम चंद जैन, राजनांदगांव से 55,097 रू. की रेत एवं फ्लाई एक्स ब्रिक्स खरीदी गई हैं जिसमें रॉयल्टी पर्ची नही लगाई गई हैं, न ही रॉयल्टी काटी गई हैं और न ही वैट टैक्स काटे बगैर पूरा भुगतान किया गया है। वनमण्डल कार्यालय के प्राकलन एवं स्टीमेट बनाने का प्रमाणक क्र. 56, 57 माह मार्च 2016 के माध्यम से 50,000 रू. अपने मित्र आनंद खादिया, रायपुर को भुगतान करना भी शंकास्पद हैं। क्योंकि आज भी उक्त प्राकलन बनाने का कोई भी आर्किटेक्ट 05 से 07 हज़ार रू. में बनाकर दे सकता हैं। इतना रूपये भुगतान करना भ्रश्टाचार के आचरण में आता हैं। 
 
मेसर्स इम्प्रेसिव एडवरटाइजिंग सर्विस, रायपुर से व्हाउचर क्र. 140 माह मार्च 2016 से वन प्रबंधन समितियों के संबंध में संयुक्त वन प्रबंध आकार लेते सपने नामक बंक संबंधी 350 बुक प्रति बुक 800 रू. की दर से 02 लाख 80 हज़ार रू. की बुक छपाई कराई गई तथा प्रमाणक क्र. 139 से 01 लाख 72 हज़ार रू. की छपाई कराई गईं। अर्थात् दो प्रमाणको से कुल  04 लाख 52 हज़ार रू. की पुस्तक छपाई कराई गई जो कि सिर्फ कागजो में हैं तथा इसके लिए नियमानुसार टेंडर आहूत नही की गई। प्रमाणक में दर्षित भुगतान बंदरबाट हेतु किया गया हैं। प्रमाणक में माल किसने प्राप्त किया व किसने उपयोग किया व कहाँ उपयोग हुआ का विवरण भी नही हैं। प्रमाणक में किसी परिक्षेत्र अधिकारी या स्टोर प्रभारी का हस्ताक्षर नही हैं। 
 
यूँ तो डी.एफ.ओ. आलोक तिवारी पर अभी कई गंभीर आरोप है और इन्ही कारनामों को खुलासा पोस्ट पत्रिका क्रमशः प्रकाशित कर रही है अभी आलोक तिवारी के खिलाफ खुलासा पोस्ट और भी खुलासे करने वाली है और भविष्य में अपने आने वाले अंक में भी वन विभाग के अधिकारियो के काले-पीले कारनामों की एक सीरिज प्रकाशित करने वाली है। 

 
                               ( लोकतंत्र कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ए.एस.करीम खान के द्वारा दी गई जानकारी  अनुसार )
30-Aug-2017

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