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नई दिल्ली : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रिपब्लिक टीवी और रिपब्लिक भारत को बड़ी राहत दी है। उन्होंने कहा कि टेलीविजन रेटिंग पॉइंट्स (टीआरपी) में हेराफेरी के मामले में रिपब्लिक टीवी और आर भारत की संलिप्तता का कोई सबूत नहीं है। केंद्रीय एजेंसी ने कहा कि उसके निष्कर्ष मुंबई पुलिस द्वारा की गई जांच के साथ अलग थे।

चार्जशीट दाखिल किया था
अर्नब गोस्वामी के स्वामित्व वाले रिपब्लिक टीवी और आर भारत पर अक्टूबर 2020 में टीआरपी नंबरों में हेरफेर करने का आरोप लगाया गया था। इससे पहले 15 सितंबर को ईडी ने धन शोधन रोकथाम कानून (पीएमएलए) के तहत विशेष अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था।

विज्ञापन अर्जित कर राजस्व में वृद्धि
केंद्रीय एजेंसी द्वारा नवंबर 2020 में प्रवर्तन मामले की सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दायर करने के बाद चार्जशीट दायर की गई थी। नवंबर 2020 में मुंबई पुलिस अपराध शाखा ने एक आरोप पत्र दायर किया जिसमें सुझाव दिया गया था कि रिपब्लिक टीवी ने टेलीविजन चैनलों की टीआरपी रेटिंग के साथ छेड़छाड़ की थी। इसके माध्यम से उन्होंने विज्ञापन अर्जित कर राजस्व में वृद्धि की थी।

ईडी को नहीं मिला कोई सबूत
क्राइम ब्रांच ने अर्नब गोस्वामी को आरोपी के रूप में जून 2021 में चार्जशीट किया था। हालांकि, ईडी ने खुलासा किया कि मुंबई पुलिस द्वारा की जा रही जांच और इस मामले में अपनी जांच के बीच अंतर है। ईडी ने कहा कि उसे कोई सबूत नहीं मिला है। चाहे वह डिजिटल हो या किसी का बयान। जिससे साबित हो सके कि रिपब्लिक टीवी ने टीआरपी नंबरों में हेरफेर किया था।

न्यूज नेशन और इंडिया टुडे के खिलाफ जांच जारी
ईडी ने दावा किया कि टीआरपी मामले में मुंबई पुलिस द्वारा संबंधित फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट सुपरफिसियल है। यह केवल सीमित बिंदुओं पर आधारित है। इसके अलावा केंद्रीय एजेंसी ने कहा कि कुछ क्षेत्रीय और मनोरंजन चैनलों के सबूत हैं जिन्होंने टीआरपी में धांधली की है। ईडी ने यह भी कहा कि दो अन्य समाचार चैनलों न्यूज नेशन और इंडिया टुडे के खिलाफ जांच अभी पूरी नहीं हुई है।

22-Sep-2022

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