दिल्ली 

बसपा सुप्रीमो मायावती ने उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान अपनी और अपनी पार्टी के चुनाव चिन्ह हाथी की मूर्तियां लगाने के फैसले को सही ठहराया है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल कर यह बात कही. मायावती ने कहा कि उनकी मूर्तियां जनता की इच्छा का प्रतिनिधित्व करती हैं. इससे पहले बीते महीने सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मायावती को अपनी और हाथियों की मूर्तियों पर लगे जनता के पैसे को वापस करना होगा. हालांकि पीठ ने यह स्पष्ट किया था कि यह अभी संभावित विचार है, क्योंकि मामले की सुनवाई में कुछ वक्त लगेगा.

मायावती मूर्ति के लिए इमेज परिणाम

शीर्ष अदालत की तीन सदस्यीय पीठ एक वकील की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी. इसमें कहा गया था कि सार्वजनिक धन का प्रयोग अपनी मूर्तियां बनवाने और राजनीतिक दल का प्रचार करने के लिए नहीं किया जा सकता. इसी को लेकर मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा था, ‘हमारे संभावित विचार में मायावती को अपनी और चुनाव चिह्न (हाथी) की मूर्तियां बनवाने पर खर्च हुआ सार्वजनिक धन सरकारी खजाने में वापस जमा करना होगा.’

मायावती ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान उत्तर प्रदेश में कई पार्कों का निर्माण करवाया था. इन पार्कों में उन्होंने बसपा संस्थापक कांशीराम और पार्टी के चिह्न हाथी समेत अपनी मूर्तियां भी लगवाई थीं. तभी से यह मुद्दा अलग-अलग समय पर चर्चा में आता रहा है. इससे पहले 2015 में शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश की सरकार से पार्कों व मूर्तियों पर खर्च हुए सरकारी पैसे की जानकारी मांगी थी.

02-Apr-2019

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