बिहार के बहुचर्चित 12 सौ करोड़ से अधिक के सृजन घोटाले के बाद बिहार में एक और बड़ा घोटाला उजागर हुआ है। नया घोटाला ‘महादलित विकास मिशन’ में हुआ है। प्रारंभिक जांच में घोटाला करीब चार करोड़ रुपये का है। लेकिन, मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इसकी राशि बढ़ सकती है। दैनिक जागरण अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक महादलित विकास मिशन के तहत ट्रेनिंग और सुविधाएं देने के नाम पर हुए इस घोटाले में निगरानी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सोमवार (30 अक्टूबर) को विभाग के दो वर्तमान आईएएस, दो पूर्व (सेवानिवृत) आईएएस समेत 10 पर केस दर्ज किया है। एफआइआर की प्रति पटना स्थित निगरानी की विशेष अदालत को भेज दी गई है। अब निगरानी अन्वेषण ब्यूरो आरोपियों की गिरफ्तारी की तैयारी में है।

NITISH KUMAR के लिए चित्र परिणाम

जागरण के मुताबिक, महादलित विकास मिशन को सफल बनाने के लिए बिहार सरकार ने करोड़ों रुपये आवंटित किए। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले महादलित अभ्यथिर्यों को सुविधाएं और साधन देने के लिए श्रीराम न्यू होरिजन और आईआईआईएम कंपनी को टेंडर दिया गया। आईआईआईएम का पटना के बोरिंग रोड स्थित कल्पना मार्केट में शाखा कार्यालय है।

निगरानी के अनुसार आरोपियों ने मिलकर एक षडयंत्र के तहत प्रशिक्षण लेने वालों का गलत आंकड़ा और खर्च दिखा 2010 से 2016 के बीच मिशन के अंतर्गत चल रही योजनाओं के नाम पर करोड़ो रुपये डकार लिए। घोटाला उजागर होने के बाद मिशन की ओर से मुख्य सचिव को पत्र लिखा गया। पत्र के आलोक में सरकार ने जांच का जिम्मा निगरानी को सौंपा।

निगरानी ने निगरानी डीएसपी अरुण कुमार के नेतृत्व में एक टीम गठित कर जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच के बाद डीएसपी के आवेदन के आधार पर निगरानी कांड संख्या 81/2017 दर्ज किया गया। 2010 से 2016 के बीच करोड़ों का घपला उजागर होने के बाद मिशन ने मुख्य सचिव को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा गया था। जिसके बाद मुख्य सचिव ने घोटाले की जांच निगरानी को सौंपी।

क्या है महादलित विकास मिशन?

रिपोर्ट के अनुसार, महादलितों के उत्थान के लिए 2007 में बिहार सरकार ने महादलित विकास मिशन शुरू किया था। यह मिशन 2010 से कार्य करने लगा। मिशन को सामुदायिक भवन का निर्माण, सहायता कॉल केंद्र की स्थापना, विशेष विद्यालय सह छात्रवास का निर्माण व मुख्यमंत्री महादलित रेडियो योजना के तहत रेडियो वितरित करने की स्वीकृति दी गई थी।

प्रभात खबर के मुताबिक महादलित विकास मिशन के तहत दलित समुदाय के छात्रों को 16 से ज्यादा ट्रेडों में कौशल विकास के तहत मुफ्त ट्रेनिंग दी जाती है। ट्रेनिंग का पूरा खर्च बिहार सरकार देती है। इसके लिए निजी एजेंसियों का चयन किया जाता है। इस पूरे मामले में हुई अब तक की जांच में यह बात सामने आई है कि जिन ट्रेनिंग सेंटरों में दलित छात्रों का नामांकन एक जिले में किया गया है, उन्हीं छात्रों का नाम दूसरे, तीसरे और चौथे ट्रेनिंग में दर्ज करवा कर पैसे निकाल लिए गए।

इस तरह एक छात्र के नाम पर कई बार रुपये निकाले लिये गये। इसके अलावा कई ऐसी एजेंसियों को ट्रेनिंग सेंटर दे दी गई, जो सिर्फ कागज पर ही मौजूद हैं। इनका हकीकत में कोई अता-पता ही नहीं है। कई ऐसी एजेंसियों को भुगतान कर दिया गया, जिनमें कभी कोई ट्रेनिंग हुई ही नहीं है।

इस तरह से पूरे ट्रेनिंग कार्यक्रमों को कागजी तौर पर संचालित करके सवा चार करोड़ से ज्यादा सरकारी राशि का गबन किया गया है, जिसमें बड़े अधिकारी से लेकर सभी स्तर के सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत है। जांच में अभी कई लोगों के नाम सामने आने और घोटाले की राशि बढ़ने की आशंका जताई गई है।

इन आरोपी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज हुआ है FIR 

1. आईएएस रवि मनु भाई परमार (मिशन के तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी व मुंबई पोर्ट ट्रस्ट के वर्तमान उपाध्यक्ष)
2. निलंबित आईएएस एसएम राजू (बिहार महादलित विकास मिशन के तत्कालीन मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी)
3. सेवानिवृत आईएएस केपी रमैया (मिशन के तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी एवं बिहार भूमि न्याय अधिकरण, पटना के वर्तमान सदस्य)
4. सेवानिवृत आईएएस रामाशीष पासवान (मिशन के तत्कालीन निदेशक)
5. प्रभात कुमार (मिशन के तत्कालीन निदेशक सेवानिवृत बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी)
6. देवजानी कर (मिशन की राज्य परियोजना पदाधिकारी)
7. उमेश मांझी (मिशन के राज्य परियोजना प्रबंधक)
8. शरत कुमार झा (कोलकाता आधारित साल्ट लेक सिटी स्थित इंडस इंटेगरेटेड इंफॉरमेशन मैनेजमेंट लिमिटेड के निदेशक)
9. सौरभ बसु (न्यू देहली आधारित श्रीराम न्यू होरिजन कंपनी के उपाध्यक्ष)
10. जयदीप कर (पटना बेलीरोड के जगत अमरावती अपार्टमेंट के निवासी)

इस मामले में राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के विधायक और पार्टी प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने ‘जनता का रिपोर्टर’ से बातचीत में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आरजेडी प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि इस घोटाले में नीतीश कुमार के कई बेहद करीबी अधिकारी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह घोटाला चार करोड़ से कई गुना अधिक हुआ है।

सिंह ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री कार्यालय में बैठकर इस घोटाले को अंजाम दिया गया है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से सृजन घोटाले का दायरा बढ़कर दो हजार करोड़ रुपये से अधिक का हो गया है उसी प्रकार से ‘महादलित विकास मिशन’ घोटाला भी सैकड़ों करोड़ का है। आरजेडी नेता ने कहा कि नीतीश सरकार गरीबों के नाम पर नियमों को ताक पर रखकर तमाम योजनाओं की शुरूआत कर रही है, जिसका फायदा सिर्फ उनके करीबी अधिकारी उठा रहे हैं।

साभार  JANTAKAREPORTER.COM

31-Oct-2017

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