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छत्तीसगढ़ राज्य का वन विभाग जिसके दर्ज़नो अधिकारी भ्रष्टाचार में डूबे हुए है, खुलासा पोस्ट न्यूज़ नेटवर्क के द्वारा इन अधिकारियो की भ्रष्ट काली कमाई का खुलासा किया जा रहा जिसे हमारे द्वारा क्रमशः प्रस्तुत किया जा रहा है इसी कड़ी में कवर्धा में पदस्थ रहते हुए भारतीय वन सेवा के अधिकारी आलोक तिवारी द्वारा नियम विरुद्ध किये गए भ्रष्टाचार को हम जनता के सामने ला रहे जिसके समस्त दस्तावेज उपलब्ध है आज उसी कड़ी में आगे..

"भ्रष्टाचार के साथ-साथ सर्विस टैक्स की चोरी "
 
भोरमदेव अभ्यारण्य क्षेत्र के अंतर्गत कवर्धा एवं चिल्फी परिक्षेत्र में भारत सरकार वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, एन.टी.आर. (नेशनल टाइगर रिज़र्व) सहित अभ्यारण्य क्षेत्रो के बनाए गए नियम के विरूद्ध अभ्यारण्य क्षेत्रो में पिछले 3 सालों में जे.सी.बी. से तालाब खुदाई व ट्रेक्टरो से ढुलाई, जुताई कार्य बेधड़क तरीके से कराये गए हैं। 
 
इन क्षेत्रो में जे.सी.बी. एवं ट्रेक्टरो से करोड़ो के कार्य कराये जा रहें हैं जो कि सिर्फ कागजो पर होते हैं, जमीन पर इनके निशान भी नही होते। इसका कारण यह हैं कि जे.सी.बी. मालिको को फर्जी बिल देने से कोई फर्क नही पड़ता। जबकि नियमानुसार जे.सी.बी. से कार्य किये जाने के उपरांत विभाग से लिये गए भुगतान को सर्विस टैक्स के अंतर्गत माना जाता हैं तथा दिए गए सर्विस के एवज में जे.सी.बी. मालिको को वाणिज्यिक कर विभाग को 18% सर्विस टैक्स अदा करना होता हैं जो कि ये अदा नही करते तथा इसे इंकम विवरण में भी षामिल न कर इंकम टैक्स विभाग को इंकम टैक्स अदा नही करते हैं, कार्य कराने के पश्चात् वन विभाग के द्वारा प्रमाणक बनाये जाने पर इनके द्वारा प्रस्तुत बिल के भुगतान में से सर्विस टैक्स काटकर भुगतान किया जाना चाहिये जो कि डी.एफ.ओ. के द्वारा नही किया गया हैं।
 
भोरमदेव प्रमाणक क्र. डब्लू एल 37 से 49 माह 12. 2016 में कुछ भी गणना कर दिया गया हैं, व्हाइड्स की गणना कहाँ हैं। 50 हज़ार से कम 48 हज़ार का प्रमाणक बनाकर फर्जी प्रमाणक को सही दिखाने का प्रयास किया गया हैं। प्रमाणक क्र. डब्लू एल 37 से डब्लू एल 49 तक की कुल राशि 4,91,000 हैं। यानी 4,91,000 का भुगतान प्रमाणको में कुछ भी गणितीय गणना सही नही हैं। स्पष्ट हैं कि क्षेत्र में कोई भी माप नही किया गया हैं। प्रमाणक में इसलिये पेज क्रमांक का विस्तृत विवरण नही हैं। क्या एकदम प्लेन सरफेस काटकर मेंड बनाया गया हैं, कम से कम लंबाई चौड़ाई दो नाप होना ही चाहिये, पूरा प्रमाणक फर्जी हैं।
 
भोरमदेव अभ्यारण्य  परिक्षेत्र चिल्फी के प्रमाणक क्र. सी. एल. 04 माह 10.2016 में व्हाइड्स कटौती लिख भर दिया गया है, गणना नही की गई हैं। साफ़ हैं कि कोई कटौती नही की गई हैं 20 प्रतिशत व्हाइड्स की ढुलाई नही हुई हैं। 120 घ.मी. का 20 प्रतिशत व्हाइड = 24 घ.मी. / 154.70 = 3712.80 राशि वसूली योग्य हैं। जे.सी.बी. के 12 घण्टे में यानी 5 ट्रिप से ज्यादा प्रति घण्टा ढुलाई क्या यह संभव हैं? 12 घण्टे में जे.सी.बी. से 65 ट्राली वह भी मात्र 120 घ.मी. ढुलाई करेगी। यह पूर्णतः फर्जी कारोबार हैं। 
 
उसी प्रकार प्रमाणक क्र. सी. एल. 05 माह 10. 2016 में व्हाइड्स कटौती लिख भर दिया गया है, इसमें भी गणना नही की गई हैं। साफ़ हैं कि कोई कटौती नही की गई हैं और न ही 20 प्रतिशत व्हाइड्स की ढुलाई हुई हैं। 420 घ.मी. का 20 प्रतिशत व्हाइड = 84 घ.मी. / 154.70 = 12994.80 राशि वसूली योग्य हैं। जे.सी.बी. से 5 1/2 ट्रिप से ज्यादा प्रति घण्टा ढुलाई हास्यपद हैं। 42 घण्टे में जे.सी.बी. से 229 ट्राली वह भी मात्र 420 घ.मी. ढुलाई करेगी। यह भी पूर्णतः फर्जी प्रतीत होता हैं।
 
उसी प्रकार प्रमाणक क्र. सी. एल. 06 माह 10.2016 में व्हाइड्स कटौती लिख भर दिया गया है, 392 घ.मी. का 20 प्रतिशत व्हाइड = 78.40 घ.मी. / 154.70 = 12128.48  राशि वसूली योग्य हैं। जे.सी.बी. से 5.61 ट्रिप से ज्यादा प्रति घण्टा ढुलाई हास्यपद हैं। 39 घण्टे में जे.सी.बी. से 216 ट्राली वह भी मात्र 392 घ.मी. ढुलाई करेगी।
 
उपर्युक्त समस्त जे.सी.बी. से खुदाई एवं ट्रेक्टर से ढुलाई कार्यो के प्रमाणक की राशि जान-बुझ कर छ.ग. भण्डार क्रय नियम के घेरे में न आए इस हेतु 50 हज़ार रू. से कम के रखे गए हैं। समस्त प्रमाणको एवं जे.सी.बी. ट्रेक्टर मालिको के बिलो का अवलोकन करने से साफ़ होता हैं कि लाखो के कार्यो के भुगतान को अलग-अलग दिनांक में जारी करवाया गया हैं। जबकि समस्त कार्यो हेतु जे.सी.बी से खुदाई के लिए टेंडर आहूत किये जाने पर यह कार्य बहुत ही कम दाम पर हो सकते थे।

रेंजर को अग्रिम एफ.ए. (फॉरेस्ट एडवांस) लिखा गया हैं, वह कैसे जब डी.डी.ओ. प्रमाणको को पास कर रहें हैं और रेंजर को भुगतान का आदेश दे रहें हैं। फिर एफ.ए. (फॉरेस्ट एडवांस) डी.डी.ओ. यानी डी.एफ.ओ. कैसे बता रहें हैं यानी अपना दामन बचाने। अब नियम बदल चुका हैं पहले रेंजर प्रमाणक जमा करने के साथ एफ.ए. (फॉरेस्ट एडवांस) भरकर उतनी ही राशि एफ.ए. (फॉरेस्ट एडवांस) के स्वयं में भेजते थे। अब ऐसा नह हैं, अब डी.एफ.ओ पूरी छानबीन करता हैं, एस.डी.ओ. प्रमाणक लेकर क्षेत्र में जारी कार्य हुआ हैं या नही, कितनी मात्रा में हुआ हैं चेक कर डी.एफ.ओ. को अनुशंसा कर भुगतान करने लिखता हैं। डी.एफ.ओ. रेंजर को प्रमाणक पास कर देता हैं और राशि बैंक में रेंजर के खाते में जो उसका निजी खाता होता हैं उसमें राशि जमा करा देता हैं।

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बिल क्र. 74 दिनांक 11.11.16 के उपरांत बिल क्र. 77, 85, 93 को पिछली तारीखों पर जारी किया जाना भ्रष्टाचार के संकेत देता है बिल नं. 74 के उपरांत जारी बिल फर्जी हैं जिसकी राशि लगभग 54 हजार फर्जी बिल के माध्यम से राशि निकाली गई।  ठीक उसी तरह बिल नं. 313 दि. 23.11.16 के उपरांत बिल नं. 314, 315 पिछली तारिखो पर जारी किया गया जिसकी राशि लगभग 79 हजार फर्जी बिल के माध्यम से राशि निकाली गई।
 
चिल्फी प्रमाणक क्र. सी 84 माह 09.2016 में श्रमिको से कार्य क्यों नही कराया गया? किस ट्रेक्टर ने कितना कार्य किया अलग-अलग नही हैं, फिर भुगतान सिर्फ एक आदमी सौखीराम को क्यों? क्या सारे ट्रेक्टर का ओनर वही हैं? भुगतान फर्जी हैं।  चिल्फी प्रमाणक क्र. सी 86 से 90 माह 09.2016 में कोई व्हाइड्स कटौती की गणना नही की गई हैं। 50000 से ऊपर का काम टेंडर द्वारा क्यो नही? कुल कार्य राशि 313300रू. फिर भी टेंडर नही या फिर मजदूरो से कार्य क्यों नही कराया गया?
 
भोरमदेव प्रमाणक क्र. डब्लू एल 01 माह 09.2016 में R.E.S के दरो पर कार्य नही हुआ हैं। श्री माँ इंटरप्राइजेस, बिलासपुर सामग्री (विद्युत सामग्री) बिक्री करता हैं न कि कार्य भी कराता हैं। भोरमदेव प्रमाणक क्र. डब्लू एल 04 माह 09.2016 में अरूण इलेक्ट्रीकल्स, बिलासपुर के बिल क्र. 146 दि. 17.07.16 द्वारा 7404 रू. की खरीदी के लिए क्या कोटेशन स्वीकृत हैं। वनमण्डलाधिकारी का स्वीकृति क्रमांक नही हैं। भोरमदेव प्रमाणक क्र. डब्लू एल 14, 15, 16 माह 09.2016 में कोटेशन स्वीकृत नही हैं। डी.एफ.ओ. का स्वीकृति क्रमांक टिन नं. का बिल नही हैं। भोरमदेव प्रमाणक क्र. डब्लू एल 20 माह 09.2016 में रूपलाल साहु को गिट्टी सप्लाई का टेंडर ऑर्डर नही हैं। 
 
भोरमदेव प्रमाणक क्र. डब्लू एल 12 से 17 माह 11.2016 में ग्राउंड लेबल ही दर्ज नही हैं। इसलिए घाट कटिंग की मात्रा फर्जी हैं मेजरमेंट दर्ज ही नही हैं। भोरमदेव प्रमाणक क्र. डब्लू एल 22, 23 माह 11.2016 में कितनी मात्रा में कार्य किया गया कोई विवरण नही हैं, सर्विस टैक्स भी नही काटा गया हैं। व.म.अ. ने ऐसा फर्जी प्रमाणक कैसे पास कर दिया। भोरमदेव प्रमाणक क्र. डब्लू एल 27 से 30 माह 11.2016 में बताए गए स्थान पर बोर्ड नही लगा हैं। ब्ैत् दर पर बोर्ड का रेट भी नही हैं। बाबा रेडियम पाइंट ओल्ड बस स्टैण्ड, दुर्ग के बिल क्र. 16 से 19 दि. 21.10.16 की राशि क्रमशः 17500, 35000, 35000, 35000 कुल राशि 122500रू. की खरीदी एक ही दिन में एक ही फर्म से की गई, टेंडर क्यों नही निकाला गया। व.म.अ. भुगतान क्यों नही किया प्रमाणक पूरा फर्जी हैं। जाँच का विशय है।
 
भोरमदेव प्रमाणक क्र. डब्लू एल 41 से 44 माह 11.2016 में कपूर चंद ठाकरे, बम्हनी टिन नं. का बिल ही नही हैं। ईट, सीमेंट, गिट्टी, रेत का टेंडर इनके नाम पर नही हैं फिर इनके बिल में भुगतान कैसे? किया गया। क्या श्री ठाकरे के  भाजपा मंडल के अध्यक्ष होने के कारण बिल नं. 474, 478, 480 एवं 482 में दर्शायी राशि के कार्य बिना टेंडर के उन्हें दिए गए और उनके प्रभाव के कारण ही उन्हें नगद भुगतान भी किया गया।  भोरमदेव प्रमाणक क्र. डब्लू एल 49 माह 11.2016 में टिन नं. का बिल नही हैं।
 
भोरमदेव प्रमाणक क्र. डब्लू एल 53 माह 11.2016 में बिना टेंडर वाले को 15600रू. का भुगतान बिना टिन नं. बिल से किया गया। भोरमदेव प्रमाणक क्र. डब्लू एल 54, 55 एवं 56 माह 11.2016 में सीमेंट, रेत, गिट्टी, ईट का कोई भी टेंडर इस आदमी के नाम पर नही हैं। भोरमदेव प्रमाणक क्र. डब्लू एल 64 माह 11.2016 में 6000 की सीमेंट बोरी बिना टिन नं. बिल द्वारा जारी किया गया। भोरमदेव प्रमाणक क्र. डब्लू एल 69 एवं 70 माह 11.2016 में क्रमश: राशि 40500 एवं 24000रू. के भुगतान का कोई विवरण, मात्रा दर्ज नही हैं, सर्विस टैक्स भी नही काटा गया हैं।
 
भोरमदेव प्रमाणक क्र. डब्लू एल 72 एवं 73 माह 11.2016 में बिल नकली हैं कोई गणितीय गणना कार्य के एवज में नही की गई हैं एवं कार्य का मेजरमेंट ही नही हैं। भोरमदेव प्रमाणक क्र. डब्लू एल 91 माह 11.2016 में 17300रू. का कोई मापन मेजरमेंट नही हैं। भोरमदेव प्रमाणक क्र. डब्लू एल 92 माह 11.2016 में 32400रू. का नगद भुगतान किया गया तथा इसका भी कोई मापन नही हैं। भोरमदेव प्रमाणक क्र. डब्लू एल 28 माह 10.2016 में अरोरा बोरवेल्स एण्ड पम्प स्टोर्स, कवर्धा ने सीमेंट का टेंडर नही लिया हैं फिर उससे कैसे सीमेंट खरीदी की गई। व.म.अ. ने स्वीकृति कैसे दे दिया।
 
भोरमदेव प्रमाणक क्र. डब्लू एल 30 माह 10.2016 में सप्लाई गिट्टी, रेत, मुरूम का सीधे-सीधे घ.मी. की खरीदी दिखई गई हैं जबकि उपरोक्त सामग्री किसी न किसी वाहन से लाया गया होगा उस वाहन एवं सामग्री का मेजरमेंट दर्शाने के उपरांत ही व्हाइड काटी जाती हैं तत्पश्चात व्हाइड की गणना कर प्रमाणक में दर्शाया जाने के उपरांत ही प्रमाणक की भुगतान की जानी चाहिये, परन्तु यहाँ व्हाइड्स की गणना मापक में हैं ही नही फिर वन अधिकारी कैसे जाने कि जा मात्रा प्रमाणक में बताई गई हैं सिर्फ उतनी ही मात्रा उन्हें प्राप्त हुई है। अतः उपरोक्त सामग्रियों में 20 प्रतिशत व्हाइड वसूल की जाए। इसके अतिरिक्त मैं यह भी बता दूँ कि रेत, मुरूम का टेंडर अरोरा को मिला ही नही हैं फिर कैसे उससे क्रय किया गया।
 
भोरमदेव प्रमाणक क्र. डब्लू एल 43 माह 10.2016 में व्हाइड्स काटने का विवरण ही नही हैं। भोरमदेव प्रमाणक क्र. डब्लू एल 45, 47 एवं 49 माह 10.2016 में अरोरा बोरवेल्स एण्ड पम्प स्टोर्स, कवर्धा के मूल बिल में व्हाइड्स का विवरण बिल प्राप्तकर्ता ने दर्ज नही किया हैं बल्कि दूसरी हैंड राइटिंग में फर्जी दर्ज किया गया हैं, इसका विवरण नही हैं।
 
भोरमदेव प्रमाणक क्र. डब्लू एल 61, 62 एवं 63 माह 10.2016 में चालान क्रमांक 753, 754 एवं 755 को ही बिल बनाकर भुगतान दर्शा दिया गया हैं। फर्नीचर क्रय लघु उद्योग नियम से स्वीकृत अधिकृत दुकान से क्रय नही किया गया हैं, यह अवैधानिक हैं। भोरमदेव प्रमाणक क्र. डब्लू एल 85, 88, 89, 92, 93, 96, 97, 100, 101, 104, 105 एवं 107 में ट्रेक्टर से की गई मिट्टी ढुलाई में व्हाइड्स काटने का कोई प्रमाण नही हैं, गणितीय व्याख्या ही नही हैं अतः वसूली के योग्य हैं। सभी प्रमाणको का मेजरमेंट बुक में इंट्री ही नही हैं अतः प्रमाणक फर्जी हैं, प्रमाणको में कोई ब्यौरा नही हैं।
 
चिल्फी अभ्यारण्य के प्रमाणक क्र. सी. एल. 40 माह 12.2016 में षासकीय स्वीकृत दर से कार्य नही कराया गया हैं। संलग्न बिल टैक्स पेड नही हैं भोरमदेव प्रमाणक क्र. डब्लू एल 10 एवं 11 माह 08.2016 में कोटेशन नही हैं, बिना कोटेशन स्वीकृति के खरीदी की गई हैं। व.म.अ. ने स्वीकृति कैसे दे दिया।
 
आप कब तक ख़ामोश रहेंगें माननीय मन्त्री महोदय ये प्रजातंत्र है ,जनता ने आपको चुन कर मंत्री बनाया है आपको इन भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही तो करनी ही पड़ेगी आप और आपकी सरकार नहीं करेगी तो विपक्ष विधानसभा में न्याय के लिए आवाज़ उठाएगा वहाँ न्याय नहीं मिलेगा तो न्यायपालिका से याचना करेंगें कहीं तो न्याय जरूर मिलेगा हम आपको आपका शपथ याद दिलाते है जो कि आपने नामांकन भरने से लेकर मन्त्री बनने तक लिया था शायद आपकी अन्तर्रात्मा जागे  वन मंत्री जी, भारत के संविधान के तहत आपने मंत्री पद की शपथ लेते हुवे कहा है कि.. 
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लेकिन आप इनसे दूर अपने अनुराग स्वार्थ, द्वेष पक्षपात के साथ काम कर रहें है।

                                       ( 
लोकतंत्र कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ए.एस.करीम खान के द्वारा दी गई जानकारी  अनुसार )
30-Aug-2017

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