विश्व पर्यावरण दिवस। खूबसूरत नाम। खूब शोर शराबा। रिकॉर्ड ही रिकॉर्ड। फोटोग्राफी, अखबारों में सुर्खियां। बस यही है पर्यावरण दिवस। बढ़ती गर्मी, गिरता जल स्तर, चटखती ज़मीन, परेशान इंसान यही सब कुछ हर तरफ़ दिखाई दे रहा है। इसके पीछे कारण सबको मालूम है मगर एहसास नहीं है। पर्यावरण और स्वच्छता के स्तर में गिरावट के पीछे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई एक अहम कारण है। धरती पर बेशुमार पेड़ है, लेकिन लोग अपनी सुविधा और फायदे के लिए इन्हें जमकर काट रहे हैं। आज हालत यह हो गई है कि जंगल खत्म होने से कई इलाके बंजर हो गए हैं। पर्यावरण दिवस के अवसर पर हमें जानना होगा कि आज जंगल और पेड़ों के क्या हालात हैं.

विज्ञान पर आधारित विश्व विख्यात मैगजीन नेचर ने सितंबर 2015 में एक रिपोर्ट जारी की थी जो जंगल और पेड़ों के वर्तमान हालात पर आधारित है।

- दुनियाभर में 3 ट्रिलियन यानी 3,040,000,000,000 (एक लाख करोड़) पेड़ हैं।

- हर साल 15.3 अरब पेड़ काटे जा रहे हैं. इस तरह से 2 पेड़ प्रति व्यक्ति से भी ज्यादा का नुकसान हो रहा है।

- वैज्ञानिकों के अनुसार मानव सभ्यता की शुरुआत (करीब 12 हजार साल पहले) के समय धरती पर जितने पेड़ थे, उसमें आज की तारीख में 46 फीसदी की कमी आई है। यह चिंताजनक बात है।

- भारत के लिहाज से बात करें तो देश में प्रति व्यक्ति सिर्फ 28 पेड़ ही आते हैं। भारत में पेड़ों की संख्या करीब 35 अरब है। जबकि चीन में 139 अरब पेड़ हैं और प्रति व्यक्ति के लिहाज से 102 पेड़ आते हैं।

- वैश्विक स्तर पर देखा जाए तो सबसे ज्यादा पेड़ रूस में है जहां 641 अरब पेड़ हैं तो इसके बाद कनाड़ा, ब्राजील और अमेरिका का नंबर आता है जहां क्रमशः 318, 301 और 228 अरब पेड़ हैं।

- प्रति हेक्टेयर के हिसाब से सबसे घने पेड़ उत्तरी अमेरिका, स्कैंडेनविया और रूस में हैं। इन इलाकों में करीब 750 बिलियन पेड़ (750,000,000,000) हैं जो वैश्विक स्तर का करीब 24 फीसदी है।

- दुनिया के जमीनी क्षेत्र में करीब 31 फीसदी क्षेत्र जंगलों के घिरे हुए हैं, लेकिन इनमें तेजी से गिरावट आती जा रही है. 1990 से 2016 के बीच दुनिया से 502,000 स्क्ववायर मील (13 लाख स्क्वायर किलोमीटर) जंगल क्षेत्र खत्म हो गए हैं।

- इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट (आईएसएफआर) के अनुसार, 2017 में भारत में 708,273 स्क्वायर किलोमीटर यानी देश की कुल जमीन का 21.54% हिस्से पर ही जंगल हैं। जबकि सीआईए की वर्ल्ड फैक्ट बुक 2011 के अनुसार, दुनिया में 39,000,000 स्क्वायर किलोमीटर जमीन पर जंगल हैं।

- पेड़ों के लगातार कटाव से वन क्षेत्र लगातार खत्म होते जा रहे हैं। हम सलाना 1 करोड़ 87 लाख (1.87 मिलियन) एकड़ जंगल खोते जा रहे हैं यानी कि हर मिनट 27 फुटबॉल मैदान के बराबर जंगल नष्ट होते जा रहे हैं।

उक्त आंकड़े दिखाते हैं कि पेड़ों का कटना और जंगलों के खत्म होने का सिलसिला थम नहीं रहा है। अगर यही चलता रहा तो बहुत जल्द धरती का बड़ा हिस्सा बंजर हो जाएगा।  जंगल खत्म हो गए तो करोड़ों लोगों की रोजी-रोटी छीन जाएगी। ऐसे में जरुरी है कि जंगल भी बचाए जाएं और धरती को हरी-भरी रखी जाए जिससे आने वाली पीढ़ियां भी खूबसूरत धरती को निहार सके।

कल पर्यावरण दिवस मनाया गया खूब तस्वीरें दिखाई दीं। मगर क्या हम वास्तविकता समझ रहे हैं। नहीं, ज्यादा दूर जाने की जरूरत नहीं है सड़कों को चौड़ा करने के नाम पर अनगिनत पेड़ों को काट डाला गया। लेकिन क्या फिर नये पेड़ लगाए गए। मैं लखनऊ और आसपास की बात करता हूं। लखनऊ फैजाबाद रोड पर एक समय था जब लखनऊ से फैजाबाद तक दोनों तरफ घने पेड़ों की लाइन थी। पेड़ की शाखाओं का एक खूबसूरत दर दिखाई देता था। मगर आज सड़कें खुली और चटयल मैदान की तरह है मुसाफ़िर अगर कहीं साये में रूकना चाहे तो साया मिलना मुश्किल है। लखनऊ सीतापुर रोड खुली सड़क पेड़ गायब। यह क्या है इससे पर्यावरण की रक्षा नहीं हो सकती। तापमान बढ़ता जायेगा। हर तरफ़ गगनचुंबी इमारतें खड़ी होती जा रही हैं। हर तरफ़ सड़कों का यही हाल है।

सरकार और नागरिकों को इस विषय पर गहराई से विचार करने की जरूरत है। आज जरूरत है कि हर तरफ़ पेड़ लगाए जायें। शहरों के अन्दर सड़क के दोनों तरफ पेड़ लगाने की जरूरत है ताकि साया रहे और तापमान कम हो। ठंडक बनी रहे। एक दो जगहों पर जहां पेड़ हैं वहां का तापमान ठंडा रहता है। हर घर के सामने दो पेड़ों का लगाना आवश्यक कर देना चाहिए अन्यथा घर का असेसमेंट रद्द कर देना चाहिए। हाईवे पर दोनों तरफ पेड़ों का लगाना बहुत जरूरी है। अन्यथा आने वाली नस्लों का जीना मुश्किल हो जाएगा।
मेरा सरकार एवं जिम्मेदार नागरिकों से अनुरोध है कि इस नेक काम के लिए आगे आयें और बहुमूल्य मानव जीवन को बचाने के लिए कदम उठाएं।
 

सैय्यद एम अली तक़वी पत्रकार (हम्दे मुल्क उर्दू)

06-Jun-2019

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