जिस तरह से जमालुद्दीन खाँ पूर्व प्रधान और  रशीद खाँ पूर्व प्रमुख ने षड़यंत्र करके शाहजहां अंसारी के ऊपर घर में घुस कर जानलेवा हमला करवाया वो आश्चर्यचकित करने वाला और अपने आप में असाधारण था. इससे पूरा कमसार स्तब्ध है. यह घटना असाधारण इसलिए भी है क्योंकि जिस घर पर हमला हुआ वो घर एक समाज में बहुत ही सम्मानित और प्रतिष्ठा वाला घराना है और उस घर पर हमला करना कोई छोटी घटना नहीं थी. इस अंसारी परिवार ने दो बड़े अधिकारी जनाब वज़ीर अंसारी (पूर्व डीजीपी) और प्रोफेसर मुख़्तार अंसारी(पूर्व सुचना आयुक्त) दिए जो ना सिर्फ अपने समाज के लिए अनुकरणीय कार्य किये हैं बल्कि पुरे समाज को इनसे भारी लाभ हुआ है. शाहजहां अंसारी के पिता श्री बादशाह अंसारी भी काफी सामाजिक रहे हैं और गांव के भले कार्यों ने उनका अच्छा योगदान रहा है. जब तक उनकी तबियत अच्छी थी वो इस्लामिया स्कूल के मैनेजर के पद पर कार्यरत रहे. खास तौर से पठान बिरादरी अंसारी परिवार की वजह से काफी लाभ उठाते रहे हैं. प्रोफेसर मुख़्तार अंसारी(पूर्व सुचना आयुक्त)  ने जहाँ कमसार को  एसकेबीऍम जैसी डिग्री कॉलेज की मान्यता दिलवायी, वहीँ  श्री वज़ीर अंसारी कमसार ही क्या पुरे गाज़ीपुर में काफी लोकप्रिय रहे हैं और इनको इलाक़े का बच्चा-बच्चा जानता और इज़्ज़त करता है और प्रेरणा स्त्रोत समझता है. 
जमालुद्दीन खाँ पूर्व प्रधान और  रशीद खाँ पूर्व प्रमुख जैसे चतुर राजनेताओं की वजह से जिन्होंने उत्तर मोहल्ला (जामा मस्जिद पर) के कुछ लोगों को उकसाया और पंचायत करके इस प्रकरण में शाहजहां अंसारी के सम्मलित न होने के बावजूद भी और सिर्फ शक के आधार पर उनका नाम घसीटा गया और उनको लक्ष्य बनाया। बाद में एक इज़्ज़तदार खातून को मोहरा बनाकर उससे हर जगह झूठा गवाही दिलवाई और ३१ दिन बाद झूठा मुक़दमा करने  में सफल रहे।  हाजी बादशाह अंसारी जो कि स्वास्थ्य ठीक न होने की वजह से पिछले ५ वर्षों से बिस्तर पर है और चल -फिर नहीं सकते हैं, उनके साथ भी इन बदमाशों ने घर में खुलकर गाली गलोज की, शाहजहां अंसारी की माँ जो बीमार रहती हैं, उनके साथ भी अभद्र व्यवहार किया गया और यदि वह वहां से हटती नहीं तो उनको भी बदमाशों के धक्का मुक्की करने से चोट आ सकती थी. इतना ही नहीं लगभग ३0-४० लोग जो घर में घुस आये थे शाहजहां अंसारी को घसीटते हुए बाहर ले गए और इतना पीटा की वो बेचारा मौके पर ही बेहोश हो गया और सर में, सीने में और कमर में काफी गंभीर छोटे आयी हैं जिसका इलाज अभी भी चल रहा है. यदि गांव वालों का विश्वाश किया जाये तो जमालुद्दीन खां और रशीद प्रमुख का मूल षड़यंत्र ये था कि शाहजहां अंसारी को रेलवे स्टेशन पर लिटा दिया जाये और ट्रैन के आने से इसकी मौत हो जाये। इसी को अंजाम देने के लिए ये लोग शाहजहां अंसारी के बेहोश होने के बावजूद भी खटिया पर लाद कर जमालुद्दीन खां के दुवारे में ले गए और ट्रैन आने का इंतज़ार करने लगे. लेकिन वही पर पुलिस के समय पर आ जाने से और तत्काल एम्बुलेंस द्वारा भदौरा सरकारी अस्पताल में भर्ती होने और फिर गाज़ीपुर सिटी हॉस्पिटल रेफर होने की वजह से शाहजहां अंसारी की जान बचायी जा सकी. इस घटना क्रम में पुलिस का कार्य काफी सराहनीय रहा और पुलिस के समय पर आने से बड़ी अनहोनी घटना को टाला जा सका. 
इस घटना से पहले कुछ खास घटना क्रम जो इस बड़ी साजिश की तरफ इशारा करता हैं:
१)  शाहजहां अंसारी के ऊपर लांछन लगा कर झूठे केस में फ़साने की पूर्व  में भी जमालुद्दीन खां की महत्वपूर्ण भूमिका रही है . इसलिए इस बार कोई आश्चर्य नहीं है इनकी भूमिका पर और साजिश में बढ़ जढ़कर कर हिस्सा लेने पर.  
२) महिला के साथ छिनताई की घटना में ४-५ लोगों का नाम उछाल रहा था जिसमे इरफ़ान खान और शाहनवाज़ खान का नाम मुख्य रूप से था लेकिन जब इन लोगों ने महिला से थाने में तहरीर दिलवाई तो कुछ पठानों का नाम निकाल दिया और शाहजहां अंसारी को मुख्य अभियुक्त बनाया ताकि जो एफ.आई.आर शाहजहां अंसारी ने करवाया है इनके खिलाफ उसको क्रॉस एफ.आई.आर करके  कमज़ोर किया जा सके.    
३) इन लोगों ने खाप पंचायत बुलाकर शाहजहाँ अंसारी की आड़ में बड़ी घटना को घर में घुसकर अंजाम दिया और बूढ़े माता पिता और घर की महिलाओं  के  साथ अभद्र भेवहार किया और ये ही नहीं घर की औरतों को भद्दी-भद्दी गाली दी.  अपाहिज पिता को भी बुरी-बुरी गलियां दी. इनलोगों ने उससे बड़ा अपराध किया। 
४) अंसारी परिवार की रेलवे स्टेशन वाली ज़मीन विवाद में भी जमालुद्दीन खां ने इनाम खान को उकसाया और उसको हाई कोर्ट से स्टे दिलवाने में भारी मदद की ताकि वज़ीर अंसारी का स्कूल बनाने का सपना चूर हो जाये और कार्य रुक जाये और वही हुआ। रातो रात इनको स्टे मिल गया और एक अच्छा कार्य होने से रह गया जिससे गांव के भविष्य को भरी नुकसान हुआ. अन्यथा अंसारी परिवार की गांव के लोगों के लिए एक अच्छा स्कूल बनाने की योजना थी. 
५) श्री वज़ीर अंसारी का नाम कुछ लोग जैसे शमशाद खान नेता (उत्तर मोहल्ला, उसिया) और मोहम्मद एकराम खान (दखिन मोहल्ला, उसिया) फेसबुक पर उनका फोटो लगा कर लोगों से सलाह मांग रहे थे की श्री वज़ीर अंसारी को कौन सी पार्टी ज्वाइन करनी चाहिए। जब उनसे पूछा गया इसबारे में तो इनको इसकी कोई जानकारी नहीं थी. इससे मालूम चलता है की ये लोग जान बुझ कर इनका नाम उछाल रहे थे और जो नेता कमसार में बरसो से जमे हुए है उनको ये डर सताने लगा था की कहीं ये नौकरी से रिटायरमेंट के बाद गांव पर आ गए और किसी राजनीति पार्टी में शामिल हो गए तो इनकी अच्छी छवि होने की वजह से इन सारे जमे जमाये नेताओं की दुकाने बंद हो जाएगी. 
६) महिला के साथ घटना १९ अगस्त को हुई थी, लेकिन इन लोगों ने ६ दिन तक इंतज़ार किया और हमला २५ अगस्त को किया। ऐसा प्रतीत होता है की मामला कुछ और था अन्यथा पठान ६ दिन तक इंतज़ार नहीं करते किसी को पीटने के लिए. महिला के साथ घटना होने के ६ दिन के बाद इन लोगों ने शाहजहां अंसारी पर योजनाबद तरीके से ४०-५० लोगों के

७) शाजहाँ अंसारी पर घर में घुसकर जानलेवा हमला करने से एक हफ्ते पहले ही उसिया सैफन पर हारुन  खान और उसके बेटों ने (जामा मस्जिद पर) ने अंसारी परिवार की जमीन पर कब्ज़ा करने का प्रयत्न किया था जिसपर शाहजहां अंसारी ने आपत्ति किया तो इनलोगों ने गाली गलोज और हाथापाई की. इन लोगों ने कई बार जिसमे  रियाजुल खान (लकड़ी वाला) भी  शामिल है, रास्ते में आते-जाते शाहजहां अंसारी को धमकी दी थी कि तुमको किसी दिन हम लोग बहुत मारेंगे, और वही हुआ. शाहजहां अंसारी पर २५ अगस्त के हमले में हारुन  खान और उसके दोनों लड़के सद्दाम और अफजाल खान भी शामिल थे जिससे इस बड़ी शाजिश कर पता चलता है.
८) घटना के ३१ दिन के बाद इन लोगों ने ज़मानिया सी.ओ. पर दबाव बनाकर क्रॉस FIR करने में सफल रहे ताकि इनपर जो शाहजहां अंसारी पर जान से मारने के लिए ३०७ का मुक़दमा लगा है उसको कमज़ोर किया जा सके और परिवार पर दबाव बनाया जा सके.

इन तथ्यों को देखते हुए अब गांव की जनता को निश्चित करना है की ऐसे गुंडा तत्वों को भविष्य में कैसे सबक सिखाना है, ऐसा आज अंसारी परिवार के साथ हुआ है, कल को किसी और के साथ भी हो सकता है. लोग आपके घर में घुसकर गुंडागर्दी कर सकते हैं, कानून को अपने हाथ में लेकर कुछ भी अपराध कर सकते हैं. ऐसे में पुरे समाज को बैठकर ऐसे बदमाश तत्वों और आपराधिक छवि की लोगों द्वारा पंचायत का गलत इस्तेमाल पर लगाम कसने की जरूरत है और साथ ही साथ पुलिस और न्यायालय को ऐसे संगीन जुर्म को नज़र अंदाज़ नहीं करकर उचित कार्यवाही करते हुए इस गुंडागर्दी में शामिल सारे नामजद आरोपियों को अविलम्ब जेल भेजना चाहिए।

 

24-Sep-2018

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