पटना : एजेंसियों से 

बिहार की राजधानी पटना के पुलिस लाइन में एक ट्रेनी महिला सिपाही की मौत के बाद स्थानीय पुलिस के हिंसक होने और न्यू पुलिस लाइन में तोड़फोड़ करने के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। पटना पुलिस लाइन में प्रशिक्षु कांस्टेबल की मौत के बाद उपद्रव पर उतरे पुलिसकर्मियों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 167 प्रशिक्षु कांस्टेबलों सहित 175 कांस्टेबलों को बर्खास्त कर दिया गया। पटना के पुलिस महानिरीक्षक एन एच खान ने बताया, “साक्ष्य के आधार पर 167 प्रशिक्षु कांस्टेबल और आठ सिपाही बर्खास्त किए गए हैं। उपद्रव मामले में अभी कई पहलुओं पर छानबीन जारी है। दो से तीन दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। उन्होंने कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।” पुलिस अधिकारी के मुताबिक, इसके अलावा 27 हवलदारों को भी निलंबित कर दिया गया है। इतना ही नहीं 93 ऐसे पुलिसकर्मियों की पहचान कर उन्हें पटना प्रक्षेत्र से स्थनांतरित करने की बात कही गई है, जो वर्षो से पटना प्रक्षेत्र में पदस्थापित हैं। इसमें 20 से ज्यादा पुलिस अधिकारी बताए जा रहे हैं।

पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मनु महाराज ने सोमवार को बताया कि रविवार देर शाम की गई यह कार्रवाई अनुशासनहीनता के आरोप में उठाया गया कदम है। उन्होंने बताया कि पुलिस लाइन में हुआ उपद्रव कतई बर्दाश्त करने लायक नहीं था। उन्होंने कहा कि अभी भी जांच जारी है तथा और कई लोगों की पहचान की जा रही है। उन्होंने कहा कि उपद्रव करने वाले प्रशिक्षु पुलिसकर्मियो के खिलाफ थाने में प्राथमिकी भी दर्ज करवाई गई है। दरअसल, दो नवंबर को सीवान की रहने वाली प्रशिक्षु महिला कांस्टेबल सविता कुमारी पाठक की मौत के बाद सिपाहियों ने पुलिस लाइन में उपद्रव किया था। कई पुलिस अधिकारियों को पीटा गया था तथा कई सरकारी वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया था। इस दौरान पर सड़क पर आम लोगों को भी निशाना बनाया गया था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, नाराज पुलिसकर्मियों ने नगर पुलिस अधीक्षक, पुलिस उपाधीक्षक और सार्जेंट मेजर की भी पिटाई की। इतना ही नहीं आरोप है कि लाठी और डंडे से लैस पुलिसकर्मियों ने अधिकारियों को भी खदेड़ दिया और गाड़ियों को तोड़ डाला। इस दौरान मीडियाकर्मियों को भी निशाना बनाया गया। इसके बाद नाराज पुलिसकर्मी सड़क पर उतर गए और जमकर उत्पात मचाया। वहीं, जब आम लोग आक्रोशित हुए तब सभी पुलिसकर्मी पुलिस लाइन में लौट गए। इस दौरान दोनों ओर से पथराव हुआ। आक्रोशित पुलिसकर्मियों का आरोप था कि उन्हें छुट्टी तक नहीं दी जाती है।

पुलिसकर्मियों का आरोप है कि मृतका का भी छुट्टी न मिलने के कारण सही ढंग से इलाज नहीं हो पाया, जिससे उनकी मौत हो गई। घटना के बाद बाद में एसएसपी मनु महाराज ने इस मामले के दोषी लोगों पर कार्रवाई कराने की बात कही और फिर एक जांच कमिटी को दोषियों का पता लगाने और मामले की तफ्तीश करने की जिम्मेदारी दी गई थी। राज्य सरकार का मानना है कि जिस तरह से हिंसा खुद वर्दी पहनकर पुलिसकर्मियों ने खासकर महिला सिपाहियों ने अंजाम दिया वो काफी चिंता का विषय था।

05-Nov-2018

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