दिल्ली 

सेना के राजनीतिकरण के आरोप को लेकर 150 पूर्व सैनिकों के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को खत लिखने की बात झूठी साबित होती दिख रही है। राष्ट्रपति भवन के सूत्रों ने इन खबरों का खंडन करते हुए किसी भी खत के मिलने से इनकार किया है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी में कहा गया है कि पूर्व सैनिकों द्वारा लिखित कोई भी खत राष्ट्रपति को नहीं मिला है।  राष्ट्रपति भवन के इन खबरों का खंडन करने के बाद पूर्व सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) एसएफ रॉड्रिग्ज ने भी इन खबरों को झूठ बताया है। उन्होंने किसी भी तरह के हस्ताक्षर करने से भी इनकार किया है।

रिटायर्ड एयर चीफ मार्शल एनसी सूरी ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताय कि राष्ट्रपति को यह चिट्ठी एडमिरल रामदास ने नहीं लिखी जैसा दावा किया जा रहा है। बल्कि यह किसी मेजर चौधरी ने लिखी है। ये व्हॉट्सएप और ईमेल पर घूम रही थी।  पूर्व सेना उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल एमएल नायडु का नाम कथित चिट्ठी में 20वें नंबर पर है। उन्होंने कहा, 'नहीं इस तरह के किसी भी पत्र के लिए मेरी सहमति नहीं ली गई और न ही मैंने कोई पत्र लिखा है।'

 चिट्ठी में मेजर जनरल हर्ष कक्कड़ का नाम 31वें नंबर पर है। उन्होंने पत्र लिखने की बात स्वीकार करते हुए कहा, 'हां मैंने पत्र में हस्ताक्षरकर्ता होने के लिए अपनी सहमति दी है। मैंने इसकी सामग्री जानने के बाद ही अपनी सहमति दी थी।'

बता दें कि गुरूवार से खबरें आ रही हैं कि सेना के आठ पूर्व प्रमुखों और 148 अन्य पूर्व सैनिकों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर सशस्त्र सेनाओं का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किए जाने पर आक्रोश जताया। पत्र पर जिन लोगों के हस्ताक्षर की बात कही जा रही है उनमें पूर्व सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) एसएफ रॉड्रिग्ज, जनरल (सेवानिवृत्त) शंकर रॉयचौधरी और जनरल (सेवानिवृत्त) दीपक कपूर, भारतीय वायु सेना के पूर्व प्रमुख एयर चीफ मार्शल (सेवानिवृत्त) एनसी सूरी शामिल हैं।

 
 
 
12-Apr-2019

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