सैयद कासिम  


मौलाना आपकी हम सब क़द्र करते हैं, इसका मतलब ये हरगिज़ नहीं होना चाहिए कि आप हमारे वोट का सौदा करें। आप एक ऐसी पार्टी को वोट देने की अपील कर रहे हैं जिसके लीडर मौला अली (अ. स.) की शान में खुल्लम खुल्ला तौहीन कर रहे हैं। आप दलील दे रहे हैं कि हज़रत अली पर टिप्पणी विधान सभा चुनाव का विषय है। क्या क़ौम को बेवकूफ समझ रखा है आपने? योगी ने ये टिप्पणी विधान सभा चुनाव के लिए नहीं, लोक सभा चुनाव के लिए की है। आप हमारे वोट के सौदागर नहीं बन सकते। इस मामले में आप में और वसीम रिज़वी में मुझे कोई फर्क नज़र नहीं आता। 
आपमें हिम्मत होती तो लोगों से नोटा पर वोट करने को कह सकते थे लेकिन नहीं किया क्योंकि इससे आपको भी अपनी असली ताकत का अंदाज़ा हो जाता और शियों के वोट के लिए कोई आपके दर पर नहीं आता। 
    मौलाना आपसे अदब के साथ कुछ सवालात करना चाहता हूँ-
1. आपने वसीम रिज़वी के खिलाफ जो मुहिम छेड़ी थी उसका क्या हुआ?

 2. आपके आंदोलन का जो स्टेटस पिछली हुकूमत में था वही आज भी है। आपका धरना, प्रदर्शन अब क्यों नहीं? 

3. UP की हुकूमत पर काबिज हाकिम का साफ कहना है की मुझे अली पर भरोसा नहीं है, क्या आपको भी हज़रत अली पर भरोसा नहीं है? 

अपील 
शिया वोटर आप बा शऊर हैं। लखनऊ के शिया हैं, कूफ़े के नहीं। अपना बेशकीमती वोट सोच समझ के देंगे। उलेमाओ की बात मोहर्रम में मेम्बर से सुन लीजियेगा उस पर अमल कर लीजियेगा। लेकिन इस वक़्त अपने मुस्तक़बिल को ज़ेरे नज़र रखते हुए सोच समझ कर EVM पर उंगली दबाइयेगा। ऐसा न हो कि बाद में पछतावा हो और उंगली कटवानी पड़े।
लेखक का अपना निजी विचार है 

05-May-2019

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