एजेंसियों से

पटना : रेलवे आईआरसीटीसी टेंडर घाटाले में बुरी तरह फंसे लालू यादव और उनके परिवार की मुसीबतें लगातार बढ़ती जा रही है और एक बाद एक नया झटका लगता जा रहा है। ताज़ा झटका है पटना में तीन एकड़ जमीन पर बनाए जा रहा है मॉल का। प्रवर्तन निदेशालय ने अपना शिकंजा कसते हुए इस जमीन को जब्त कर लिया है।

रेलवे टेंडर स्कैम उस वक्त का मामला है जब लालू यादव यूपीए सरकार के दौरान रेलमंत्री थे। उनके ऊपर यह आरोप है कि उन्होंने गलत तरीके से  आईआरसीटीसी का टेंडर दिया था और उसके बदले उन्हें और उनके परिवार को फायदा पहुंचाया गया था। अभी करीब हफ्ता भर पहले ही इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से पूर्व मुख्यमंत्री और लालू यादव की पत्न से लंबी पूछताछ की गई थी। गौरतलब है कि लालू यादव और उनके परिवार के खिलाफ कई केन्द्रीय जांच एजेंसियां मनीलांड्रिंग समेत कई मामलों में जांच कर रही है।  

दरअसल, सीबीआई के मुताबिक, मई 2004 में जब लालू प्रसाद रेल मंत्री थे जो उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग किया। उन्होंने पटना स्थित होटल चाणक्य के मालिक विनय कोचर ओर विजय कोचर के साथ मिल कर करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार किया है। भ्रष्टाचार की साजिश में आईआरसीटीसी के एमडी सहित अन्य लोग भी शामिल थे। इस शिकायत के आधार पर सीबीआई ने प्रारंभिक जांच का मामला दर्ज किया और तफ्तीश में पता चला कि करोड़ों रुपये का यह घोटाला वर्ष 2004 से 2014 के बीच किया गया है।

 सीबीआई जांच पूरी होने के बाद पांच जुलाई 2017 को प्राथमिकी दर्ज की गई जिसमें लालू यादव, राबड़ी, बेटा तेजस्वी के साथ ही विजय कोचर, विनय कोचर, आईआरसीटीसी के पूर्व एमडी पीके गोयल और मैसर्स लारा प्रोजेक्ट्स उर्फ एलएलपी मैसर्स लारा प्रोजेक्ट्स प्रा.लि., मैसर्स डिलाईट मार्केटिंग कंपनी प्रा.लि. शामिल है। सीबीआई तफ्तीश में यह बात सामने आयी थी कि पूर्व रेल मंत्री ने अपने कार्यकाल के दौरान रांची और पुरी में बीएनआर होटलों के विकास, रखरखाव और संचालन के लिए टेंडर निकाले थे। बीएनआर होटल रेलवे के हेरिटेज होटल हैं जिन्हें आईआरसीटीसी ने अपने अधीन कर लिया था।। दोनों होटलों का टेंडर मैसर्स सुजाता होटल प्रा.लि. को दिया गया था। सुजाता होटल प्रा.लि. के मालिक विजय कोचर और उनका भाई हैं।

सीबीआई का कहना था कि तफ्तीश में यह भी खुलासा हुआ कि विनय कोचर और हर्ष कोचर ने 25 फरवरी 2005 में पटना स्थित तीन एकड़ जमीन को दस सेलडीड के जरिये सरला गुप्ता की कंपनी डीएमसीएल  को ट्रांसर्फर की गई और बाद में पूर्व रेल मंत्री की पत्नी की कंपनी लारा प्रोजेक्ट्स को ट्रांसर्फर की गई। सीबीआई के अतिरिक्त निदेशक ने बताया कि जिस सम्पति की कीमत सर्किल रेट के हिसाब से 32 करोड़ रुपये थे और मार्केट मूल्य 94 करोड़ रुपये उस जमीन को मात्र 65 लाख रुपये में बेचा गया था।

08-Dec-2017

Related Posts

Leave a Comment