हिंदुस्तान का माहौल बदल चुका है। हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई, आपस में सब भाई भाई। इस कथन के अर्थ को कुछ लोग  तार तार कर रहे हैं। नफ़रत की खाई बढ़ती जा रही है। अब हिंदुस्तान में इंसान नहीं हिंदू- मुसलमान, यादव, दलित, ब्रह्मण रहते हैं। क्या हो गया है हमारे देश को। कौन सी सोच पर हम चल पड़े हैं। हमारे देश की सबसे बड़ी कमी है राजनीति का गन्दा होना। लोभ लालच, आस्थाओं के मकड़जाल में हम इतना फंस चुके हैं कि हमको उठने बैठने खाने पीने कपड़े भाषा सब में धर्म दिखने लगा है।

जब एक नवजवान को घेर कर मारा जाता है तो कोई हिन्दू या मुसलमान नहीं मरता एक मां का बेटा, एक बहन का भाई, एक भाई का भाई, एक पत्नी का पति मरता है। एक हिंदुस्तानी मरता है। हम कहते हैं हिंदू मरा या मुसलमान मरा। ग़लत है। कोई भी इंसान मंदिर और मस्जिद में जाने पर हिंदू या मुसलमान हो सकता है लेकिन सार्वजनिक जीवन में वह इंसान है।
सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास इस नारे में खोखलापन दिखाई दे रहा है। सरकार को चाहिए कि इस खोखलेपन को भरे। 

यह कैसा साथ है, कैसा विकास है और कैसा विश्वास है कि जिसका जो चाहता है कर देता है। कभी पत्रकार को प्रताणित किया गया, कभी किसी की खंबे से बांधकर हत्या कर दी गई। कभी हेलमेट चेकिंग के नाम पर गन प्वाइंट पर लिया जाता है। सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए। प्रशासन को सख़्त करने की जरूरत है। 

याद रखिए जब इंसान इस दुनिया में आता है तो नंगा आता है और जब जाता है तो उसे मामूली कपड़ा (कफ़न) मिलता है चाहे वह हिंदू हो या मुसलमान या कोई और। इसलिए इंसान बनकर इंसानियत के बारे में सोचिए। क्योंकि आपको ईश्वर/अल्लाह के सामने हिसाब देना है।
जय हिन्द।

सैय्यद एम अली तक़वी, चीफ़ ब्यूरो (हम्दे मुल्क उर्दू)
        (The Revolution News)

25-Jun-2019

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