सैय्यद एम अली तक़वी

आतंकवाद क्या है और आतंकवादी कौन है एक बार फिर अफगानिस्तान हादसे से इसे समझने की जरूरत है। आतंकवाद एक प्रकार की हिंसात्मक गतिविधि होती है। अगर कोई व्यक्ति या कोई संगठन अपने आर्थिक, राजनीतिक एवं विचारात्मक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए देश के नागरिकों की सुरक्षा को निशाना बनाए, तो उसे आतंकवाद कहते हैं। राजनीतिक एवं वैचारिक हिंसा भी आतंकवाद की ही श्रेणी में आती है। अगर इसी प्रकार की गतिविधि आपराधिक संगठन चलाने या उसे बढ़ावा देने के लिए की जाती है तो वह भी आतंकवाद है। अफगानिस्तान में एक हमलावर द्वारा अपने को बारुद बांधकर उड़ा कर एक तबाही मचा दी। सवाल वही कि आखिर क्या मिला? अपने आप को मुसलमान कहने वाले इन जाहिलों को जन्नत की हूरें तो न मिली बल्कि इसके जिस्म का सूरमा  बन गया।

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काबुल अफगानिस्तान में एक शादी समारोह में बम विस्फोट करके 63 शिया मुसलमानो को शहीद कर दिया और 120 से अधिक घायल हो गए। किसी को अफसोस नहीं हुआ। आत्मा मर चुकी है। इंसान खोखला हो चुका है। शर्म, हया, इंसानियत सब खत्म हो चुका है। लोग सच्चाई की पहचान करना भूल गए हैं। पूरी दुनिया में खामोशी क्यूं है?  दुनिया में एक आदमी के मरने पर सारी दुनिया का मीडिया चीख चीख कर आतंकवाद के खिलाफ आवाज उठाता है मगर अफगानिस्तान में इन 63 से ज्यादा शिया मुसलमानों के कत्ल के खिलाफ कोई आवाज उठाने वाला नहीं! क्यूं?  क्या यह  आतंकवाद  पर दोगलापन नहीं है? मीडिया भी सो रहा है। इंसानियत की बात करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी सो रही हैं।

अफगानिस्तान सरकार ने देश के 100वें स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में होने वाले समारोह को भी स्थगित कर दिया है। यह प्रोग्राम ऐतिहासिक दर-उल-अमन पैलेस में सोमवार को होना था। खामा प्रेस के मुताबिक, राष्ट्रपति के प्रवक्ता सेदिक सेदिक्की ने कहा कि सचिवालय ने राष्ट्रपति मोहम्मद अशरफ गनी के निर्देश पर अफगानिस्तान के 100वें स्वतंत्रता समारोह के आयोजन को टाल दिया है। राष्ट्रपति ने काबुल में हुए विस्फोट में मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति सम्मान व संवेदना व्यक्त करने के लिए यह फैसला लिया है।

लेकिन सवाल वही कैसे रोका जाए आतंकवाद? कैसे ख़त्म किये जायें आतंकवादी? हादसा होता है लोग निन्दा करते हैं संवेदना व्यक्त करते हैं फिर भूल जाते हैं। हकीकत में कोई भी देश आतंकवाद या आतंकवादी संगठन को खत्म करना नहीं चाहता एक दो अपवाद छोड़कर। शायद राजनीतिक फायदा हो! इच्छा शक्ति कमजोर हो! एक दूसरे देश से दुश्मनी हो! कोई न कोई कारण तो है। वरना दुनिया के मजबूत देश अमरीका, इंग्लैंड, रूस, चीन, भारत, जापान इत्यादि एक आतंकवाद खत्म नहीं कर पा रहे हैं। पूरी दुनिया में ज़ुल्म और अत्याचार हो रहे हैं। कहीं पर राजनीति की आड़ में ज़ुल्म और कहीं आतंकवाद के रूप में अत्याचार।
आतंकवाद की घटना निश्चित रूप से उन सभी चीजों से जुड़ी है, जो वास्तव में समाज में हो रहा है। समाज बिखर रहा है, खोखला हो रहा है। उसकी पुरानी व्यवस्था, अनुशासन, नैतिकता, धर्म , सत्य, सब कुछ गलत बुनियाद पर खड़ा है। लोगों की अंतरात्मा पर अब कोई पकड़ नहीं है।

आतंकवाद का मतलब वास्तव में इतना ही है कि कुछ लोग हैं जो मानते हैं कि मनुष्य को नष्ट करने से कोई फर्क नहीं पड़ता। ऐसा सोचने वालों के लिए मारना एक खेल हो जाता है।

लेकिन वास्तविकता यही है जो ओशो ने कहा कि जो व्यक्ति हर तरह की सुविधा में या ऐशो-आराम में जिंदगी गुजार रहा है, वह कभी आतंकवादी नहीं हो सकता। धनी आदमी कभी आतंकवादी नहीं हो सकता। वह तो सिर्फ संचालक हो सकता है। हमें ईमानदारी से समझना होगा कि आज लोग भय के वातावरण में जी रहे हैं, नफरत में जी रहे हैं, आनंद और खुशी में नहीं। हमें वैश्विक स्तर पर अपने मन को साफ रखने की जरूरत है। तभी इस घिनौने दलदल से बाहर निकल पायेंगे। बहरहाल मैं इस हमले की पुरजोर मज़म्मत और आलोचना करता हूं और शहीदों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदना और हमदर्दी प्रकट करता हूं।


 

19-Aug-2019

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