भाजपा द्वारा लखनऊ के होटल क्लार्क्स अवध  में पत्रकारों के लिए आम की आम दावत का आयोजन किया गया।  ऐसी दावत ऐसा आमंत्रण कि पूछिए मत।आम और ख़ास पत्रकारों के साथ कुछ पत्रकारों के झुंड के झुंड भाजपा की आम की दावत मे ऐसे पंहुच गये जैसे   आम की फ्री सेल लगी हो। नतीजा जो वास्तव में पढे लिखे अनुभवी और सज्जन पत्रकार थे उनको शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा।

वरिष्ठ पत्रकार नावेद भाई ने बहुत अच्छा  लिखा कि पत्रकार समारोह में आम के गिफ्ट बांटने वाले भाजपाइयों और पत्रकारों के मन ही नहीं शरीर भी मिल गये। पत्रकार मन मिलन कार्यक्रम में मन मिला हो या ना मिला हो पर एक दूसरे का शरीर मिल गया।  पेड़ों से आम गिरने की बात तो सबने सुनी और देखी है। लेकिन यहां तो बग़ैर पेड़ के आम टपक रहे थे। और  भीड़ की लूट ऐसी जैसे आम न होके कोई अजूबा हो। 

इज्जतदार पत्रकारों को शर्मिंदगी उठानी पड़ी।  पत्रकारिता की सूरत बदल चुकी है। जो वास्तव में पत्रकार हैं उनके लिए बहुत कठिन समय है क्योंकि आज के छुट्टा पत्रकार (पत्रकार कहते हैं मगर हैं नहीं) जो ना लिख सकते हैं ना किसी विषय की व्याख्या कर सकते हैं बस कुछ पैसे देकर कार्ड बनवा कर या अखबार, मैगजीन का रजिस्ट्रेशन करवाकर पत्रकार बन गये। ना भाषा पर पकड़, ना लिखने बोलने की क्षमता और ना सामाजिक विषयों को उठाने की क्षमता। नतीजा जो पत्रकार बरसों से मेहनत करके पत्रकारिता के मूल्यों को जिंदा रखे हैं उनको कष्ट का सामना करना पड़ रहा है।

पत्रकारिता करिये मगर मूल्यों से समझौता नहीं करिये। पत्रकारिता का जो दबदबा रहता था जो इज्ज़त थी वह अब कम होती जा रही है। पत्रकारिता के नाम पर जो फील्ड में हरकतें हो रही हैं उससे वरिष्ठ पत्रकारों और पत्रकारिता का नाम खराब हो रहा है। मेरा उन सभी दोस्तों से निवेदन है जो अखबार, मैगजीन, चैनल या पोर्टल चला रहे हैं कि अपनी टीम में पढे लिखे क्षमतावान लोगों को शामिल करें जिनके अंदर आत्मसम्मान और आत्मविश्वास की भावना हो। शामिल करते समय शिक्षा एवं पिछला विवरण जरूर  चेक करें। लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ को मजबूत बनाइये मजबूर नहीं।

सैय्यद एम अली तक़वी ब्यूरो चीफ (The Revolution News)

03-Jul-2019

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