सैय्यद एम अली तक़वी (syedtaqvi12@gmail.com)

आज 10 जनवरी का दिन सभी देशवासियों और हिन्दी प्रेमियों के लिए खास है क्योंकि आज के दिन पूरे विश्व में हिन्दी दिवस मनाया जाता है। विश्व हिन्दी दिवस की शुरुआत सन 2006 में हुई थी जब उस वक्त के तात्कालीन प्रधानमंत्री कांग्रेस के डॉ मनमोहन सिंह ने विश्व हिन्दी दिवस मनाने की घोषणा की थी उसी के बाद से यह प्रथा चलन में आई और अब हर साल 10 जनवरी को विश्व हिन्दी दिवस मनाया जाता है। इससे पहले सन 1975 में पहली बार आयरन लेडी श्रीमती इंदिरा गांधी के नेतृत्व में वर्ल्ड हिंदी कांफ्रेस का आयोजन किया गया था। इसके बाद भारत मॉरिशियस, यूके,यूएस में इसका आयोजन होने लगा।

विश्व हिन्दी दिवस मनाने के पीछे मकसद क्या है? इसका एकमात्र उद्देश्य हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना है। मगर विश्व स्तर पर इसे बढ़ाने के लिए पहले अपने देश में हिंदी को बढ़ावा देने की जरूरत है क्योंकि आज अगर देखा जाए तो हमारे देश में ही हिंदी प्रतिबंधित होती जा रही है। हर प्रदेश अपनी प्रादेशिक भाषा पर जोर देता है और अगर अलग अलग राज्यों में जैसे महाराष्ट्र, बंगाल, चेन्नई इत्यादि में हिंदी बोलता हुआ कोई नज़र आ जाता है तो उसे बेवकूफ समझा जाता है। यह कटु सत्य है। यहां हिंदी दिवस भी मनाया जाता है जो विश्व हिंदी दिवस से बिल्कुल भिन्न है। हिंदी दिवस भारत में 14 सितंबर को मनाया जाता है। इस दिन 1949 को संविधान सभा ने पहली बार आधिकारिक भाषा के तौर हिंदी को अपनाया था। वहीं विश्व हिंदी दिवस का मुख्य उद्देश्य इसे विश्व स्तर पर पहचान दिलाना है।

हिंदी पूरी दुनिया में अपनी पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है। दुनिया के 30 से अधिक देशों में हिंदी पढ़ी-पढ़ाई जाती है। लगभग 100 विश्वविद्यालयों में उसके लिए अध्यापन केंद्र खुले हुए हैं। भारत के अलावा मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम, गुयाना, त्रिनिदाद एवं टोबैगो और नेपाल में भी हिंदी बोली जाती है। अमेरिका जैसे देश में भी लगभग 150 से ज्यादा शैक्षणिक संस्थानों में हिंदी पढ़ाई जा रही है। 2016 में डिजिटल प्लेटफार्म पर हिंदी भाषा में समाचार पढ़ने वालों की संख्या 5.5 करोड़ थी, जो 2021 में बढ़कर 14.4 करोड़ के आसपास पहुंच जायेगी। दक्षिण प्रशांत महासागर क्षेत्र में फिजी नाम का एक द्वीप देश है, जहां हिंदी को आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया गया है।

सिर्फ़ अपने ही देश में कुछ लोग क्षेत्रीय राजनीति करने के चक्कर में हिंदी को दबाने में लगे हैं। हालांकि बड़े बड़े महापुरुषों ने हिंदी की तारीफ की और महत्व को बताया है। भारत में 66 फीसदी लोग हिंदी बोलते हैं, जबकि 77  प्रतिशत लोग इसे समझ लेते हैं। डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने कहा था कि जिस देश को अपनी भाषा और साहित्य के गौरव का अनुभव नहीं है, वह उन्नत नहीं हो सकता। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था कि हिंदी का प्रश्न स्वराज्य का प्रश्न है'। 
लाल बहादुर शास्त्री ने भी हिंदी के महत्व को समझाते हुए कहा था कि हिन्दी पढ़ना और पढ़ाना हमारा कर्तव्य है। उसे हम सबको अपनाना है। आज हमें हिंदी के महत्व को समझना होगा और इसको बढ़ाने का प्रयास करना होगा।

 

10-Jan-2020

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